कोरोना संक्रमित मरीज की मौत मामला: एडमिट करने से लेकर दफनाने तक कहां था प्रोटोकॉल?
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कोरोना संक्रमित मरीज की मौत मामला: एडमिट करने से लेकर दफनाने तक कहां था प्रोटोकॉल?
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बस्ती के एक कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

गोरखपुर (Gorakhpur) के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में युवक की मौत हो जाती है, मेडिकल कॉलेज प्रशासन उसके मृत शरीर को परिजनों को सौंप देता है. अंतिम संस्कार भी हो जाता है. इसके बाद रिपोर्ट आती है कि मृत युवक कोरोना (COVID-19) से पीड़ित था. रिपोर्ट आने के बाद गोरखपुर से लेकर बस्ती और संतकबीर नगर (Sant Kabir Nagar) तक तमाम एजेंसियों में हड़कंप मच जाता है.

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गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur) के बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) में बस्ती (Basti) के एक युवक की मौत हो जाती है, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन उसके मृत शरीर को परिजनों को सौंप देता है. अंतिम संस्कार भी हो जाता है. इसके बाद रिपोर्ट आती है कि मृत युवक कोरोना (COVID-19) से पीड़ित था. रिपोर्ट आने के बाद गोरखपुर से लेकर बस्ती और संतकबीर नगर (Sant Kabir Nagar) तक तमाम एजेंसियों में हड़कंप मच जाता है.

दरअसल बस्ती जिले के गांधीनगर के रहने वाला एक युवक, जो पहले से बीमार था, उसको बस्ती के जिला अस्पताल में शनिवार यानि 28 मार्च को भर्ती कराया जाता है. उसके परिजन ट्रैवल हिस्ट्री नहीं बताते हैं. उस युवक को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, फिर सोलजर वार्ड में भर्ती किया जाता है. 29 मार्च रविवार को युवक को बस्ती से गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है. उसके बाद दोपहर बाद 29 मार्च को इस युवक को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर जनरल वार्ड में रखा जाता है. इलाज शुरू होता है. इस दौरान डॉक्टरों को युवक में कोरोना के सिमटम दिखते हैं. जिसके बाद डॉक्टर उसे आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर देते हैं.

युवक की मौत के बाद कोरोना की पुष्टि, लखनऊ से कराई जाती है कन्फर्म



सोमवार यानि 30 मार्च को सुबह 8 बजे युवक की मौत हो जाती है. उसकी बॉडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन परिजनों को सौंप देता है. वहीं मौत के पहले ही युवक की एक जांच रिपोर्ट बीआरडी के वायरोलॉजी सेन्टर भेजी जाती है, जिसमें कोरोना की पुष्टि होती है. इसके बाद इसे कन्फर्म करने के लिए लखनऊ जांच के लिए भेजा जाता है. जब तक ये प्रक्रिया चलती है, तब तक सोमवार को युवक को बस्ती में उसके घर से कुछ ही दूरी पर स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया जाता है.
कोरेाना पुष्टि के बाद बस्ती तक हड़कंप

इसके बाद मंगलवार यानि 31 मार्च को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में कोरोना की पुष्टि होने पर हड़कम्प मच जाता है. फोन घनघनाने लगते हैं. सूचना मिलते ही आनन-फानन में बस्ती प्रशासन गांधी नगर को सील कर देता है. आला अफसरों की गाड़ियां अचानक उस ओर दौड़ने लगती हैं. कुछ ही देर में गांधीनगर और तुरकहिया में आला अफसर, स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका और पुलिस की टीमें पहुंच जाती हैं.

युवक के परिवार के 6 लोग और दो एंबुलेंस कर्मी आइसाेलेट

इसके बाद बस्ती सीएमओ की मौजूदगी में स्वास्थ्य टीम ने मृतक के परिवार के 6 सदस्यों के साथ ही 2 अन्य (गोरखपुर एंबुलेंस से ले जाने वाले चालक और सहायक) को वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज बस्ती के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करा दिया जाता है. बस्ती जिला अस्पताल के 12 स्टाप को आइसोलेट कर दिया जाता है. जिस एंबुलेंस से युवक आया था, उसे खड़ा करा दिया जाता है. वार्ड को सेनेटाइज किया जाता है.
इसी दौरान 1 अप्रैल को लखनऊ से भी रिपोर्ट आ जाती है कि मृतक युवक कोरोना पॉजटिव था. इसके बाद गोरखपुर से लेकर बस्ती और संतकबीर नगर तक हड़कंप और मच जाता है.

जनाजे में शामिल 30 लोगों की तलाश

बस्ती में युवक के जनाजे में शामिल करीब 30 लोगों की तलाश जिला प्रशासन शुरू करता है. जनाजे में जामा मस्जिद के पेशे इमाम सहित सभी लोगों को संदिग्ध माना जाता है. वहीं दूसरी तरफ गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जनरल वार्ड में उसका इलाज करने वाले 6 स्टाप को आइसोलेट कर दिया जाता है. फिर मृतक युवक के बहनोई को भी आईसोलेट किया जाता है.

युवक की दुकान तक सतर्कता

गोरखपुर जिलाधिकारी पूरी टीम के साथ बीआरडी मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करते हैं और फिर युवक की मौत की पुष्टि करते हैं. साथ ही मेडिकल कॉलेज में कोरोना से निपटने के लिए सारे इंतजामों को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा करते हैं. इसी दौरान सूचना मिलती है कि मृतक युवक की संतकबीरनगर के सेमरियावां में जूते चप्पल की दुकान है फिर क्या था, वहां का भी जिला प्रशासन सक्रिय हो जाता है और पता करने लगता है कि युवक कब दुकान पर आया था? जिला प्रशासन ने कुछ राहत की सांस तब ली, जब उसे पता चला कि युवक पिछले दो महीने से दुकान पर नहीं आया था. फिर भी ऐहतियात के तौर पर वहां पर सतर्कता बरती जा रही है. बस्ती के गांधीनगर सब्जी मंडी में मृतक के परिजनों की किराने की दुकान है. वहां पर भी सतर्कता बरती जा रही है.

खड़े हुए कई सवाल

पर सवाल यहां ये उठता है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जब पता चल गया था कि ये व्यक्ति हाइली सस्पेक्टेड है तो उसकी बॉडी को घर वालों को क्यों सौंपा गया? क्यों प्रोटोकॉल को फॉलो नहीं किया गया? सोमवार को युवक की मौत के बाद भी इस मामले को छिपाने का प्रयास बार-बार सीएमओ और उनकी टीम द्वारा क्यों किया गया? सवाल इस लापरवाही पर कई हैं, पर जवाब देने को कोई तैयार नहीं है.

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