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गोरखपुर लोकसभा सीट: जानिए क्या है 'CM योगी' की हाई प्रोफाइल सीट का इतिहास

गोरखपुर लोकसभा सीट: जानिए क्या है 'CM योगी' की हाई प्रोफाइल सीट का इतिहास

गोरखपुर रेलवे स्टेशन(फाइल फोटो)

गोरखपुर रेलवे स्टेशन(फाइल फोटो)

1998 से लगातार 2 दशक तक इस सीट पर बीजेपी के टिकट पर योगी आदित्यनाथ काबिज रहे. लेकिन योगी के सीएम बनने के बाद सपा के प्रवीण निषाद सांसद चुने गए. गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में 47.4 फीसदी मतदान हुआ था.

गोरखपुर बीजेपी का मजबूत दुर्ग माना जाता है. 1989 से ये सीट पर बीजेपी का कब्ज़ा रहा है. योगी आदित्यनाथ ने पिछले पांच बार से सांसद रहने के बाद पिछले साल यूपी के सीएम बनने के बाद यहां की लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. पिछले 29 साल से गोरखपुर सीट से लगातार गोरक्षपीठ का दबदबा रहा है. साल 1989 में पीठ के महंत ब्रह्मलीन अवैद्यनाथ ने हिंदू महासभा की टिकट पर चुनाव लड़ा और 10 फीसदी वोट शेयर के अंतर से जनता दल के उम्मीदवार रामपाल सिंह को मात दी थी. 1991 और 1996 के चुनाव में अवैद्यनाथ ने बीजेपी की टिकट से जीत हासिल की थी.

फिर 1998 से लगातार 2 दशक तक  इस सीट पर बीजेपी के टिकट पर योगी आदित्यनाथ काबिज रहे. लेकिन योगी के सीएम बनने के बाद सपा के प्रवीण निषाद सांसद चुने गए. गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में 47.4 फीसदी मतदान हुआ था. जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में 54.64 फीसदी वोट पड़े थे, जो कि 7.24 प्रतिशत वोट कम थे.

अगर पिछले 5 लोकसभा चुनाव की बात करें तो 1998, 1991 में जहां बीजेपी को समाजवादी पार्टी से कड़ी टक्कर मिलती दिखी थी. वहीं 2004 के बाद से बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की है.

लोकसभा सीट का इतिहास- कब कौन जीता

देश में 1951-52 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए. तब गोरखपुर ज़िले और आसपास के ज़िलों को मिलाकर 4 सांसद चुने जाते थे. 1951-52 में गोरखपुर दक्षिण से सिंहासन सिंह कांग्रेस के सांसद चुने गए. यही सीट बाद में गोरखपुर लोकसभा सीट बनी. 1957 में गोरखपुर लोकसभा सीट से दो सांसद चुने गए. सिंहासन सिंह दूसरी बार सांसद बनें और दूसरी सीट कांग्रेस के महादेव प्रसाद ने जीती.

महंत अवैद्यनाथ (File Photo)


इसी कड़ी में 1962 के लोकसभा चुनाव में गोरखनाथ मंदिर ने चुनाव में दस्तक दी. गोरक्षापीठ के महंत ब्रह्मलीन दिग्विजय नाथ हिंदू महासभा के टिकट पर मैदान में उतरे. उन्होंने कांग्रेस के सिंहासन सिंह को कड़ी टक्कर दी लेकिन 3,260 वोटों से हार गए. सिंहासन सिंह लगातार तीसरी बार सांसद बनें. 1967 में दिग्विजय नाथ निर्दलीय चुनाव लड़ें और कांग्रेस के विजय रथ को रोक दिया. दिग्विजय नाथ 42,000 से ज्यादा वोटों से चुनाव जीते.

1969 में दिग्विजय नाथ का निधन हो गया जिसके बाद 1970 में उपचुनाव हुआ. दिग्विजय नाथ के उत्तराधिकारी और गोरक्षपीठ के महंत ब्रह्मलीन अवैद्यनाथ ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और सांसद बने. 1971 में फिर से कांग्रेस ने इस सीट पर वापसी की. कांग्रेस के नरसिंह नरायण पांडेय चुनाव जीते. वहीं निर्दलीय अवैद्यनाथ चुनाव हार गए.

1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में भारतीय लोकदल के हरिकेश बहादुर चुनाव जीते. कांग्रेस के नरसिंह नरायण पांडेय चुनाव हार गए, वहीं अवैद्यनाथ लड़े ही नहीं. 1980 के चुनाव से पहले हरिकेश बहादुर कांग्रेस में चले गए. कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की और हरिकेश बहादुर कांग्रेस के टिकट पर दूसरी बार सांसद बने.

