गोरखपुरः उपचुनाव तारीखों के ऐलान के बाद अभी तक प्रत्याशियों का अता-पता नहीं!

सवाल है कि क्या इस बार भी गोरक्षनाथ मंदिर से जुड़े व्यक्ति को टिकट बीजेपी उम्मीदवार बनाएगी या फिर संगठन को तरजीह दिया जाएगा?

ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 15, 2018, 10:17 PM IST
गोरखपुरः उपचुनाव तारीखों के ऐलान के बाद अभी तक प्रत्याशियों का अता-पता नहीं!
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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Updated: February 15, 2018, 10:17 PM IST
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे के बाद खाली हुई गोरखपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के तारीखों का ऐलान हो चुका है, लेकिन अभी तक किसी भी दल द्वारा अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं किए जाने से माहौल गर्म हो गया है. माना जा रहा है कि 13 मार्च को अधिसूचित उप चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल वेट एन्ड वॉच की स्थिति में हैं और कोई भी अपने पत्ते नहीं खोलना चाहता है.

रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के खाते में रही गोरखपुर लोकसभा सीट पार्टी अपने खाते में ही रखना चाहेगी. यही कारण है कि लोगों में सबसे अधिक उत्सुकता बीजेपी का प्रत्याशी के नाम को लेकर हैं. सवाल है कि क्या इस बार भी गोरक्षनाथ मंदिर से जुड़े व्यक्ति को टिकट बीजेपी उम्मीदवार बनाएगी या फिर संगठन को तरजीह दिया जाएगा?

हालांकि संगठन की बात की जाए तो क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र शुक्ला के साथ साथ धर्मेन्द्र सिंह, पूर्व मेयर सत्या पान्डेय का नाम की चर्चा इलाके में जोरों पर है, तो कालीबाड़ी के मंहत रवीन्द्र दास से पूर्व गृहमंत्री स्वामी चिन्मायनन्द और अभिनेता रवि किशन का नाम भी चर्चा में हैं. वहीं, प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने भी अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं, उसका कहना है कि बीजेपी पहले प्रत्याशी घोषित करे तब वो अपना प्रत्याशी घोषित करेंगे.

वैसे, सपा पार्टी प्रत्याशी के रुप में सबसे अधिक चर्चा रामभुआल निषाद, राजमति निषाद के अलावा निषाद नेता संजय निषाद के बेटे संतोष की है, जिन्हें पार्टी मैदान में उतार सकती है. हालांकि सपा प्रत्याशी के रुप में भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव ऊर्फ निरुहुआ के नाम की भी चर्चा में जोरों पर है.

हालांकि गोरखुपर लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस और सपा की दोस्ती टूटती हुई दिखाई दे रही है, क्योंकि प्रदेश कांग्रेस ने पहले ही तीन नामों पर चर्चा कर उन्हें हाईकमान को भेज दिया है, जिनमें सिद्धार्थ प्रिय श्रीवास्तव, डॉ पीएन भट्ट, अष्ठभुजा त्रिपाठी, रामनाथ निषाद और राजेन्द्र प्रसाद यादव शामिल हैं.
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