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जल पुरुष राजेन्द्र सिंह बोले- उत्तराखंड त्रासदी मानव निर्मित आपदा, सभी को पता था ये होगा

जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने उत्तराखंड त्रासदी को मानव निर्मित आपदा बताया

जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने उत्तराखंड त्रासदी को मानव निर्मित आपदा बताया

Gorakhpur News: राजेंद्र सिंह ने कहा कि ये सरकार को भी मालूम था. इन तीनों छोटी नदियों की प्रकृति को समझ कर उसका सम्मान नहीं करेंगे और मनमर्जी से बांध बनाते जायेंगे तो उसका संकट आपको भुगतना पड़ेगा.

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गोरखपुर. जल पुरुष के नाम से विख्यात राजेन्द्र सिंह (Rajendra Singh) ने उत्तराखंड (Uttarakhand) में आए जल प्रलय (Glacier Burst) को मानव निर्मित आपदा करार दिया है. गोरखपुर (Gorakhpur) पहुंचे राजेंद्र सिंह ने कहा कि यह सरकार और समाज दोनों को पता था कि यह आपदा आने वाली है. प्रकृति के क्रोध की अनदेखी और मनमर्जी से बांधों के निर्माण  की वजह से यह त्रासदी आई.

न्यूज 18 से बात करते हुए कहा कि 1992 से हम बराबर कह रहे थे कि अलकनंदा, भगीरथी और मंदाकिनी ये तीनों नदियां पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण तो हैं ही साथ ही ये तीनों नदियां भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों से होकर बहती हैं. तीनों नदियां ग्लेसियर से होकर निकलती हैं और यहां अक्सर बादल फटते हैं. तो ये जो प्रकृति का क्रोध है, गुस्सा है, हमें मालूम था. ये होगा. ये सरकार को भी मालूम था. इन तीनों छोटी नदियों की प्रकृति को समझ कर उसका सम्मान नहीं करेंगे और मनमर्जी से बांध बनाते जायेंगे तो उसका संकट आपको भुगतना पड़ेगा.

सरकार पर अनदेखी का आरोप 

उन्होंने कहा कि 1992 में केवल टिहरी बांध था. इसको उर्जा खंड बनाने के लिए पहले 265 बांध बना रहे थे. विरोध के बाद इसे रद्द करवाया गया. अलकनंदा देश की एकमात्र ऐसी नदी है जिसपर पांच प्रयाग हैं. विष्णु प्रयाग, नंद प्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देव प्रयाग. राजेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रयाग वो होता है जहां पर दो जल धराएं मिलकर जल की गुणवत्ता बढ़ा देती हैं. ऐसी नदी को सरकार को जरूर बचाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने अनदेखी की. इस नदी पर आठ बांध बन रहे हैं और जो तपोवन बांध टूटा है वो सबसे नया बांध है. इसके विरोध में हमलोगों ने पांच छह सालों से आवाज उठाई है.

उत्तराखंड में पर्यटन की जगह तीर्थाटन करें 

उन्होंने कहा कि जब राज और समाज दोनो ये जानते हैं कि ये प्रकृति के गुस्से का स्थान है, तो हमें उसका सम्मान करना चाहिए। वहां पर बांध नहीं बनाना चाहिए. साथ ही राजेन्द्र सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन की जगह तीर्थाटन करना चाहए. क्योंकि जब आदमी तीर्थ पर जाता है तो लेकर आता है, जबकि पर्यटन में वहीं सब कुछ छोड़ कर आते हैं. तीर्थाटन से उत्तराखंड की समृद्धि बढेगी. उत्तराखंड देवभूमि है उसका सम्मान करना चाहिए.

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