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बुढ़वा मंगल पर गोरखनाथ मंदिर में करीब 1 लाख श्रद्धालुओं ने चढ़ाई खिचड़ी
Gorakhpur News in Hindi

Ram Gopal Dwivedi | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 29, 2020, 12:18 PM IST
बुढ़वा मंगल पर गोरखनाथ मंदिर में करीब 1 लाख श्रद्धालुओं ने चढ़ाई खिचड़ी
बुढ़वा मंगल पर गोरखनाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Mandir) के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताया कि मान्यता है कि बुढ़वा मंगल के दिन श्रद्धालुओं द्वारा खिचड़ी चढ़ाना उतना ही पुण्यकारी होता है, जितना मकर संक्रांति के दिन. कालांतर से बुढ़वा मंगल की परंपरा चली आ रही है.

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गोरखपुर. मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के 12 दिन बाद मंगलवार को बुढ़वा मंगल (Budhwa Mangal) के दिन भगवान गुरु गोरक्षनाथ को हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की खिचड़ी चढ़ाई. श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही मंदिर आना शुरू हो गई थी. दोपहर तक यह भीड़ और बढ़ गई. सुबह से जारी हुआ खिचड़ी चढ़ाने का यह क्रम देर शाम तक जारी रहा. मंदिर प्रबंधन के अनुसार एक लाख के करीब श्रद्धालुओं ने बुढ़वा मंगल के मौके पर खिचड़ी चढ़ाई. इसके बाद भक्तों ने हनुमान जी का दर्शन किया और लड्डू का भोग लगाया.

गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताया कि मान्यता है कि बुढ़वा मंगल के दिन श्रद्धालुओं द्वारा खिचड़ी चढ़ाना उतना ही पुण्यकारी होता है, जितना मकर संक्रांति के दिन. कालांतर से बुढ़वा मंगल की परंपरा चली आ रही है. इस दिन दूर-दराज से श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं. गोरखनाथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाते हैं. ऐसे श्रद्धालु, जो मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी नहीं चढ़ा पाते, वह बुढ़वा मंगल के दिन का खिचड़ी चढ़ाने के लिए इंतजार करते हैं.

नेपाल से भी आए श्रद्धालु
देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल से आए श्रद्धालु भी इस दिन बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ा दर्शन एवं पूजन कर पुण्य कमाते हैं. गोरखनाथ मंदिर में जो श्रद्धालु दर्शन पूजन के आते हैं वो मंदिर परिसर में लगे मेले का भी आनंद उठाते हैं.



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गोरखनाथ मंदिर में लगी श्रद्धालुओं की भीड़


मेले में बिछड़े लोगों को मिलाने के लिए बना केंद्र
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ अगर कोई बिछड़ जाता है. उसके लिए भूले बिसरे केन्द्र मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन की तरफ से किया गया है. बता दें देवरिया के भाटपाररानी से दर्शन करने आया एक बच्चा खो गया, जिसको भूले बिसरे केन्द्र पर लाया गया तो उसने अपना नाम भगेलु बताया, जिसके बाद भोजपुरी अंदाज में बोला गया भगेलुआ की अम्मा जहां कहीं भी हों वो आकर भूले बिसरे केन्द्र से भगेलुआ से संपर्क करें यानि कि दूर दराज से आये श्रद्धालुओं के सुविधा का पूरा ख्याल उन्ही के जुबान में रखा जा रहा है.

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First published: January 29, 2020, 12:06 PM IST
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