यूपी की ये दो पार्टियां बिगाड़ सकती हैं पूर्वांचल का राजनीतिक समीकरण!

इस मामले में गोरखपुर से सपा सांसद प्रवीण निषाद ने कांग्रेस की महासिचव प्रियंका गांधी से मुलाकात को सिरे से नकार रहे हैं. बता दें कि पूर्वांचल में लोकसभा की 26 सीटें हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां की 25 सीटें जीत थी.

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: February 25, 2019, 11:51 AM IST
यूपी की ये दो पार्टियां बिगाड़ सकती हैं पूर्वांचल का राजनीतिक समीकरण!
डा. अय्यूब और संजय निषाद (फाइल फोटो)
NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: February 25, 2019, 11:51 AM IST
सपा-बसपा गठबंधन के बीच लोकसभा सीटों के बंटवारे में अपने लिए गुंजाइश खत्म होती देख पीस पार्टी और निषाद पार्टी कांग्रेस का हाथ थाम सकते है. शनिवार को पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. अय्यूब नई दिल्ली में कांग्रेस की नवनियुक्त महासिचव व पूर्वी यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी. इसी कड़ी में निषाद पार्टी भी सपा को छोड़कर कांग्रेस के साथ शामिल हो सकती हैं. लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि पीस पार्टी और निषाद पार्टी का गोरखपुर और आसपास के जिलों जैसे फैजाबाद, बस्ती और आजमगढ़ में खासा दबदबा हैं.

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रामदत्त त्रिपाठी ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान इसका लाभ इन दोनों पार्टीयों को मिलेगा. वहीं सपा-बसपा के गठबंधन को नुकसान हो सकता हैं. त्रिपाठी ने बताया कि चुनाव से पहले छोटी-छोटी पार्टियां को भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है. उन्होंने कहा कि बीजेपी भी यूपी में अपना दल और ओम प्रकाश की राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से गठबंधन कर चुकी है. रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि ये छोटे-छोटे पाकेट है, जो चुनाव के दौरान किसी भी पार्टी को फायदा और नुकसान पहुंचा सकते हैं. सीएम योगी के गोरखपुर की हाई प्रोफाइल सीट पर उन्होंने कहा कि इस सीट पर सपा-बसपा गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकती है ये दोनों छोटी पार्टियां.

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इस मामले में गोरखपुर से सपा सांसद प्रवीण निषाद ने कांग्रेस की महासिचव प्रियंका गांधी से मुलाकात को सिरे से नकार रहे हैं. बता दें कि पूर्वांचल में लोकसभा की 26 सीटें हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां की 25 सीटें जीत थी. इस बार समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी मिलकर चुनाव मैदान में उतरी हैं. इसे देखते हुए पीएम मोदी और बीजेपी के सामने कड़ी चुनौती है. गौरतलब है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर में 44.13 फीसदी वोट पड़े थे. बीजेपी उम्मीदवार योगी को 4 लाख 3 हजार 156 वोट, बसपा को 1 लाख 82 हजार 885 वोट, सपा को 83 हजार 59 वोट और कांग्रेस को महज 30 हजार वोट मिले थे.

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निषाद वोटरों की अहम भूमिका:
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गोरखपुर के जातीय गणित को यदि देखा जाए तो यहां 19.5 लाख वोटरों में से 3.5 लाख वोटर निषाद समुदाय के हैं. इस संसदीय क्षेत्र में निषाद जाति के सबसे अधिक मतदाता हैं. यादव और दलित मतदाता दो-दो लाख हैं. ब्राह्मण वोटर करीब डेढ़ लाख हैं. यदि चुनाव में निषाद, यादव, मुसलमान और दलित एकजुट हो जाते हैं तो चुनाव परिणाम चौंका भी सकते हैं.

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स्थानीय मुद्दे:

वैसे तो लोकसभा चुनाव देश के मुद्दे पर लड़ा जाता है लेकिन स्थानीय मुद्दों का भी महत्व होता है. 2014 में विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा गया था. लेकिन लखनऊ का मुद्दा था रोजाना का लगने वाला जाम, सुरक्षा, सड़क, बिजली पानी, अनियमित कॉलोनियों का नियमितीकरण आदि. हालांकि जाम से निजात दिलाने के लिए शहर को स्वच्छ बनाने के लिए भी कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. वहीं शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार नए-नए प्लान तैयार कर रही है.

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First published: February 25, 2019, 11:30 AM IST
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