गोरखपुर चुनाव: जानिए कौन हैं सीएम योगी के उत्तराधिकारी उपेंद्र दत्त शुक्ला

उपेंद्र दत्त शुक्ला गोरखपुर में बीजेपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उपेंद्र दत्त शुक्ला की संगठन और कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ मानी जाती है.

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Updated: March 14, 2018, 10:43 AM IST
गोरखपुर चुनाव: जानिए कौन हैं सीएम योगी के उत्तराधिकारी उपेंद्र दत्त शुक्ला
उपेंद्र दत्त शुक्ला की फाइल फोटो.
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Updated: March 14, 2018, 10:43 AM IST
योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे के बाद खाली हुई गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उप चुनाव के लिए काउंटिंग जारी है. शुरुआती मतगणना के बाद बीजेपी के प्रत्याशी उपेंद्र दत्त शुक्ला आगे चल रहे हैं. उपेंद्र दत्त शुक्ला बीजेपी की इस परंपरागत सीट से पहली बार गैर गोरक्षपीठ प्रत्याशी हैं. यहां से महंत अवैद्यनाथ के बाद लागातार पांच बार योगी आदित्यनाथ ने जीत दर्ज की. प्रत्याशी घोषित होने से पहले उपेंद्र दत्त शुक्ला गोरखपुर में बीजेपी के क्षेत्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उपेंद्र दत्त शुक्ला की संगठन और कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ मानी जाती है. पूर्वांचल में उनकी पहचान ब्राह्मण चेहरे के रूप में होती हैं. वह गोरखपुर से राज्यसभा सांसद और वर्तमान में केंद्र में मंत्री शिव प्रताप शुक्ला के बेहद करीबी बताए जाते है.

क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला काफी लंबे समय से पार्टी और जनता के बीच सक्रिय रहे. लेकिन अब तक उन्हे एक जनप्रतिनिधि के तौर पर जीवन व्यतीत करने का मौका नही मिल पाया. हालांकि वह कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से कई बार प्रयास कर चुके हैं लेकिन पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिल पाया.  उपेंद्र शुक्ला ने जिला अध्यक्ष के रूप में भी पार्टी को अपनी सेवा दी है. प्रदेश में जब राजनाथ सिंह की सरकार थी तो उपेंद्र शुक्ला गोरखपुर में पार्टी के जिलाध्यक्ष थे. उपेंद्र शुक्‍ला विद्यार्थी जीवन से ही बीजेपी के प्रति काफी निष्ठावान रहे. विद्यार्थी परिषद की राजनीति में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

मौजूदा समय में उपेंद्र शुक्ला भारतीय जनता पार्टी गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं, जो 64 विधानसभा 12 लोकसभा क्षेत्रों का एक बहुत बड़ा संगठन क्षेत्र होता है. शुक्ला इस पद पर 2014 से अभी तक काबिज रहे. लेकिन ये भी सही है जब जब उन्होंने सम्बन्धित विधानसभा क्षेत्रों में अपना भाग्य आजमाया, तब-तब वह अपने विरोधियों पर काफी भारी पड़े थे. 2017 के विधानसभा चुनावों में सहजनवां से उनके नाम की चर्चा चल रही थी लेकिन वर्तमान विधायक शीतल पांडेय के नाम पर आम सहमति बनते ही कहानी खत्म हो गयी. इसके बावजूद वह बीजेपी के साथ हमेशा लगे रहे और पार्टी में क्षेत्रीय अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण ओहदे को सम्हालते रहे.

सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक बीजेपी के सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष कहीं न कहीं सेट हो चुके हैं. ऐसे में वर्षो से सतत प्रयत्नशील रहे उपेंद्र दत्त शुक्ला को पार्टी हाईकमान व स्थानीय पदाधिकारियों की सहमति के बाद गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में प्रत्याशी घोषित कर दिया.

गोरक्षनाथ पीठ का रहा है दबदबा

1952 में पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट के लिए चुनाव हुआ और कांग्रेस ने जीत दर्ज की. इसके बाद गोरक्षनाथ पीठ के महंत दिग्विजयनाथ ने 1967 निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता. उसके बाद 1970 में योगी आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ ने निर्दलीय जीत दर्ज की. 1971 से 1989 के बीच एक बार भारतीय लोकदल तो कांग्रेस का इस सीट पर कब्ज़ा रहा. लेकिन 1989 के बाद से सीट पर गोरक्षपीठ का कब्ज़ा रहा. महंत अवैद्यनाथ 1998 तक सांसद रहे. उनके बाद 1998 से लगातार पांच बार योगी आदित्यनाथ का कब्ज़ा रहा.
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