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    गोरखपुर: Corona से बचाव के लिए रेलवे ने तैयार किया स्पेशल AC कोच, 10 बिंदुओं में जानें खासियत

    Corona से बचाव के लिए रेलवे ने तैयार किया स्पेशल AC कोच
    Corona से बचाव के लिए रेलवे ने तैयार किया स्पेशल AC कोच

    यांत्रिक कारखाने के डिप्टी CME फणीन्द्र कुमार का कहना है कि अभी तीन कोच (Coach) तैयार किए जा रहे हैं. उसके बाद इन कोचों को रनिंग के लिए दिया जाएगा.

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    गोरखपुर. कोरोना वायरस (COVID-19) के खिलाफ चल रही जंग में रेलवे कंधा से कंधा मिलाकर चल रहा है. कोविड को हराने के लिए नए-नए प्रयोग भी कर रहा है. इसी कड़ी में पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के गोरखपुर (Gorakhpur) के यांत्रिक कारखाने ने एक ऐसा वातानुकूलित कोच (AC Coach) बनाया है जिसमें कोरोना दूर-दूर तक नहीं फटक पाएगा. पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर में स्थित यांत्रिक कारखाने के इंजीनियरों ने कोरोना से लड़ने के लिए नया हथियार बना डाला है. जिससे यात्रा करने वाले यात्रियों के पास तक कोरोना फटक ही नहीं पाएगा.

    इंजीनियरों ने बताया कि इस कोच की खासियत की वजह से इसमें कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं फैलेगा. यांत्रिक कारखाने में खड़े कोच में कई बदलाव किए गए हैं, जो बाहर से ही दिख रहे हैं. डिप्टी CME फणीन्द्र कुमार का कहना है कि कारखाने में अभी तीन कोच तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें अगले कुछ दिनों में रनिंग के लिए दिया जाएगा. वहां से फीडबैक मिलेगा उस पर काम किया जाएगा. उसके बाद बोर्ड अगर अनुमति देगा तो और भी कोच बनाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि कोरोना के इस संकट काल में हर आदमी डरा हुआ है, पर यात्रा करना उसकी मजबूरी भी है. अगर रेलवे के कोच इस तरह से सुरक्षित रहते हैं तो उससे एक भय तो खत्म होगा ही साथ ही कोरोना संक्रमण के फैलने का दर भी कम होगा.

    ये है AC कोच की खासियत
    कोरोनाकाल में रेल सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए इंजीनियरों ने कई इंतजाम किए हैं, जिससे कि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.
    इस एसी कोच में यात्रियों को हाथ का इस्तेमाल कम के कम करना पड़े, यांत्रिक कारखाने के इंजीनियरों ने ऐसे सभी इंतजाम किए हैं.
    कोच में अंदर जाने के लिए जो हैंडल पकड़ते हैं, उसे कॉपर कोटेड कर दिया गया है. क्योंकि कॉपर पर कोई भी वायरस अधिक देर तक जिंदा नहीं रहता है.
    डोर हैंडल भी कॉपर कोटेड हैं. साथ ही कोच में जितनी जगहों पर हाथ लगाने के लिए हैंडल लगे हैं, उन जगहों को कॉपर कोटेड कर दिया गया है.
    मुसाफिरों को इस खास एसी बोगी के अंदर जाने के लिए भी गेट को हाथ से छूने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि यात्री अपने पैरों से ही गेट खोल सकेंगे.
    यांत्रिक कारखाने में तैयार कोच के शौचालय में जाने के लिए भी यात्रियों को हाथ नहीं लगाना पड़ेगा. पैर की मदद से दरवाजे को खोला जा सकेगा.
    कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए इस कोच में हैंडवॉश के लिए भी पैर वाले हैंडल की ही व्यवस्था की गई है.
    वायरस के संक्रमण से यात्रियों को बचाने के लिए एसी कोच में टाइटेनियम डाईऑक्साइड की कोटिंग की गई है, जो एक साल तक एक्टिव रहेगी. इंजीनियरों का कहना है कि इस केमिकल के संपर्क में आते ही वायरस का खात्मा हो जाएगा.
    यांत्रिक कारखाने में रेलवे के इंजीनियरों ने ऐसे 3 एसी कोच तैयार किए हैं, जिन्हें अगले कुछ दिनों में इस्तेमाल के लिए रवाना किया जाएगा.
    इंजीनियरों ने बताया कि इस कोच के के बारे में यात्रियों से फीडबैक लिया जाएगा, जिसके बाद इसमें और भी सुधार करने की गुंजाइश है, ताकि सफर के दौरान कोरोना संक्रमण का खतरा न रहे.
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