Gorakhpur Tragedy: बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्र‍िंसि‍पल राजीव मिश्रा सस्पेंड

News18Hindi
Updated: August 12, 2017, 4:14 PM IST
Gorakhpur Tragedy: बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्र‍िंसि‍पल राजीव मिश्रा सस्पेंड
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह
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Updated: August 12, 2017, 4:14 PM IST
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई 33 बच्चों की मौत मामले में सरकार ने शनिवार को प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और मामले की जांच के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित कर दी है. कमेटी जल्द ही अपनी जांच रिपोर्ट देगी जिसके बाद दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.

गोरखपुर पहुंचे प्राविधिक एवं चिकित्सा मंत्री आशुतोष टंडन और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने पूरे मामले में बारीकी से जांच की. जांच के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए टंडन ने बताया कि ऑक्सीजन आपूर्ति ठप होने की बात सामने आई है. डीलर ने 1 अगस्त को डीलर ने पेमेंट के लिए पत्र लिखा था. जिसे 5 अगस्त को डीजी चिकित्सा को प्रेषित कर दिया गया. वहां से 7 अगस्त को पैसा प्रिंसिपल को मिला, लेकिन भुगतान 11 अगस्त को हुआ. ऐसा क्यों हुआ इसकी जांच हो रही है.

मंत्री ने कहा कि ऑक्सीजन एक जीवन रक्षक रसायन है, उसकी आपूर्ति क्यों ठप हुई, इसकी जांच के लिए कमेटी बना दी गई है. फिलहाल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

प्रेस वार्ता की शुरुआत करते हुए मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि एक दिन में 23 मौत का मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है.

उन्होंने कहा कि एक भी बच्चे की मौत होती है तो चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि आज सुबह मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथ ने उन्हें और आशुतोष टंडन को बुलाया गोरखपुर जाने का निर्देश दिया.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 9 जुलाई और 9 अगस्त को बीआरडी मेडिकल कॉलेज आए थे. इस दौरान ने उन्होंने हर मुद्दे पर बात की थी, लेकिन ऑक्सीजन सप्लाई का मुद्दा किसी ने भी नहीं रखा.

एक भी बच्चे की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई

उन्होंने कहा कि जांच में पता चला कि 10 अगस्त की शाम 7.30 बजे लिक्विड ऑक्सीजन प्रेशर कम होने लगा तो रिज़र्व 52 ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर काम चलाया गया.

इसके बाद रात डेढ़ बजे तक काम चला और फिर डॉक्टरों ने एम्बु पंप से काम चलाया. इस दौरान सिर्फ सात बच्चों की मौत हुई वो भी ऑक्सीजन की कमी की वजह से नहीं.

बीआरडी में हर साल औसतन प्रतिदन 17-18 मौत

स्वस्थ्य मंत्री ने मीडिया के सामने कुछ कुछ आंकड़े भी पेश किए. 2014 में अगस्त के महीने में बाल विभाग में जो मौते हुईं वह 567 थी. जो लगभग 19 प्रतिदिन था. 2015 में अगस्त के महीने 668, यानी 22 प्रतिदिन, 2016 में भी औसत प्रतिदिन 19 मौतें थी. साल का औसत 17-18 प्रतिदिन निकलता है.

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केवल बीआरडी मेडिकल कॉलेज का मामला नहीं है, जो भी मरीज मेडिकल कॉलेज में पहुंचते हैं वे क्रिटिकल होते हैं. इस मेडिकल कॉलेज में सिर्फ गोरखपुर ही नहीं बल्कि आस-पास के 10 जिलों, बिहार और नेपाल से भी मरीज पहुंचते हैं.
First published: August 12, 2017
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