गोरखपुर में जलती चिताएं कर रहीं विचलित, नगर निगम ने पुल पर लगाया पोस्टर, फिर हटाया

गोरखपुर के राजघाट पुल पर लगा पोस्टर चर्चा का केंद्र बना हुआ है.

गोरखपुर के राजघाट पुल पर लगा पोस्टर चर्चा का केंद्र बना हुआ है.

Gorakhpur News: गोरखपुर में बाबा मुक्तेश्वर नाथ घाट पर कोरोना संक्रमितों के शवों की लंबी लाइन लग रही है. सुबह से लेकर देर रात तक शवों के दाह का सिलसिला चल रहा है. राजघाट पुल से ये नजारा साफ देखा जा सकता है.

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गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur) में कोरोना संक्रमण के बीच एक ऐसी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जिससे नगर निगम प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल गोरखपुर की खुबसूरती को बढ़ाने के लिए राप्ती नदी के दोनों तटों पर गुरु गोरक्षनाथ व श्रीराम घाट बनाए गए हैं. राजघाट पुल से गुजरने वाले लोग भी इनके सौंदर्य को निहारे बिना आगे नहीं बढ़ पाते थे. लेकिन इन दिनों यहां की तस्वीर बदली हुई है. गुरु गोरक्षनाथ घाट के बगल में स्थित बाबा मुक्तेश्वर नाथ घाट पर चलती चिताएं लोगों को विचलित कर दे रही हैं. ये चिताएं प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर रही हैं.

दरअसल बाबा मुक्तेश्वर नाथ घाट पर कोरोना संक्रमितों के शवों की लंबी लाइन लग रही है. सुबह से लेकर देर रात तक शवों के दाह का सिलसिला चल रहा है. राजघाट पुल से ये नजारा साफ देखा जा सकता है, जो लोगों को कहीं न कहीं विचलित कर रहा था. इतनी संख्या में शवों को जलते हुए शायद ही पहले किसी ने देखा हो.

नगर निगम का पोस्टर हुआ वायरल

इस बीच गोरखपुर नगर निगम का एक फैसला लोगो में चर्चा का विषय बन गया है. दरअसल 29 अप्रैल को नगर निगम ने राजघाट पुल पर घाट की तरफ जाली पर पोस्टर लगा दिया है कि यहां पर फोटो खींचना और वीडियो बनाना मना है. जब ये पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे तो अगले ही दिन नगर निगम की टीम ने उसे हटा लिया.
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एक साथ कई शवों का अंतिम संस्कार!

राजघाट पर शवों के आने का सिलसिला लगातार जारी है. शवों की संख्या अधिक होने की वजह से नगर निगम की ओर से टोकन की व्यवस्था की गई है. ऐसे में कई लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. राजघाट शवदाह गृह पर तैनात नगर निगम के कर्मचारियों का कहना है कि एक साथ कई शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है. कोरोना वायरस की विकरालता ने अपनों को बेगाना कर दिया है. नगर निगम कर्मियों का कहना है कि राजघाट शवदाह गृह पर ऐसे कई शव आ रहे हैं, जिनके साथ कोई परिजन नहीं होता. संक्रमित की मौत के बाद परिजन शव वाहन बुलाते हैं. शव को वाहन में रखवाकर कुछ पैसे देते हैं, फिर कहते हैं कि अंतिम संस्कार करा देना. जब शव राजघाट पहुंचते हैं तो निगम कर्मी दाह संस्कार कर देते हैं. यही नहीं, दाह संस्कार के बाद परिजनों की अस्थि तक लेने लोग नहीं आ रहे हैं.
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