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गोरखपुर खाद कारखाना में लगा देश का सबसे ऊंचा प्रीलिंग टॉवर, ये रही खासियत

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 27, 2019, 10:07 AM IST
गोरखपुर खाद कारखाना में लगा देश का सबसे ऊंचा प्रीलिंग टॉवर, ये रही खासियत
गोरखपुर खाद कारखाना में लगा देश का सबसे ऊंचा प्रीलिंग टॉवर

दरअसल यूरिया प्लांट में टॉवर की ऊंचाई हवा की औसत रफ्तार के बाद तय की जाती है. इसके लिए एचयूआरएल की टीम ने करीब महीने भर हवा की रफ्तार को लेकर सर्वे किया गया था. तब इतनी ऊंचाई पर टॉवर बनाया गया है.

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गोरखपुर. गोरखपुर में निर्माणाधीन खाद कारखाना में ने एक रिकार्ड कायम किया है, यहां पर यूरिया प्लांट देश का सबसे ऊंचा प्रीलिंग टॉवर बनकर तैयार हो गया है. बता दें कि प्रीलिंग टॉवर में यूरिया खाद का दाना बनाता है. इस टॉवर की ऊंचाई 149.5 मीटर है, अभी तक किसी भी खाद कारखाना में इतनी ऊचाई का टॉवर नहीं बना है, जबकि व्यास करीब 29 मीटर है. वहीं अगर हम कुतुबमीनार की ऊंचाई की बात करें तो वो भी सिर्फ 73 मीटर ही है यानि कि कुतुबमीनार की ऊंचाई से दोगुनी ऊंची टॉवर है.

दरअसल यूरिया प्लांट में टॉवर की ऊंचाई हवा की औसत रफ्तार के बाद तय की जाती है. इसके लिए एचयूआरएल की टीम ने करीब महीने भर हवा की रफ्तार को लेकर सर्वे किया गया था. तब इतनी ऊंचाई पर टॉवर बनाया गया है. जपानी कंपनी द्वारा बनाये गये इसी टॉवर में नीचे से हवा प्रेसर से ऊपर भेजा जायेगा और ऊपर से अमोनिया गैस का लिक्विड गराया जाएगा. जिसके बाद अमोनिया के लिक्विड और हवा के रिएक्शन से यूरिया बनेगी.

हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट वीके दीक्षित ने कहा कि 7500 करोड़ की लागत से देश का सबसे बड़ा यूरिया प्लांट बनाया जा है, इसी के साथ अमोनिया के स्टोरेज के लिए भी दो टैंक का निर्माण पूरा कर लिया गया है. गेल द्वारा बिछाई गई पाइप लाइन से आने वाली नेचुरल गैस और नाइट्रोजन के रिएक्शन से अमोनिया का लिक्विड तैयार किया जाएगा.

अमोनिया के इस लिक्विड को प्रीलिंग टॉवर की 117 मीटर ऊंचाई से गिराया जाएगा, इसके लिए ऑटोमेटिक सिस्टम तैयार किया जा रहा है. अमोनिया लिक्विड और हवा में मौजूद नाइट्रोजन के रिएक्शन ने यूरिया छोटे-छोटे दाने के रूप में टॉवर के बेसमेंट में मौजूद कई होल के रास्ते बाहर आएगा. यहां से यूरिया के दाने ऑटोमेटिक सिस्टम से नीम का लेप चढ़ाए जाने वाले चैंबर तक जाएंगे.

नीम कोटिंग होने के बाद तैयार यूरिया की बोरे में पैकिंग होगी, प्लांट को चलाने के लिए जितनी बिजली की आवश्यकता होगी उसके अधिक खुद खादकारखाने में बन जायेगा. 10-10 मेगावाट बिजली का उत्पादन के लिए गैस टर्बाइन लगाए जाएंगे, साथ ही 18 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए स्टीम टर्बाइन लगाया जायेगा.

आपको बता दें कि गोरखपुर से पहले ऊंचा टॉवर कोटा के चंबल फर्टिलाइजर प्लांट का था जो करीब 142 मीटर ऊंचा है. गोरखपुर के साथ ही सिंदरी, बरौनी, पालचर और रामगुंडम में यूरिया प्लांट का निर्माण किया जा रहा है​.

 
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First published: October 27, 2019, 10:07 AM IST
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