कोरोना संक्रमित 3 परिवार, 2 मां और एक पिता की दिल छू लेने वाली कहानी
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कोरोना संक्रमित 3 परिवार, 2 मां और एक पिता की दिल छू लेने वाली कहानी
गोरखपुर में कोरोना संक्रमण से जुड़ी तीन कहानियां सामने आई हैं, ये कहानियां पारिवारिक रिश्तों की डोर की मजबूती को बयान करती हैं.

गोरखपुर (Gorakhpur) में 10 महीने की मासूम को लेकर एक मां बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) के Corona मरीजों के वार्ड में 15 दिन तक भर्ती रही. मां ने बच्ची के साथ-साथ खुद को भी बीमारी से बचाए रखा.

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गोरखपुर. कोरोना वायरस (COVID-19) के इस संकट काल में कहीं पारिवारिक रिश्ते (Family Relations) अगर दरकते हुए दिख रहे हैं, तो इसी संकट ने कई जगह रिश्तों में और मजबूती भी दी है. कोरोना काल में मां के कई रूप देखने को मिल रहे हैं. कहीं एक मां (Mother) अपनी कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) बच्ची को लेकर वार्ड में 15 दिन तक भर्ती रही. वहीं दूसरी तरफ एक मां को जब उसे पता चला कि उसकी 8 साल की बच्ची कोरोना पॉजटिव है, तो उसने अपनी बच्ची को अकेले छोड़ दिया. डॉक्टरों के समझाने पर वो अपने बच्ची के साथ गई. इधर, एक पिता (Father) अपने कोरोना पॉजिटिव बेटे के साथ अस्पताल में भर्ती होने पहुंच गया.

कोरोना मरीजों के बीच PPE किट पहनकर दूध पिलाती मां

पहली खबर डॉक्टरों को हैरान करने वाली रही कि 10 महीने की मासूम को लेकर एक मां बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) के कोरोना वार्ड में 15 दिन तक भर्ती रही. उस वार्ड में 28 और संक्रमित भर्ती थे. इस मां ने अपनी बच्ची को तो कोरोना से मुक्त कराया, साथ ही खुद को भी बचाए रखा. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमितों के लिए बने आइसोलेशन वार्ड में 40-40 बेड के क्यूबिक हैं. इसी एक क्यूबिक में बच्ची को भर्ती किया गया. बच्ची की मां भी उसके साथ ही रही. इस दौरान मेडिकल कॉलेज के इस वार्ड में औसतन 25 से अधिक मरीज रहे. महिला दिन भर ट्रिपल लेयर मॉस्क पहनती थी, बच्ची को दूध पिलाते वक्त वो PPE किट पहना करती थी. साथ ही कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए जो प्रोटोकॉल बनाया गया, उसका कड़ाई से पालन करती रही. इसी का नतीजा रहा कि 15 दिन तक कोरोना मरीजों के बीच रहने के बाद भी वह खुद पॉजटिव नहीं हुई और अपनी बच्ची को भी कोविड से मुक्त करा कर घर ले गई. कोरोना संक्रमितों के बीच रहकर खुद को बचाए रखा, इस पर डॉक्टर भी रिसर्च पर जुटे हैं. ये मां-बेटी बड़हलगंज इलाके के रहने वाली हैं.



काफी समझाने के बाद बच्ची के साथ अस्पताल जाने को राजी हुई ये मां
दूसरी तस्वीर सूरजकुंड इलाके में देखने मिली. यहां एक मां ने अपने जीवन की चिंता में मासूम बच्ची को संक्रमण से लड़ने के लिए अकेले छोड़ दिया. मां और 8 साल की बेटी दोनों की COVID-19 जांच होती है. मां निगेटिव निकलती है और बच्ची पॉजिटिव. इसके बाद मां ने डॉक्टरों से कहा कि वो बच्ची के साथ नहीं जाएगी, नहीं तो खुद पॉजटिव हो जाएगी. अधिकारियों की टीम ने बच्ची को समझाया पर वो नहीं मानी. अब प्रशासन के सामने विकट स्थिति पैदा हो गई कि क्या करें? संक्रमण के खतरे के बीच छोटी बच्ची को बिना मां के अस्पताल में कैसे रखा जाए? उसके बाद फिर बच्ची के मां की काउंसलिंग कराई गई. उसे आश्वस्त किया गया कि उसे कुछ नहीं होगा, तब जाकर वो महिला मानी. इसके बाद संक्रमित बच्ची और महिला को रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया.

कोरोना संक्रमित बेटे के साथ अस्पताल में भर्ती हो गया पिता 

दो मांओं की कहानी के बाद अब एक पिता के प्रेम को भी देखिए. सहजनवां इलाके में एक 13 साल का लड़का भी कोरोना संक्रमित मिला. उसकी मां नहीं है. पिता कोरोना जांच में निगेटिव हैं. बेटे को कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद जैसे ही डॉक्टरों की टीम ने पिता से बेटे के साथ चलने को कहा तो वे तुरंत तैयार हो गए. इसके बाद इन्हें भी रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

 

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