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कुछ ही देर में धरती के पास से गुजरेगा माउंट एवरेस्ट से भी कई गुना ऊंचा उल्कापिंड, अगर दिशा बदली तो...

कुछ ही देर में धरती के पास से गुजरेगा माउंट एवरेस्ट से भी कई गुना ऊंचा उल्कापिंड, अगर दिशा बदली तो...

गोरखपुर नक्षत्रशाला

गोरखपुर नक्षत्रशाला

जिस समय यह एस्टेरॉयड धरती के बगल से गुजरेगा, उस समय भारत में दोपहर के 3.26 मिनट हो रहे होंगे.

गोरखपुर. विश्वभर के वैज्ञानिक जहां इस समय कोरोना (Corona Pandemic) के संकट से लोगों को निकालने में जूझ रहे हैं तो वहीं कुछ और वैज्ञानिक अंतरिक्ष में हो रही खागोलिय घटना पर नजर रखे हुए हैं. दुनिया के सामने ये नई मुसीबत अंतरिक्ष से आ रही है. इसे लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक परेशान हैं. अगर दिशा में जरा सा भी परिवर्तन हुआ तो खतरा भयानक होगा अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने करीब डेढ़ महीने पहले खुलासा किया था कि धरती की तरफ एक बहुत बड़ा उल्कापिंड तेजी से आ रहा है.  गोरखपुर (Gorakhpur) नक्षत्रशाला में वरिष्ठ खगोलशास्त्री अमरपाल सिंह का कहना है कि यह उल्कापिंड (Asteroid)धरती के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) से भी कई गुना बड़ा है. इतनी गति से यह अगर धरती के किसी हिस्से में टकराएगा तो बड़ी सुनामी ला सकता है. या फिर कई देश बर्बाद कर सकता है.

दोपहर के 3.26 मिनट पर गुजरेगा

नासा का कहना है कि इस एस्टेरॉयड से घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह धरती से करीब 63 लाख किलोमीटर दूर से गुजरेगा. अंतरिक्ष विज्ञान में यह दूरी बहुत ज्यादा नहीं मानी जाती लेकिन कम भी नहीं है. इस एस्टेरॉयड को 52768 (1998 OR 2) नाम दिया गया है. इस एस्टेरॉयड को नासा ने सबसे पहले 1998 में देखा था. इसका व्यास करीब 4 किलोमीटर का है. इसकी गति करीब 31,319 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यानी करीब 8.72 किलोमीटर प्रति सेंकड. ये एक सामान्य रॉकेट की गति से करीब तीन गुना ज्यादा है. जिस समय यह एस्टेरॉयड धरती के बगल से गुजरेगा, उस समय भारत में दोपहर के 3.26 मिनट हो रहे होंगे.

2079 में धरती के और करीब से गुजरेगा

खगोलशास्त्री अमर पाल सिंह का कहना है कि सूरज की रोशनी के कारण आप इसे खुली आंखों से नहीं देख पाएंगे. यह उल्का पिंड 52768 सूरज का एक चक्कर लगाने में 1,340 दिन या 3.7 वर्ष लेता है. इसके बाद एस्टरॉयड 52768 (1998 OR 2) का धरती की तरफ अगला चक्कर 18 मई 2031 के आसपास हो सकता है. तब यह 1.90 करोड़ किलोमीटर की दूरी से निकल सकता है. खगोलविदों के मुताबिक ऐसे एस्टेरॉयड का हर 100 साल में धरती से टकराने की 50,000 संभावनाएं होती हैं. लेकिन, किसी न किसी तरीके से ये पृथ्वी के किनारे से निकल जाते हैं. खगोलशात्री अमरपाल सिंह का कहना है कि यह उल्कापिंड 2079 में एक बार धरती के नजदीक से गुजरेगा. तब ये धरती के लिए और खतरनाक हो सकता है. बता दें कि साल 2013 में लगभग 20 मीटर लंबा एक उल्कापिंड वायुमंडल में टकराया था. एक 40 मीटर लंबा उल्का पिंड 1908 में साइबेरिया के वायुमंडल में टकरा कर जल गया था.

(नोट- खबर का इनपुट और फोटो  गोरखपुर नक्षत्रशाला के खागोलशात्री अमर सिंह द्वारा उपलब्ध कराये गए हैं)

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