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Sanjay Nishad: होम्योपैथी की प्रैक्टिस से पॉलिटिक्स के महारथी, जानें 8 साल में कैसे बदल गई निषाद पार्टी

Sanjay Nishad News: डॉ. संजय निषाद ने अपनी पार्टी के दम पर यूपी की सियासत में बनाई पहचान.

Sanjay Nishad News: डॉ. संजय निषाद ने अपनी पार्टी के दम पर यूपी की सियासत में बनाई पहचान.

Nishad Party Politics: गोरखपुर जैसी लोकसभा सीट पर उपचुनाव में हारने के बाद भाजपा ने निषाद पार्टी को अपने साथ लाने की कव ...अधिक पढ़ें

गोरखपुर. पूर्वांचल के गोरखपुर शहर से इलेक्ट्रो होम्योपैथी की प्रैक्टिस और उसी मान्यता के लिए संघर्ष कर अपनी नेतृत्व क्षमता का अहसास करवाने वाले डॉ. संजय निषाद (Sanjay Nishad) विधानसभा चुनाव के बाद यूपी की राजनीति का अहम किरदार बन गए हैं. निषादों को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिलवाने की मांग करने वाली निषाद पार्टी आठ साल में ही यूपी की चौथे नंबर की पार्टी बन गई है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने निषाद पार्टी को गठबंधन के तहत 15 सीटें दीं, जिनमें 11 सीटों पर जीत मिली. हालांकि, इन 11 में पांच सीटों पर निषाद पार्टी के नेता भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़े थे. इनमें डॉ. संजय निषाद के छोटे बेटे सरवन निषाद भी थे, जो चौरी-चौरा सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं.

2017 के विधानसभा चुनाव में पहली बार निषाद पार्टी ने पीस पार्टी के साथ समझौता कर चुनाव लड़ा था. गठबंधन के तहत निषाद पार्टी ने 72 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे. लेकिन, जीत सिर्फ ज्ञानपुर सीट पर विजय मिश्रा के रूप में मिली. इस चुनाव में डॉ. संजय निषाद खुद भी गोरखपुर देहात से हार गए थे. उन्हें सिर्फ 34,869 वोट मिले. 2017 में योगी आदित्यनाथ को प्रदेश की कमान मिली. सीएम बनने के बाद उन्होंने गोरखपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया. गोरखपुर सीट पर हुए उप चुनाव में संजय निषाद ने सपा से गठबंधन कर अपने पुत्र प्रवीण निषाद को चुनाव लड़ाया और भाजपा को हराकर बेटे को संसद पहुंचा दिया.

भाजपा से गठबंधन कर मिली पहचान

गोरखपुर जैसी सीट लोकसभा उपचुनाव में हारने के बाद भाजपा ने निषाद पार्टी को अपने साथ लाने की कवायद शुरू की. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने निषाद पार्टी के साथ गठबंधन कर प्रवीण निषाद को संत कबीरनगर से संसद भेजा. साथ ही भाजपा ने डॉ. संजय निषाद को विधान परिषद पहुंचाया. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने निषाद पार्टी को गठबंधन के तहत 15 सीटें दीं, जिनमें 11 सीटों पर जीत मिली. हालांकि, इन 11 में पांच सीटों पर निषाद पार्टी के नेता भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़े थे. इनमें डॉ. संजय निषाद के छोटे बेटे सरवन निषाद भी थे, जो चौरी-चौरा सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं.

आपके शहर से (लखनऊ)

संजय निषाद के दावे में दम

उधर, खुद को निषादों का बड़ा नेता बताने वाले निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर संजय निषाद की बात करें तो भाजपा ने उन्हें गठबंधन में 16 सीटें दी हैं. निषाद जाति का नेतृत्व करने वाले संजय निषाद का दावा है कि यूपी की 403 सीटों में से 160 पर निषादों का प्रभाव है. 2017 में निषाद पार्टी ने अपने सिंबल पर 72 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सिर्फ ज्ञानपुर सीट पर ही जीत मिली थी.

Tags: Sanjay Nishad, UP politics, Uttar Pradesh Assembly Election Result 2022

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