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ANALYSIS: योगी के गोरखपुर में क्या निषाद कराएंगे बीजेपी की नैया पार?

बीजेपी प्रत्याशी रवि किशन

बीजेपी प्रत्याशी रवि किशन

गोरखपुर के जातीय गणित को यदि देखा जाए तो यहां 19.5 लाख वोटरों में से 3.5 लाख वोटर निषाद समुदाय के हैं. वहीं यादव और दलि ...अधिक पढ़ें

    पूर्वी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर निषाद वोटर्स का खासा असर माना जाता है, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर में इस जाति के वोटों को लेकर कौतुहल सबसे अधिक है. 2018 में हुए उपचुनाव में भाजपा ने यह सीट गंवा दी थी और सपा-बसपा तथा निषाद पार्टी के संयुक्त प्रत्याशी प्रवीण निषाद विजयी हुए थे. 2019 के चुनाव में अब सारा दामोदार निषाद वोटर्स पर आकर टिका है. इस सीट पर भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन, सपा-बसपा गठबंधन के रामभुआल निषाद और कांग्रेस के मधुसूदन तिवारी चुनावी दंगल में हैं.

    वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रतन मणि लाल कहते हैं कि 2018 के उपचुनाव के दौरान पहली बार निषाद बिरादरी से आने वाले प्रवीण निषाद को वोट किया था, जिसकी वजह से वो चुनाव जीते. लाल कहते हैं कि उस दौरान किसी वजह से सीएम योगी आदित्यनाथ उतना सक्रिय नहीं थे. 1989 से गोरखपुर की सीट से महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवैद्यनाथ और पांच बार योगी आदित्यनाथ चुनाव जीतते आ रहे हैं, यानी निषादों की पूरी आस्था मठ से जुड़ी हुई है.

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    सीएम योगी आदित्यनाथ


    राजनीतिक विश्लेषक रतन मणि लाल के मुताबिक जब योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो निषादों ने अपनी बिरादरी के प्रत्याशी को समर्थन किया. वह कहते हैं, '2019 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने गहन चिंतन और मंथन के बाद रवि किशन को गोरखपुर सीट से चुनाव मैदान में उतारा है. रवि किशन 'ब्राह्मण' चेहरा हैं और योगी का पूरा समर्थन है. यही वजह है कि सीएम योगी आदित्यनाथ एक दिन में रवि किशन के पक्ष में ताबड़तोड़ जनसभाएं कर रहे हैं.'

    रतन मणि लाल कहते हैं कि गोरखपुर सीट पर किसी भी जाति का प्रत्याशी हो, चुनाव जीतने के लिए योगी और मठ का समर्थन बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि निषादों की आस्था मठ और योगी के साथ जुड़ी हुई है. वहीं योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. ऐसे में ये बिरादारी योगी के गुड बुक में बने रहने के लिए रवि किशन को वोट कर सकती है. वहीं रवि किशन को सीएम योगी का खुला समर्थन मिलने के बाद अब निषादों का वोट भाजपा को जा सकता हैं.

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    चुनाव प्रचार करते रवि किशन


    निषाद वोटरों की अहम भूमिका
    गोरखपुर के जातीय गणित को यदि देखा जाए तो यहां 19.5 लाख वोटरों में से 3.5 लाख वोटर निषाद समुदाय के हैं. इस संसदीय क्षेत्र में निषाद जाति के सबसे अधिक मतदाता हैं. वहीं, यादव और दलित मतदाता दो-दो लाख हैं. ब्राह्मण वोटर करीब डेढ़ लाख हैं. यदि चुनाव में निषाद, यादव, मुसलमान और दलित एकजुट हो जाते हैं तो चुनाव परिणाम चौंका भी सकते हैं.

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    निषाद बिरादरी


    गोरक्षनाथ पीठ का रहा है दबदबा
    गोरखपुर सीट बीजेपी के लिए खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है. योगी यहां से 5 बार सांसद चुने जा चुके हैं. 1952 में पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट के लिए चुनाव हुआ और कांग्रेस ने जीत दर्ज की. इसके बाद गोरक्षनाथ पीठ के महंत दिग्विजयनाथ 1967 में निर्दलीय चुनाव जीता. उसके बाद 1970 में योगी आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ ने निर्दलीय जीत दर्ज की.

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