दो प्रोफेसर के खिलाफ SC/ST एक्ट लगने पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी का माहौल गरमाया

दरअसल 20 सितम्बर को दर्शनशास्त्र विभाग के शोध छात्र दीपक कुमार ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की. दीपक ने कला संकाय अध्यक्ष प्रो सीपी श्रीवास्तव और पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो द्वारिकानाथ श्रीवास्तव पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर कुलपति प्रो वीके सिंह को शिकायती पत्र दिया था.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 25, 2018, 12:43 PM IST
दो प्रोफेसर के खिलाफ SC/ST एक्ट लगने पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी का माहौल गरमाया
गोरखपुर यूनिवर्सिटी की फाइल फोटो
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Updated: September 25, 2018, 12:43 PM IST
गोरखपुर विश्वविद्यालय में दलित उत्पीड़न के मुद्दे को लेकर माहौल गरमाने लगा है. सोमवार को जहर खाकर ख़ुदकुशी की कोशिश करने वाले दलित शोध छात्र दीपक की तहरीर पर दो प्रोफेसर के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज किया गया है. जिसके बाद शिक्षक संघ और दलित छात्र समर्थित संगठन आमने सामने आ गए हैं.

दरअसल 20 सितम्बर को दर्शनशास्त्र विभाग के शोध छात्र दीपक कुमार ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की. दीपक ने कला संकाय अध्यक्ष प्रो सीपी श्रीवास्तव और पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो द्वारिकानाथ श्रीवास्तव पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर कुलपति प्रो वीके सिंह को शिकायती पत्र दिया था. जिसके बाद कैंट पुलिस ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की. जांच के बाद पुलिस ने डीन और पूर्व विभागाध्यक्ष के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज किया है.

एससी-एसटी एक्ट में दो प्रोफेसर के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद शिक्षक संघ आंदोलन की तैयारी में है. उधर आत्महत्या की कोशिश करने वाले शोध छात्र दीपक के समर्थन में कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलनरत छात्रों ने भी संघर्ष की रणनीति बनाई है.

इस संदर्भ में सोमवार को शिक्षक संघ की बैठक भी हुई. इस बैठक में शोध छात्र की ओर से अपने ही दो प्रोफेसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए दी गई तहरीर पर गहरा रोष व्यक्त किया गया. शिक्षक संघ की बैठक में अध्यक्ष प्रो विनोद कुमार सिंह को अधिकृत करने का प्रस्ताव पारित किया गया. उन्होंने कहा कि दो प्रोफेसरों पर दबाव बनाकर मुकदमा दर्ज किया गया है. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.

क्या है शिक्षक संघ की मांग?

शिक्षक संघ की मांग है कि विश्वविद्यालय समिति की रिपोर्ट आने तक प्रशासन कर्र्वाये न करे. इसके अलावा विश्वविद्यालय जांच समिति से कहकर अविलंब रिपोर्ट मांगे. प्रो द्वारिका को तत्काल विभागाध्यक्ष पद पर बहाल किया जाए. इस मामले में बाहरी संगठनों के हस्तक्षेप को रोका जाए.

क्या है दलित छात्र समर्थकों की मांग?
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वहीं दलित छात्र समर्थकों की मांग है कि प्रो द्वारिकानाथ श्रीवास्तव व प्रो सीपी श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उन्हें एससी-एसटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया जाए. जांच समिति में विश्वविद्यालय के बाहर के अरक्षित वर्ग के एक व्यक्ति को शामिल किया जाए.

क्या हुई है कार्रवाई?

अब तक इस मामले में कुलपति ने प्रो द्वारिका को उनके पद से हटा दिया है. उनकी जगह प्रो हिमांशु चतुर्वेदी को विभागाध्यक्ष का प्रभार दिया गया है. साथ ही कुलपति ने प्रो एसके दीक्षित की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित कर दी है. समिति में प्रो चंद्रशेखर और प्रो प्रदीप कुमार यादव सदस्य नामित किए गए हैं.

शोध छात्र ने आंदोलन से खुद को किया अलग

वहीं मामले में शोध छात्र दीपक कुमार ने कुलपति को प लिखकर किसी भी विद्यार्थी संगठन या राजनीतिक एवं सामाजिक दल के आंदोलन व तोड़फोड़ से खुद को अलग किया है. 24 सितम्बर को लिखे गए पात्र में दीपक ने कहा है कि अगर कोई हंगामा होता है तो मेरी जिम्मेदारी नहीं है. मेरे इस थिति के लिए मेरे शोध निदेशक की कोई भूमिका नहीं है. मैं जिम्मेदार छात्र हूं और स्वस्थ होकर पढ़ना चाहता हूं. मेरे खिलाफ उत्पीड़न के मामले में कार्रवाई की उम्मीद रखता हूं.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, झंगहा के राधेपट्टी निवासी दीपक ने विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में एक सितंबर को शोध में पंजीयन कराया था. उसके मुताबिक शोध सुपरवाइजर प्रो डीएन यादव को चुनने से डीन कला संकाय व विभागाध्यक्ष नाराज थे. आये दिन दुर्व्यवहार और जातीय टिप्पणी करते थे. 20 सितंबर को दीपक ने जहर खाकर ख़ुदकुशी की कोशिश की. उसका इलाज मेडिकल कॉलेज में हुआ. ख़ुदकुशी से पहले दीपक ने मोबाइल से वीडियो बनाया और दोनों प्रोफेसर पर आरोप लगाया.

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दो प्रोफेसर के खिलाफ SC/ST एक्ट लगने पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी का माहौल गरमाया
First published: September 25, 2018, 11:48 AM IST
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