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कुशीनगर हादसा: अब तक नहीं क्लियर हुए पीड़ित परिवारों को मिले मुआवजों के चेक

Ashok Shukla | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 16, 2018, 1:36 PM IST

13 मासूमों के परिजनों के आंसू पोछने के लिए प्रदेश सरकार व रेल प्रशासन ने 2-2 लाख रुपए का चेक तो दिया, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही व बैक की मनमानी से पीड़ितों के खाते में पैसे नहीं पहुंचे.

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कुशीनगर के दुदही रेलवे स्टेशन के पास बहपुरवा रेलवे क्रासिंग पर गत 26 अप्रैल को पैसेंजर ट्रेन और स्कूल वैन की टक्कर में अपने कलेजे के टुकडों को खो चुके पीड़ित अब सिस्टम की मार झेलने को विवश हैं. ट्रेन की चपेट में स्कूली वैन के आने से मरे 13 मासूमों के परिजनों के आंसू पोछने के लिए प्रदेश सरकार व रेल प्रशासन ने 2-2 लाख रुपये का चेक तो दिया, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही व बैक की मनमानी से पीड़ितों के खाते में पैसे नहीं पहुंचे.

रिपोर्ट कहती है कि रेलवे द्वारा दिए चेक को बैंक वाले जमा नहीं कर रहे हैं. वहीं जिला प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवारों को दिए गए कई चेक ऑब्जेक्शन लगकर वापस आ रहे हैं. यही नहीं, चेक क्लीयर नहीं होने के बावजूद क्लीयरेंस के नाम पर पीड़ितों के खाते से रकम अलग से काटे जा रहे हैं. अब पीड़ित परिजनों ने आरटीजीएस के जरिए धनराशि खातों में ट्रांसफर करने की मांग की है.

उल्लेखनीय है गत 26 अप्रैल की सुबह थावे से गोरखपुर जा रही पैसेंजर ट्रेन की चपेट में स्कूली वैन के आ जाने से 13  मासूमों की मौत हो गई थी. हादसे के शिकार 13 मासूमों के आठ परिवार को रेल विभाग और जिला प्रशासन ने दो-दो लाख के हिसाब  से घटना के दिन ही चेक उपलब्ध करा दिया था. आनन-फानन में दिए गए चेक में कई त्रुटियां थीं, जिसको दुरुस्त कराने के लिए पीड़ित परिवारों को कई बार तहसील का चक्कर काटना पड़ा. लेकिन समस्याएं अभी ख़त्म नहीं हुई.

हादसे में अपने दो बेटों को खोने वाले  हैदर ने जब तहसीलदार द्वारा दिए गए चेक को बैंक में जमा किया तो चेक ऑउट ऑफ रेंज की टिप्पणी के साथ वापस आ गया. वहीं, हादसे में अपने तीन बच्चों रवि, टुन्नु और रागिनी को खोने वाले मिश्रौली निवासी अमरजीत को मिले छह-छह लाख के दोनों चेक अभी तक क्लीयर नहीं हो सके हैं.

बताया जाता है रेल विभाग के चेक को बैंकों ने वाराणसी भेजा है, जो 10 दिन बाद भी क्लियर नहीं हुआ है. अमरजीत को तहसील प्रशासन द्वारा दिए गए चेक की धनराशि दो-दो बार खाते में क्रेडिट होने के बाद बैंक ने वापस ले लिया है. अमरजीत को मिले चेक भी आपत्ति लगकर दो बार वापस आ चुका है. रुपए तो अमरजीत के खाते में क्रेडिट नहीं हुए. उल्टे बैंक ने दो बार में 236-236 रुपए जरूर काट लिए हैं.

दो बच्चों मेराज और मुस्कान को खोने वाले मैनुद्दीन को भी रेल से मिला चेक पेंडिंग ही है. एक-एक बेटे खोने वाले जहीर और नजीर को तो अपना चेक दुरुस्त कराने रेल विभाग के ऑफिस वाराणसी तक जाना पड़ा. लेकिन रुपया अभी भी खाते में नहीं पहुंचा है.

अपनी दो बेटियों साजिदा और तमन्ना को खोने वाले हासन के खाते में 8.50 लाख रुपए क्रेडिट होने के बाद 4.50 लाख रुपए हासन के खाते से वापस ले लिया गया.  यही नहीं, रेलवे द्वारा दिए गए चेक को दुदही पीएनबी जमा ही नहीं कर रहा है. बैंक चेक को वाराणसी जमा करने की सलाह दे रहा है. यही कारण है कि पीड़ित परिवारों का चेक भुगतान के लिए बैंकों का चक्कर लगाना उनके दुखों पर भारी पड़ रहा है.
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घायलों को मिले चेक का भी यही हाल है. पीड़ित परिवारों ने मदद की धनराशि को सीधे खातों में आरटीजीएस के जरिए भेजे जाने की मांग की है.

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First published: May 16, 2018, 12:22 PM IST
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