8 साल पहले जिस शख्स की बिहार में हुई थी मौत, वो गोरखपुर में मिला जिंदा

गोरखपुर में एक चौंकाने वाले मामला सामने आया है. दरअसल बिहार के जिस शख्स की हत्या का मुकदमा दर्ज किया था, असल में वह जिंदा मिला है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 17, 2019, 7:24 PM IST
8 साल पहले जिस शख्स की बिहार में हुई थी मौत, वो गोरखपुर में मिला जिंदा
दिलचस्प है कि बांका जिले के नीलकंठ मिश्र नाम के जिस युवक की हत्या का मुकदमा दर्ज था, वह बिहार पुलिस को गोरखपुर में जीवित मिला है
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Updated: July 17, 2019, 7:24 PM IST
गोरखपुर में एक चौंकाने वाले मामला सामने आया है. दरअसल बिहार के जिस शख्स की हत्या का मुकदमा दर्ज किया था, असल में वह जिंदा मिला है. दिलचस्प है कि बांका जिले के नीलकंठ मिश्र नाम के जिस युवक की हत्या का मुकदमा दर्ज था, वह बिहार पुलिस को गोरखपुर में जीवित मिला है. हैरानी की बात यह है कि उसकी मां ने पड़ोस के 9 लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था. हालांकि सभी आरोपी इस वक्त जमानत पर हैं. वहीं नीलकंठ के जीवित होने की सूचना मिलने के बाद से बिहार पुलिस सकते में है.

पुलिस के पैरों तले खिसकी जमीन
दरअसल बिहार पुलिस के एसआई राजेन्द्र चौधरी की अगुवाई में गोरखपुर पहुंची पुलिस टीम के पैरों के नीचे से उस वक्त जमीन खिसक गई, जब उसके सामने मृतक युवक जिंदा निकल आया. बिहार पुलिस के मुताबिक बिहार के बांका जिला के बेलहर थाना के मनिहारी गांव निवासी कविलाल मिश्र का पुत्र नीलकंठ 8 साल पहले गांव के ही विनोद मिश्र की अंत्येष्टि में शामिल होने गया था. उस दिन के बाद से संदिग्ध परिस्थितियों में वह लापता हो गया. वहीं नीलकंठ की मां ने भागलपुर डीआइजी के सामने पेश होकर जमीन की रंजिश में पट्टीदारी के 9 लोगों पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया था.

9 लोगों पर हुआ था मुकदमा

डीआइजी के निर्देश पर बेलहर थाने में एक ही परिवार के नौ लोगों के विरुद्ध नीलकंठ की हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था. वहीं पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इस बीच गोरखपुर की एक संस्था इस्माइल होम को आठ माह पहले एक युवक विक्षिप्त हालत में मिला था. संस्था में विक्षिप्त युवक का उपचार करना शुरू किया गया. उसकी हालत में सुधार आने पर संस्था ने काउंसिलिंग भी शुरू कर दी. कुछ दिन पहले उसकी हालत में काफी सुधार आ गया.

इस बीच संस्था के लोग उसे अपना नाम, पता याद करने के लिए लगातार प्रेरित करते रहे. कुछ दिन पहले उसने अपना नाम नीलकंठ बताया. धीरे-धीरे उसे अपना पता भी याद आ गया. संस्था से जुड़ आजाद पांडेय का कहना है कि नाम-पते की पुष्टि को लेकर बेलहर थाने के इंस्पेक्टर राजेंद्र चौधरी को फोन कर नीलकंठ के बारे में जानकारी दी थी. जहां पर उसकी हत्या में केस दर्ज किये जाने की बात सामने आई.

हत्याआरोपी ने ली राहत की सांस
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वहीं आरोपी बनाये गये मोहित मिश्रा ने मीडिया को बताया है कि दरअसल बिहार पुलिस के जरिए नीलकंठ के जिंदा होने की जानकारी मिलने पर वह भी गोरखपुर आया है. जहां नीलकंठ को जिंदा देखकर उसे तसल्ली मिली है. साथ ही मोहित ने बताया है कि नीलकंठ की मां ने उसे और उसके परिवार को हत्या के फर्जी मामले में फंसा दिया था. फिलहाल नीलकंठ को सहारा देने वाली गोरखपुर की संस्था की वजह से बिहार के 9 लोग हत्या के फर्जी मामले में सजा जाने से बच गए.

(अनिल सिंह,गोरखपुर )


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First published: July 17, 2019, 6:54 PM IST
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