गोरखपुर: पूर्व कमिश्नर की मृत पत्नी को जिंदा बताकर बेच डाली करोड़ों की जमीन, 11 के खिलाफ FIR

उत्तर प्रदेश (Uttar Padesh) में भले ही एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स बनी हो लेकिन जमीन के फर्जीवाड़े, अवैध कब्जे आदि के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ऐसा ही एक मामला गोरखपुर (Gorakhpur) में सामने आया है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 10, 2019, 12:46 PM IST
गोरखपुर: पूर्व कमिश्नर की मृत पत्नी को जिंदा बताकर बेच डाली करोड़ों की जमीन, 11 के खिलाफ FIR
गोरखपुर में मृत व्यक्ति को कागजों में जिंदा दिखाकर उसके नाम से करोड़ों की जमीन बेचने का मामला सामने आया है.
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Updated: September 10, 2019, 12:46 PM IST
गोरखपुर:  उत्तर प्रदेश (Uttar Padesh) में भले ही एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स बनी हो लेकिन जमीन के फर्जीवाड़े, अवैध कब्जे आदि के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ऐसा ही एक मामला गोरखपुर (Gorakhpur) में सामने आया है. यहां पूर्व आईएएस अफसर और गोरखपुर के कमिश्नर रह चुके सैयद सिद्दीकी हसन की मृत पत्नी को जालसाजों ने कागज में ‘जिंदा’ कर दिया और उनके नाम से करोड़ों की बेशकीमती जमीन का सौदा कर दिया. और तो और जालसाजों ने उनके पोते का भी फर्जी पहचानपत्र बनाकर कुल साढ़े छह एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कर दी. मामले में अब कैंट पुलिस ने 11 लोगों पर जाली दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. ये जमीन भटहट क्षेत्र में बांसस्थान के पास हाइवे किनारे स्थित है.

ऐसे हुआ खुलासा
दरअसल पूर्व कमिश्नर सैयद सिद्दीकी हसन के पोते का नाम भी सैयद सिद्दीकी हसन है. सैयद सिद्दीकी हसन ने दो माह पहले गोरखपुर में स्थित जमीन की देख-रेख के लिए कोतवाली क्षेत्र के शाहमारूफ निवासी शमशुल हक पुत्र मोहम्मद वासिल खां को पावर ऑफ अटार्नी दी. उन्होंने जमीन के कागजात निकलवाए तो फर्जीवाड़े की जानकारी मिली. इस पर उन्होंने फर्जीवाड़े की जानकारी लखनऊ में रहने वाले भूमि के मालिक सैयद सिद्दीकी हसन को दी. इसके बाद शमशुल हक की तहरीर पर कैंट पुलिस ने अंशु राय, प्रवीण कुमार राय, कृपाशंकर राय, राजेश कुमार राय, अली असगर, श्रवण पाण्डेय, राघवेन्द्र दूबे, मारकण्डेय सिंह, पवन कुमार यादव, उमेश चन्द और महेन्द्र कुमार के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया है.

1954 में गोरखपुर में थे कमिश्नर, पत्नी व पोते के नाम खरीदी जमीन

दरअसल लखनऊ शहर के हजरतगंज के 9 रानी लक्ष्मीबाई मार्ग निवासी सैयद सिद्दकी हसन के दादा वर्ष 1954 गोरखपुर में कमिश्नर के पद पर तैनात थे. उसी समय उन्होंने पत्नी शहर आरा हसन और अपने पोते सैयद सिद्दीकी हसन के नाम पर भटहट क्षेत्र के बांसस्थान के मौजा पिपरी में 9.5-9.5 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करायी थी. 16 फरवरी 1996 को आरा हसन की मृत्यु हो गई. पोते सैयद सिद्दीकी हसन ने अभी जमीन का वरासत नहीं कराया था. इस बीच जालसाजों ने 5 जनवरी 2019 को फर्जी आईडी बनाकर 40 वर्ष की महिला को खड़ा कर और उसका फोटो लगाकर दो एकड़ जमीन बेच डाली. यह जमीन शाहपुर क्षेत्र के बशारतपुर, कृष्णानगर प्राइवेट कॉलोनी निवासी मारकण्डेय सिंह और बशारतपुर, रामजानकीनगर निवासी पवन कुमार यादव के पक्ष में रजिस्ट्री की गई है.  रजिस्ट्री में गवाही खजनी, कुरी बाजार क्षेत्र के सुअरहा गांव निवासी महेन्द्र कुमार और कैम्पियरगंज के सरहरी निवासी उमेश ने की.

जाली दस्तावेज और झूठे गवाह के साथ किया पूरा खेल

इसके बाद जालसाजों ने पूर्व कमिश्नर के पोते सैयद सिद्दीकी हसन के नाम पर एक व्यक्ति को खड़ा किया और फर्जी आईडी और उसका फोटो लगाकर उनकी 4.5 एकड़ जमीन बेच डाली. यह रजिस्ट्री 8 फरवरी 2019 को की गई. यह जमीन तारामंडल क्षेत्र के एचआईजी बी/290 निवासी अंशु राय, गोला बाजार के ब्रह्मस्थान निवासी प्रवीण कुमार राय, मऊ जिले के मोहम्मदाबाद, गोहना क्षेत्र के अमरहत, अमारी गांव निवासी कृपाशंकर राय, राजेश कुमार राय और गोरखपुर के नकहा नंबर 1 अली असगर के पक्ष में की गई. इस रजिस्ट्री में गवाही बेलीपार क्षेत्र के भिलौरा निवासी श्रवण पाण्डेय और शाहपुर क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी, गीता वाटिका वार्ड नंबर 31 निवासी राघवेन्द्र दुबे ने की.
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First published: September 10, 2019, 12:43 PM IST
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