1984 के लोकसभा चुनाव से पहले हरिकेश लोकदल में चले गए. लेकिन इस बार पार्टी बदलने के बावजूद वे चुनाव नहीं जीत सके. कांग्रेस ने मदन पांडेय को चुनाव लड़ाया और मदन जीतकर सांसद बनें. 1989 के चुनाव में राम मंदिर आंदोलन के दौरान गोरखनाथ मंदिर के मंहत अवैद्यनाथ फिर से चुनावी मैदान में उतर गए और हिंदू महसभा के टिकट पर अवैद्यनाथ दूसरी बार सांसद बने.

1991 की रामलहर में अवैद्यनाथ बीजेपी में शामिल होकर चुनाव लड़े और फिर सांसद बने. 1996 में अवैद्यनाथ फिर बीजेपी से लगातार तीसरी बार सांसद बने. 1998 में मंदिर के योगी और अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी युवा योगी आदित्यनाथ पहली बार सांसद बने. तब योगी सबसे कम उम्र के सासंद थे.

Yogi Adityanath at gorakhnath
गोरखपुर से पांच बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ (File Photo)


1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार पांच बार योगी गोरखपुर से बीजेपी के टिकट पर सांसद चुने गए. मार्च 2017 में यूपी के सीएम चुने जाने के बाद उन्होंने सांसद पद से त्याग पत्र दे दिया.

कौन सी पार्टी कितनी बार जीती

अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों और एक उपचुनाव में बीजेपी ने सात बार, कांग्रेस ने छह बार, निर्दलीय ने दो बार, हिंदू महासभा ने एक बार और भारतीय लोकदल ने एक बार जीत दर्ज की. सपा (समाजवादी पार्टी) और बसपा (बहुजन समाज पार्टी) इस सीट पर खाता भी नहीं खोल सके हैं.

योगी ने तीन लाख से जीत हासिल की थी

2014 के वोटिंग और नतीजों के समीकरण को देखें तो उस दौरान कुल 10 लाख 40 हजार 199 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. 2014 के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ को 5 लाख 39 हजार 127 वोट मिले थे. सपा उम्मीदवार राजमति निषाद को 2 लाख 26 हजार 344 वोट मिले, वहीं बसपा प्रत्याशी राम भुअल निषाद को 1 लाख 76 हजार 412 वोट मिले थे. इसके अलावा कांग्रेस को महज 45 हजार 719 वोट मिले थे. योगी ने इस सीट को 3 लाख 12 हजार 783 वोटों से जीत दर्ज किया था.

2009 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर में 44.13 फीसदी वोट पड़े थे. बीजेपी उम्मीदवार योगी को 4 लाख 3 हजार 156 वोट, बसपा को 1 लाख 82 हजार 885 वोट, सपा को 83 हजार 59 वोट और कांग्रेस को महज 30 हजार वोट मिले थे.

गोरखपुर की जनसंख्या (2011 की जनगणना के अनुसार)

गोरखपुर के जातीय गणित को यदि देखा जाए तो यहां 19.5 लाख वोटरों में से 3.5 लाख वोटर निषाद समुदाय के हैं. इस संसदीय क्षेत्र में निषाद जाति के सबसे अधिक मतदाता हैं. यादव और दलित मतदाता दो-दो लाख हैं. ब्राह्मण वोटर करीब डेढ़ लाख हैं. यदि चुनाव में निषाद, यादव, मुसलमान और दलित एकजुट हो जाते हैं तो चुनाव परिणाम चौंका भी सकते हैं.

स्थानीय मुद्दे:

वैसे तो लोकसभा चुनाव देश के मुद्दे पर लड़ा जाता है लेकिन स्थानीय मुद्दों का भी महत्व होता है. 2014 में विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा गया था. लेकिन लखनऊ का मुद्दा था रोजाना का लगने वाला जाम, सुरक्षा, सड़क, बिजली पानी, अनियमित कॉलोनियों का नियमितीकरण आदि. हालांकि जाम से निजात दिलाने के लिए शहर को स्वच्छ बनाने के लिए भी कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. वहीं शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार नए-नए प्लान तैयार कर रही है.

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Tags: Akhilesh yadav, BJP, Gorakhpur city news, Gorakhpur news, Mayawati, Pm narendra modi, Rahul gandhi, Samajwadi party, Uttar Pradesh Lok Sabha Constituencies Profile, Yogi adityanath

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