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गोरखपुर के हॉकी ट्रेनर मोहम्मद इमरान की बायोपिक बनाएंगे राजेश बेरी

राजेश बेरी ने गोरखपुर में हॉकी गुरु मोहम्मद इमरान की मौजूदगी में उनपर बायोपिक की घोषणा की है.
राजेश बेरी ने गोरखपुर में हॉकी गुरु मोहम्मद इमरान की मौजूदगी में उनपर बायोपिक की घोषणा की है.

राजेश बेरी ने कहा है कि गोरखपुर जिले में रहकर हॉकी के सैकड़ों खिलाड़ी बनाने का माद्दा रखने वाले इस जुझारू शख्सीयत पर बॉयोपिक बनाना अपने आप में एक गौरव का विषय है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 27, 2020, 8:06 PM IST
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गोरखपुर. सरबजीत पर बायोपिक बनाकर चर्चा में आए राजेश बेरी अब गोरखपुर के हॉकी गुरु मोहम्मद इमरान की बायोपिक बनाएंगे. आज गोरखपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राजेश बेरी ने यह घोषणा की. इस बायोपिक में इमरान के हॉकी को लेकर संघर्ष के साथ ही खेल के प्रति उनके जुनून को दिखाया जाएगा. राजेश बेरी ने कहा है कि गोरखपुर जिले में रहकर हॉकी के सैकड़ों खिलाड़ी बनाने का माद्दा रखने वाले इस जुझारू शख्सीयत पर बॉयोपिक बनाना अपने आप में एक गौरव का विषय है. उल्लेखनीय है कि आज राजेश बेरी ने गोरखपुर में इमरान चचा की मौजूदगी में इस बायोपिक की घोषणा की है. दूसरी तरफ खुद पर बन रही फिल्म से उत्साहित मोहम्मद इमरान चचा कहते हैं कि इस कदम से हॉकी के गौरवशाली अतीत के प्रति एक बार फिर देश और दुनिया का ध्यान लौटेगा.

अनजान हीरो की कहानी

राजेश बेरी ने बताया कि एक छोटे से शहर से गांव और कस्बों की बेटियों को प्रशिक्षण देकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का मुकाम दिलाया, वह भी तमाम बुनियादी सुविधाओं के अभाव में. यह बात अपने आप में काबिलेतारीफ है. ऐसे अनजान हीरो और उसकी कहानी को देश और दुनिया के सामने लाने के लिए फिल्म से बेहतर कोई जरिया नहीं है. हॉकी गुरु इमरान तक राजेश बेरी को पहुंचाने का जरिया फिल्म प्रोड्यूसर आकाश पाण्डेय बने. दरअसल आकाश भी फर्टिलाइजर मस्जिद कंपाउंड में रहते हैं. उन्होंने राजेश बेरी को इमरान चचा के बारे में बताया और दोनों की मुलाकात कराई.



पहले कहानी फिर स्टारकास्ट
राजेश बेरी कहते हैं कि उन्होंने कहानी पूरी कर स्टार कास्ट पर काम करना शुरू किया था. लेकिन देश में कोविड-19 के कारण काफी कुछ बदल गया. ऐसे में अब कहानी भी समय के हिसाब से बदल रही है. कहानी पूरी होते ही स्टार कास्ट पर भी काम शुरू हो जाएगा.

इमरान ने दिए 8 इंटरनेशनल और 50 नेशनल हॉकी खिलाड़ी

मोहम्मद इमरान ने देश को 8 इंटरनेशनल और 50 नेशनल हॉकी खिलाड़ी दिया है. फर्टिलाइजर मस्जिद कम्पाउंड स्थित मकान में 2008 से वे किराए पर रह रहे हैं. इमरान अपनी पत्नी यास्मीन जहां, बेटे मोहम्मद आमिर और शादीशुदा बेटी उज्ज्मा के साथ यहां रहते हैं. बताते हैं कि इमरान को अपनी बेटी की शादी के लिए फेरी लगाकर स्‍पोर्ट्स किट बेचना पड़ा था. इमरान जब 2016 में मीडिया की सुर्खियां बनें तो रोहतक के मदीनाके रहनेवाले इंटरनेशनल रेसलर संग्राम सिंह ने बेटी की शादी का खर्च उठाने की घोषणा की थी. उस वक्त यह खबर भी सुर्खियां बनीं थी. लेकिन इमरान ने कभी किसी की मदद नहीं ली.

ध्यानचंद से सीखी थी इमरान ने हॉकी

इमरान को हॉकी खेलने का शौक बचपन से ही था. पढ़ाई के दौरान इन्‍होंने झांसी के गड्ढे वाले मैदान पर हॉकी की बारीकियां सीखीं. हाकी की बदौलत ही 70 के दशक में मेजर ध्‍यानचंद और केडी सिंह के करीब रहे. इमरान को गुरुश्री अवॉर्ड, राष्ट्रीय गौरव अवॉर्ड, ‘द रीयल हीरो ऑफ सोसायटी’ और ‘मेधावीर अर्जुन’ सम्मान मिल चुका है.

रोजी-रोटी की तलाश में गोरखपुर आए थे

इमरान मूलरूप से जौनपुर जिले के रहने वाले हैं और अबीरगढ़ टोला थाना कोतवाली, जौनपुर से ताल्लुक रखते हैं. साल 1973 में रोजी-रोटी की तलाश में जब वह गोरखपुर आए और खेल कोटे से खाद कारखाने में नौकरी करने लगे. बाद में खाद कारखाना उनकी कर्मभूमि बन गया. उन्होंने हॉकी की ट्रेनिंग देना भी जारी रखा. 31 दिसंबर 2002 में खाद कारखाना अचानक बंद हुआ और उनकी नौकरी चली गई. परिवार चलाने के लिए खिलाड़ियों के लिए लोअर बनाने का कारखाना शुरू किया, लेकिन यह बिजनेस कामयाब नहीं हुआ. पेंशन से गुजारा मुश्किल था. ऐसे में घूम-घूमकर स्‍पोर्ट्स किट बेचने लगे. फिलहाल उनके बेटे आमिर परिवार की जिम्मेदारियां उठा रहे हैं.
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