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विवेक तिवारी हत्याकांड: इस दारोगा ने छेड़ी यूपी पुलिस की छवि चमकाने की मुहिम

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: October 8, 2018, 9:57 AM IST
विवेक तिवारी हत्याकांड: इस दारोगा ने छेड़ी यूपी पुलिस की छवि चमकाने की मुहिम
चौकी इंचार्ज प्रमोद सिंह

दारोगा प्रमोद सिंह ने गरीबों को कपड़े, जूते-चप्पल, गरीब बच्चों को निःशुल्क चिकित्सा-शिक्षा और उनके रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की शुरुआत की है. उनके इस काम की हर तरफ प्रशंसा हो रही है.

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  • Last Updated: October 8, 2018, 9:57 AM IST
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लखनऊ में विवेक तिवारी हत्याकांड को लेकर यूपी में सियासत खूब हो रही है. इस घटना के बाद यूपी पुलिस की छवि को सुधारने के लिए योगी के शहर में पुलिस का मानवीय चेहरा भी उभरकर सामने आया है. गोरखपुर की धर्मशाला चौकी पर तैनात सब इंस्पेक्टर प्रमोद सिंह ने गरीबों के लिए खुद को समर्पित कर दिया है. उन्होंने ड्यूटी के साथ एक अनोखी मुहिम छेड़ी है. दारोगा ने सप्‍ताह में एक दिन गरीबों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने का संकल्‍प लिया है.

इसी कड़ी में दारोगा ने संस्था से 10 सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापारियों को जोड़ा है. इसका उद्देश्य गरीबों को कपड़े, जूते-चप्पल, गरीब बच्चों को निःशुल्क चिकित्सा-शिक्षा और उनके रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की शुरुआत की. उनके इस काम की हर तरफ प्रशंसा हो रही है.

असहाय लोगों का बाल कटवाते


गोरखनाथ थाना क्षेत्र में स्थित धर्मशाला चौकी पर तैनात प्रमोद सिंह ने न्यूज18 से बातचीत में कहा,  विवेक तिवारी हत्याकांड के बाद यूपी पुलिस के कई सिपाहियों ने काली पट्टी बांधकर यूपी पुलिस के खिलाफ विरोध जताया. ऐसा नहीं करना चाहिए. प्रमोद बताते हैं कि केवल दो कॉन्स्टेबल के चलते पूरी पुलिस फोर्स को बदनाम करना गलत है. विवेक तिवारी जैसी घटना गलत है और हम सभी को उसका दुख है.

दारोगा प्रमोद सिंह


इस घटना के बाद हमने कुछ अलग करने का सोचा. उन्होंने बताया कि एक छोटी सी पहल की शुरुआत की है. कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापारियों को जोड़कर हमने चौकी के पास, "हम हैं न’’..नाम से संस्था बनाया. प्रमोद सिंह की मेहनत रंग लाई और खाकी का एक मानवीय चेहरा भी लोगों के सामने आया. पुलिस का नाम सुनते ही डरने वाले लोग प्रमोद सिंह को देखते ही खुशी से भर जाते हैं. प्रमोद सिंह की पहल से संस्था में मदद करने वालों की संख्या बढ़ रही है. इस नेक काम में चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी भी इस दारोगा की मदद करते नजर आ रहे है.

भोजन करते बच्चे

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प्रमोद बताते हैं कि संस्‍था का उद्देश्‍य माह में एक-एक दिन बढ़ाकर इस मुहिम को हर रोज 1000 गरीबों को भोजन पहुंचाने के लक्ष्‍य को पूरा करना है. उनका कहना है कि वे कोई सरकारी सहायता नहीं ले रहे हैं. शुरुआत में संस्‍था के साथ कुछ व्‍यापारी और समाजसेवी जुड़े. अब उनकी संख्‍या लगातार बढ़ रही है. उनका कहना है कि पुलिस का नाम सुनते ही लोग डरते रहे हैं. लेकिन, उनकी इस पहल से अन्‍य लोगों को भी सीख मिलेगी और पुलिस के साथ आम आदमी भी सहजता के साथ जुड़ सकेगा.

विवेक तिवारी हत्याकांड के बाद एक तरफ जहां लोग खाकी वर्दी वालों को कोस रहे हैं. वहीं, प्रमोद सिंह की इस पहल ने लोगों के सामने खाकी का मानवीय चेहरा भी सामने लाया है. ऐसे में जब कोई पुलिसवाला गरीबों की ओर देखकर ये कहे कि घबराओ मत भूखे हो...’हम हैं न’...

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First published: October 8, 2018, 7:20 AM IST
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