सीएम योगी के शहर 'गोरखपुर' का 8 से अधिक बार बदला गया नाम, जानें क्यों

प्रो.राजवंत राव कहते हैं कि पूर्व मध्यकाल में इस शहर का नाम सरयूपार था." क्योकि अभिलेखों में सरयूपार नाम दर्ज हैं. वहीं मुगलकाल में गोरखपुर सरकार के नाम से जाना जाता था. तो कभी मोअज्जमाबाद और अख्तनगर के नाम से

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: November 11, 2018, 11:14 AM IST
सीएम योगी के शहर 'गोरखपुर' का 8 से अधिक बार बदला गया नाम, जानें क्यों
गोरखपुर रेलवे स्टेशन (फाइल फोटो)
NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: November 11, 2018, 11:14 AM IST
इलाहाबाद का नाम प्रयागराज के बाद फैजाबाद का नाम अयाेध्‍या किए जाने को लेकर प्रदेश में बहस छिड़ी हुई है. लेकिन सबसे खास बात यह है कि गोरखपुर का ही नाम पिछले 2600 साल में आठ बार से अधिक बार बदला गया. गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर गोरखपुर का मौजूदा नाम 217 साल पुराना है. बता दें कि गोरखपुर के सांसद रहते हुए योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के कई मोहल्लों का नाम बदल दिया था. इसी के तहत अलीनगर को आर्यनगर, उर्दू बाजार को हिन्दी बाजार, हुमायूंपुर को हनुमानपुर कहा जाने लगा.

8 बार से अधिक बार बदला गया नाम

गोरखपुर विवि के प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.राजवंत राव ने न्यूज18 से खास बातचीत में दावा करते हुए कहा," गोरखपुर शहर का नाम 8 बार से अधिक बार बदला गया है. प्रो.राजवंत राव कहते हैं कि पूर्व मध्यकाल में इस शहर का नाम सरयूपार था." क्योकि अभिलेखों में सरयूपार नाम दर्ज हैं. वहीं मुगलकाल में गोरखपुर सरकार के नाम से जाना जाता था. तो कभी मोअज्जमाबाद और अख्तनगर के नाम से. अंत में अंग्रेजों ने 1801 में इसका नाम ‘गोरखपुर’ कर दिया जो नौवीं शताब्दी के ‘गोरक्षपुर’ और गुरु गोरक्षनाथ पर आधारित है.

2600 साल पहले 'रामग्राम' था नाम

प्रो.राव कहते हैं कि छठवीं शताब्दी यानी 2600 साल पहले गोरखपुर शहर का 'रामग्राम' हुआ करता था. इसकी वजह रामगढ़झील का इतिहास है. भौगोलिक आपदा के चलते रामग्राम धंसकर झील में बदल गया. जिसे आज हम रामगढताल के नाम से जानते है. उन्होंने बताया कि चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में इस क्षेत्र को पिप्पलिवन के नाम से भी जाना जाता था. लेकिन गुरु गोरक्षनाथ के बढ़ते प्रभाव के चलते नौवीं शताब्दी में सबसे लोकप्रिय नाम गोरखपुर हुआ. वहीं इतिहास में शासकों ने बार-बार दूसरे नाम थोपने की कोशिश की लेकिन लोगों के अंदर बाबा गुरु गोरक्षनाथ की अपार आस्था के चलते ऐसा होने नहीं दिया.

अलग-अलग ग्रुपों पर शहर का कब्जा

गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो.हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि साहित्यकार डा.वेदप्रकाश पांडेय द्वारा सम्पादित किताब ‘शहरनामा’ में बहुत सारे साक्ष्य से हम सहमत नहीं है. लेकिन इतना जरुर कह सकता हुं कि 7वीं शताब्दी के पहले किसी ग्रुप ने शहर पर कब्जा कर लिया. तो उन्होंने शहर का नाम बदल था. इस तरह अलग-अलग ग्रुपों के द्वारा शहर का नाम बदलता रहा.
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1801 के बाद नहीं बदला गोरखपुर का नाम

प्रो.हिमांशु चतुर्वेदी बताते हैं कि रेवेन्यू रिकॉर्ड में सन् 1801 और 1802 के मुगल राज्य में गोरखपुर का नाम दर्ज है. वहीं 1772 में अवध के नवाब का एक फरमान है कि जिसमें लैंड ग्रैंड दी गई थी गोरखनाथ मंदिर और इमामबाड़ा को. उसमें भी नाम गोरखपुर ही दर्ज हैं. लेकिन 1772 के पहले का कोई रिकॉर्ड मेरे संज्ञान में नहीं हैं. अगर हम सन् 1801 के रेवेन्यू रिकॉर्ड पर गौर फरमाये तो गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर गोरखपुर का मौजूदा नाम 217 साल पुराना है.

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