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जानिए क्या है श्रीप्रकाश शुक्ला और रवि किशन का रिश्ता

रवि किशन

रवि किशन

इसी ‘मामखोर’ गांव और गोरखपुर शहर में पले-बढ़े श्रीप्रकाश शुक्‍ला का शौक पहलवानी करना था. लम्‍बी-चौड़ी कद-काठी वाला इस नौजवान ने भी उम्‍मीदों की उड़ान के सपने देखे थे. लेकिन, एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने इसे देश का नंबर एक क्रिमिनल बना दिया.

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गोरखपुर के दक्षिणांचल का एक गांव है ‘मामखोर’. ‘मामखोर’ का जिक्र यहां इसलिए भी हो रहा है क्‍योंकि मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के शहर गोरखपुर का ये गांव साल 2019 के चुनाव के पहले अचानक ही पूरी दुनिया में सुर्खियों में आ गया है. बीजेपी उम्‍मीदवार के रूप में गोरखपुर से चुनाव लड़ रहे भोजपुरी फिल्‍म अभिनेता रवि किशन के पूर्वज चिल्‍लूपार के ‘मामखोर’ के रहने वाले हैं. इसे साबित करने के लिए रवि किशन मामखोर गांव गए और वहां की माटी को माथे से भी लगाया. वहां के दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद लेने के साथ वहां के लोगों से मुलाकात भी की.

वैसे बता दें रवि किशन के जन्‍म के पांच साल के बाद यानी साल 1973 में उन्‍हीं के गांव के एक और शुक्‍ल परिवार में बेटे ने जन्‍म लिया. इसका नाम रखा गया श्रीप्रकाश शुक्‍ला. ‘शुक्‍ल’ ब्राह्मणों का गांव ‘मामखोर.’ कहा जाता है कि मामखोर के बहुत से ‘शुक्‍ल ब्राह्मण’ देश के अलग-अलग शहर और अलग-अलग देशों में जाकर बसे हैं.

मामखोर पहुंचे रवि किशन


इसी ‘मामखोर’ गांव और गोरखपुर शहर में पले-बढ़े श्रीप्रकाश शुक्‍ला का शौक पहलवानी करना था. लम्‍बी-चौड़ी कद-काठी वाला इस नौजवान ने भी उम्‍मीदों की उड़ान के सपने देखे थे. लेकिन, एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने इसे अपराधी बना दिया. जी हां, ये नौजवान जरायम की दुनिया का रंगबाज बन गया. बहन से छेड़खानी की घटना से आहत होकर श्रीप्रकाश शुक्‍ला ने साल 1993 में राकेश तिवारी नाम के युवक की गोली मारकर हत्‍या कर दी. उसके बाद बिहार के माफिया सूरजभान की मदद से वो बैंकॉक भाग गया.

माफिया श्रीप्रकाश शुक्‍ला


जून 1998 में श्रीप्रकाश शुक्‍ला बिहार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्‍या कर सुर्खियों में आ गया. इसके कुछ दिन बाद ही उसने मोतिहारी के विधायक अजीत सरकार की हत्‍या कर दी. श्रीप्रकाश शुक्ला का नाम आज से लगभग दो दशक पूर्व उस समय खासा चर्चा में आया था, जब गोरखपुरिया इस माफियाई मानसिकता वाले डॉन ने तत्कालीन भाजपाई मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी ली थी. यह मामला खासा चर्चा में आने के बाद सरकार ने आनन-फानन में एसटीएफ का गठन किया था और फिर 23 सितंबर 1998 को दिल्ली के करीब गाज़ियाबाद में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया.

माटी को किया प्रणाम


आनन-फानन में एसटीएफ का गठन किया गया. एसटीएफ ने उसका मोबाइल ट्रेस कर गाजियाबाद में उसे 22 सितंबर 1998 को मुठभेड़ में मार गिराया. श्रीप्रकाश पर कई फिल्‍में भी बनीं. वहीं भोजपुरी स्टार रवि किशन के इस गांव से जुड़ने के बाद ‘मामखोर’ एक बार 2019 लोकसभा चुनाव में सुर्खियों में आ गया हैं.

कौन था श्रीप्रकाश शुक्ला

श्रीप्रकाश शुक्ला का जन्म गोरखपुर के ममखोर गांव में हुआ था. उसके पिता एक स्कूल में शिक्षक थे. वह अपने गांव का मशहूर पहलवान हुआ करता था. साल 1993 में श्रीप्रकाश शुक्ला ने उसकी बहन को देखकर सीटी बजाने वाले राकेश तिवारी नामक एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी. 20 साल के युवक श्रीप्रकाश के जीवन का यह पहला जुर्म था. इसके बाद उसने पलट कर नहीं देखा और वो जरायम की दुनिया में आगे बढ़ता चला गया.


श्रीप्रकाश को पकड़ने के लिए बनी एसटीएफ

श्रीप्रकाश के ताबड़तोड़ अपराध सरकार और पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके थे. सरकार ने उसके खात्मे का मन बना लिया था. लखनऊ सचिवालय में यूपी के मुख्‍यमंत्री, गृहमंत्री और डीजीपी की एक बैठक हुई. इसमें अपराधियों से निपटने के लिए स्‍पेशल फोर्स बनाने की योजना तैयार हुई. 4 मई 1998 को यूपी पुलिस के तत्‍कालीन एडीजी अजयराज शर्मा ने राज्य पुलिस के बेहतरीन 50 जवानों को छांट कर स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) बनाई. इस फोर्स का पहला टास्क था- श्रीप्रकाश शुक्ला, जिंदा या मुर्दा.


डाॅन पर बनी फिल्म


श्रीप्रकाश शुक्‍ला के नाम पर कई फिल्में भी बनीं. इनमें सहर का नाम प्रमुख है. वहीं हाल ही में आई वेब सीरीज ‘रंगबाज’ को भी उसी की कहानी से प्रेरित माना गया. फिल्म में साकिब सलीम ने गैंगस्टर शिव प्रकाश शुक्ला का रोल किया.


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