गोरखपुर का 'जनता फ्रिज' बन सकता है देश के लिए नज़ीर, ये है वजह

गोरखपुर के पार्क रोड में जनता फ्रिज नाम से शुरू हुए इस अभियान को अभी चंद दिन ही हुए हैं, पर ये फ्रिज हर रोज 300-400 लोगों के भूख मिटाने के अभियान में सफल हो रहा है.

RAM GOPAL DWIVEDI | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 8, 2019, 3:49 PM IST
गोरखपुर का 'जनता फ्रिज' बन सकता है देश के लिए नज़ीर, ये है वजह
गोरखपुर की ये मुहिम परवान चढ़ रही है.
RAM GOPAL DWIVEDI | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 8, 2019, 3:49 PM IST
भारतीय संस्कृति में अन्न को देवी कहा जाता है, इसीलिए भोजन को थाली में छोड़ना मनाही है लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम ऐसे भाग रहे हैं कि भारतीय परम्परा का ध्यान ही नहीं है. इसीलिए तो हम लाखों टन भोजन यूं ही बर्बाद कर रहे हैं. जबकि दूसरी तरफ गरीब और बेबस लोग एक-एक रोटी तक के लिए तड़प उठते हैं. गोरखपुर में जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने और बचे हुए खाने की बर्बादी को रोकने के लिए एक मुहिम इस समय परवान चढ़ रही है, वो है जनता फ्रीज.

जनता फ्रिज हर रोज करता है ये काम
गोरखपुर के पार्क रोड में जनता फ्रिज नाम से शुरू हुए इस अभियान को अभी चंद दिन ही हुए हैं, पर ये फ्रिज हर रोज 300-400 लोगों के भूख मिटाने के अभियान में सफल हो रहा है. इस अभियान में शहर के आम लोगों के साथ साथ खास लोग भी शामिल हो रहे हैं, चाहे घरों का बचा खाना हो या फिर पार्टी में बचा हुआ खाना, लोग लाकर इस फ्रिज में रख रहे हैं. अब तो शहर के तमाम होटल और रेस्‍टोरेंट मालिक भी इस अभियान में शामिल हो गये हैं. यकीन हर कोई बचे भोजन को नाली में गिराने के बजाय इस छोटे से फ्रिज तक पहुंचा रहा है, जिसकी रि-पैकिंग कर भोजन जरुरतमंदों तक पहुंच रहा है. इस अभियान में जुटे लोगों का कहना है कि लोग खाना नालियों में बहाने से बचे और वह भोजन आम लोगों तक पहुंचाएं.

विधायक ने कही ये बात

गोरखपुर सदर विधायक राधामोहन दास अग्रवाल कहते हैं कि जब हमारे यहां कोई कार्यक्रम होता है उस दौरान भोजन ज्यादा बनता है और जब बच जाता है तो उसे फेंक दिया जाता है. नये फैशन के साथ जब कपड़े पुराने हो जाते हैं तो उसे फेंकने के बजाए उसका सद्उपयोग करें. उसे जो स्थान निश्चित किया गया वह पर रख दें, ताकि जरूरतमंद खुद ले जांए. यह गुप्तदान है ताकि लेने वाले को पता ही न चले. यकीनन शहर के नौजवानों ने एक छोटी ही सही, लेकिन बड़ी मुहिम छेड़ी है.

अभियान बन सकता है देश के लिए नजीर
यह अभियान इस देश के लिए नजीर बन सकता है,जहां भूख से मौत या पलायन, खाद्य और पोषण सुरक्षा की कई योजनाएं अरबों रुपये के अनुदान पर चल रही हों. जबकि मध्याह्न भोजन योजना के तहत हर दिन 12 करोड़ बच्चों को दिन का भरपेट भोजन देने का दावा किया जा रहा है और जहां हर हाथ को काम व हर पेट को भोजन के नाम पर हर दिन करोड़ों का सरकारी फंड खर्च होता रहा है. ऐसे में गोरखपुर से शुरू हुआ यह प्रणादायी अभियान अपने शिखर को अगर प्राप्त कर सका तो सैकड़ों लोगों के पेट की आग बुझाने में कामयाब होगा. वैसे यह देश का हजारों रुपया खर्च होने से भी बचाने में सक्षम साबित होगा.
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First published: August 8, 2019, 3:44 PM IST
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