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गोरखपुर: NRC और NPR के डर से स्वच्छता सर्वेक्षण में जानकारी देने से हिचक रहे लोग

भाषा
Updated: January 16, 2020, 9:08 PM IST
गोरखपुर: NRC और NPR के डर से स्वच्छता सर्वेक्षण में जानकारी देने से हिचक रहे लोग
गोरखपुर में एनआरसी और एनपीआर के डर से लोग स्वच्छता सर्वेक्षण से जुड़े सवालों के जवाब नहीं दे रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गोरखपुर नगर निगम (Gorakhpur Municipal Corporation) ने 4 से 31 जनवरी तक स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए 2 लाख लोगों से फीडबैक लेने का लक्ष्य रखा था, मगर एनआरसी (NRC) और एनपीआर (NPR) के डर से अब तक सिर्फ 35 हजार लोगों ने ही सर्वे के लिए अपनी प्रतिक्रिया दी है.

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गोरखपुर (उत्तर प्रदेश). गोरखपुर शहर में इन दिनों स्वच्छता सम्बन्धी सर्वेक्षण कर रहे नगर निगमकर्मियों को अजीब मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है. एनआरसी (NRC) और एनपीआर (NPR) के डर से लोग अपनी प्रतिक्रिया देने से हिचक रहे हैं. खास बात यह है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी शहर से आते हैं. गोरखपुर नगर निगम (Gorakhpur Municipal Corporation) स्वच्छ सर्वेक्षण—2020 (Clean Survey —2020) के तहत शहर को बेहतर रैंकिंग दिलाने के लिए आजकल सर्वे का काम करा रहा है. मगर उसे एक नई चुनौती से रूबरू होना पड़ रहा है.

सर्वे के काम में लगे कम्प्यूटर ऑपरेटर धीरज ने बताया कि, ‘सर्वे के दौरान लोग अपना नाम और मोबाइल नम्बर तो दे रहे हैं लेकिन जब उनसे उनके फोन पर आने वाला वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) मांगा जाता है तो वे मना कर देते हैं. उनमें से कई लोग यह भी कहते हैं कि हम एनआरसी और एनपीआर के लिए जानकारी मांग रहे हैं.’

अच्छी रैंकिंग से नगर विकास के लिए मिलेंगे अधिक पैसे
एक अन्य कर्मी अजय श्रीवास्तव ने बताया कि गोरखपुर महोत्सव में तैनात कुछ पीएसी कर्मी भी ओटीपी बताने को राजी नहीं हुए थे, मगर जब उन्हें बताया गया कि उनके जवाब से शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण—2020 में अच्छी रैंकिंग मिलेगी और केंद्र सरकार नगर के विकास के लिए अधिक धन भी देगी, तब वे मान गए.

फायदे बताने पर तैयार हो रहे हैं लोग
खासकर, शहर के पुराने इलाकों में सर्वे के दौरान ज्यादा समस्याएं पेश आ रही हैं. इस बीच, अपर नगर आयुक्त डी. के. सिन्हा ने बताया कि लोग एनआरसी और एनपीआर के डर से अपनी प्रतिक्रिया देने से डर रहे हैं, मगर जब उन्हें इसके फायदे बताए जाते हैं तो वे तैयार हो जाते हैं. सर्वे कर रहे सभी कर्मियों को पहचान—पत्र दिए गए हैं ताकि उन्हें दिक्कत न हो.

लोगों से पूछे जा रहे इन विषयों पर सवालसिन्हा ने बताया कि सर्वे के दौरान लोगों से कचरा प्रबन्धन, सफाईकर्मियों की सक्रियता, ठोस अपशिष्ट के प्रबन्धन और कूड़ेदान की व्यवस्था इत्यादि से जुड़े नौ सवाल पूछे जाते हैं. बहरहाल, जीएमसी ने 4 से 31 जनवरी तक दो लाख लोगों से फीडबैक लेने का लक्ष्य रखा था, मगर इस डर और हिचक की वजह से अब तक सिर्फ 35 हजार लोगों ने ही सर्वे के लिए अपनी प्रतिक्रिया दी है. सर्वे के लिए कुल 30 कर्मचारियों को तैनात किया गया है. हर कर्मी को रोजाना 100 फीडबैक का लक्ष्य दिया गया है लेकिन औसतन सिर्फ 40 लोग ही प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

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First published: January 16, 2020, 8:50 PM IST
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