मित्र प्रकाश की जिद से बदली सड़क पर रहने वाले बच्‍चों की किस्‍मत, CM योगी के आदेश पर हुआ ये काम

गोरखपुर (Gorakhpur) के मित्र प्रकाश जब ग्रेजुएशन कर रहे थे तब वो ट्यूशन जाने के लिए रोज बैंक रोड़ से गुजरते थे. इस दौरान वो इन बंसफोड़ो को देखते थे कि किस तरह से उनकी जिन्दगी सड़क पर गुजर रही है. धीरे-धीरे वो बंसफोड़ों के बच्चों को पढ़ाने लगे और उनसे जुड़ने लगे.

RAM GOPAL DWIVEDI | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 14, 2019, 11:24 PM IST
मित्र प्रकाश की जिद से बदली सड़क पर रहने वाले बच्‍चों की किस्‍मत, CM योगी के आदेश पर हुआ ये काम
मित्र प्रकाश की जिद से बदली जिंदगी.
RAM GOPAL DWIVEDI | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 14, 2019, 11:24 PM IST
एक युवा जब अपने भविष्य के लिए सपना बुनना शुरू करता है और वह इंटर की पढ़ाई पूरी कर ग्रेजुएट होने के लिए दाखिला लेता है, तब वो सोचता है कि आगे क्या करेगा? जब अधिकांश छात्र स्‍कूली दिनों में देश दुनिया की फ्रिक करने के बजाए सिर्फ अपनी मौज मस्ती में जीते हैं. उसी उम्र में गोरखपुर (Gorakhpur) के एक युवक मित्र प्रकाश (Mitra Prakash) को फ्रिक सताने लगी उनकी जो सड़कों पर अपना जीवन गुजार देते थे. उन बच्चों की जो कभी पढ़ने ही नहीं जाते थे या फिर सड़क पर ही पैदा होते थे और वहीं पर उनकी मौत हो जाती थी, लेकिन मित्र प्रकाश ने अपनी जिद से इन बच्‍चों की जिंदगी बदल कर रख दी है.

मित्र प्रकाश करते हैं ये काम
बंसफोड़ोंं की पूरी जिन्दगी सड़क पर ही गुजर जाती है, क्‍योंकि वह बांस से बने सामानों को दिन भर बेचते हैं और फिर शाम को वहीं सो जाते हैं. सड़क पर ही उनका खाना बनता है और सड़क पर ही उनके बच्चे रहते हैं. सच कहा जाए तो धूप हो, बारिश हो या फिर कड़ाके की ठंड ये सब उसी सड़क पर जीवन यापन करते हैं, लेकिन इनकी जिन्दगी में अब बदलाव आ गया है. जी हां, मित्र प्रकाश नामक एक युवक ने इनकी जिन्दगी को बदल कर रख दिया है.

प्रकाश जब ग्रेजुएशन कर रहे थे तब वो ट्यूशन जाने के लिए रोज बैंक रोड़ से गुजरते थे, वो इन बंसफोड़ो को देखते थे कि किस तरह से उनकी जिन्दगी वहां पर गुजर रही है. धीरे-धीरे वो बंसफोड़ों के बच्चों को वहीं सड़क पर पढ़ाने लगे और उनसे जुड़ने लगे. ये सफर जैसे-जैसे आगे बढ़ा बच्चों के मां बाप से भी ये जुड़ने लगे, तभी पुलिस वाले आकर इन्हें लेकर थाने में चले गये और कहा कि सड़क पर आप बच्चों को नहीं पढ़ा सकते हैं. इससे जाम की स्थिति पैदा होती है, लेकिन ये युवा हिम्मत नहीं हारा बल्कि थाने से बाहर आया और फिर ठान लिया कि अब इनकी जिन्दगी को बदल कर ही रहूंगा.

बंसफोड़ो की बदली ये किस्‍मत
कुछ दोस्तों का साथ मिला और फिर शुरू हुई बंसफोड़ो को आशियाना दिलाने की जंग. कभी नगर आयुक्त को घेरा, कभी धरना प्रदर्शन किया और कभी नगर निगम का घेराव किया. आन्दोलन चलता रहा है गरीबों को मकान दिलाने के लिए. अतिक्रमण हटाओ दस्ते से भी जूझते रहे, लेकिन सरकारी मशीनरी अपने ही ढंग से काम करती रही.

नये डीएम के आने से बनी बात
Loading...

इसी दौरान यूपी की कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ में आ गयी और गोरखपुर के डीएम बनकर आये के विजयेन्द्र पाण्डियन. मित्र प्रकाश का कहना है कि वो सिर्फ डीएम बनकर ही नहीं बंसफोड़ों के लिए भगवान बनकर आये. संघर्षों के दिन अब लदने वाले थे. जी हां, सीएम योगी के मार्गदर्शन में डीएम ने बंसफोड़ों के लिए आसरा योजना के तहत मकान देने का वादा किया. साथ ही बंसफोड़ों से एक वादा लिया कि वो उसी मकान में रहेंगे. इसके बाद मिलेनियम सिटी के पास मकान बनवाकर उन्हें दे दिया और 95 फीसदी बंसफोड़ों को मकान मिल गया है और जो बचे हुए हैं उनके लिए मकान बन रहे हैं.

...और बदल गई जिंदगी
बहरहाल, सड़क पर गुजर बसर करने वाले बंसफोड़ों को जब मकान मिला तब जाकर उनकी जिन्दगी भी बदल गयी. ये लोग अब दिनभर अपने बांस बने समान को मार्केट में बेचते हैं और शाम को अपने घर में जाकर रहते हैं. इनका कहना है कि जब से मित्र प्रकाश आये तब से इनकी जिन्दगी बदल गयी है, वो काफी खुश हैं. यकीनन सिर्फ एक युवा की जिद ने जिस तरह से बंसफोड़ो की जिन्दगी को बदल कर रख दिया, उससे तो यही कहा जा सकता है कि कोई भी काम कठिन नहीं है, बस मुश्किले आती हैं और अगर हिम्मत हो तो उससे पार पाई जा सकती हैं.

ये भी पढ़ें-

RPF को मिली पहली कमांडो बटालियन, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किया ऐलान
PM मोदी की अपील का दिखने लगा असर, जम्मू-कश्मीर में ये यूनिवर्सिटी खोलेगी कैंपस
First published: August 14, 2019, 10:47 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...