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गोरखपुर विश्वविद्यालय के हॉस्टल खाली कराने के विरोध में छात्रों का अर्धनग्न प्रदर्शन

प्रदर्शन करते छात्र.
प्रदर्शन करते छात्र.

गोरखपुर विश्वविद्यालय (Gorakhpur University) के बुद्धा छात्रावास में रहने वाले छात्रों का प्रदर्शन आज सवेरे से शांतिपूर्ण ढंग से कुलपति के प्रशासकीय भवन के सामने हो रहा है.

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गोरखपुर. गोरखपुर विश्वविद्यालय (Gorakhpur University) के हॉस्टल के छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया है. दरअसल कुलपति द्वारा छात्रावास (Hostel) खाली कराये जाने के फरमान के खिलाफ छात्र आंदोलन पर उतर आये हैं. कुलपति के फरमान के विरोध में आक्रोशित हॉस्टल के दर्जनों छात्र कुलपति (Vice chancellor) आवास के बाहर धरने पर बैठ गये हैं. दिलचस्प है कि छात्र भीषण ठंड के इस मौसम में अर्धनग्न प्रदर्शन (Protest) कर रहे हैं.

वहीं हैरानी की बात यह है कि जानकारी के बावजूद कुलपति महोदय धरने पर बैठे छात्रों से बातचीत को तैयार नहीं हैं, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बनी हुई है. हालांकि, मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ कैंट पहुंचकर धरने पर बैठे छात्रों को समझाने में जुटे हैं. लेकिन छात्रों बगैर किसी ठोस आश्वसन के धरना समाप्त नहीं करने पर अड़े हुये हैं. मामला कैंट थाना के कचहरी बस स्टैंड के पास स्थित कुलपति आवास का है. जहां कुलपति द्वारा छात्रावास खाली कराये जाने के फैसले के खिलाफ छात्रावासी धरने पर बैठ गये हैं. कुलपति की मांग के विरोध में छात्र अर्धनग्न प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगों पर अड़े हैं. छात्रनेता आलोक सिंह का कहना है कि ठंड के मौसम में कोरोना का हवाला देकर कुलपति द्वारा जबरन छात्रावास खाली कराये जाने का फरमान तुगलकी है. जबकि प्रतियोगी परीक्षा के साथ ही विश्वविद्यालय की परीक्षा निकट है. जिसकी वजह से छात्रावास में रहने वाले छात्रों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.

पुलिस अमला आक्रोशित छात्रों को समझाने में जुटा है
गौरतलब है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के बुद्धा छात्रावास में रहने वाले छात्रों का प्रदर्शन आज सवेरे से शांतिपूर्ण ढंग से कुलपति के प्रशासकीय भवन के सामने हो रहा था. लेकिन कुलपति के द्वारा छात्रों की मांग न मानने पर छात्र नेताओं ने छात्रों के साथ कुलपति आवास को घेर लिया. और देर शाम इस भीषण ठंड में छात्रों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. छात्रों की मांग है कि कुलपति छात्रावास खाली कराने के आदेश को तत्काल वापस लेना चाहिए. इसके साथ ही छात्रों का कहना है कि मध्य सत्र के दौरान छात्रों को छात्रावास से बाहर निकालना तुगलकी फरमान के जैसा है. छात्रों ने यह भी बताया कि छात्रावास में जम्मू-कश्मीर उत्तराखंड और बिहार के बहुत सारे ऐसे छात्र हैं जो बहुत ही गरीब हैं और वह बाहर किसी भी रूम का खर्च नहीं वाहन कर सकते हैं. वहीं, छात्रों के समर्थन में छात्रों का कई सियासी गुट भी उतर आया है. फिलहाल प्रशासनिक और पुलिस अमला आक्रोशित छात्रों को समझाने में जुटा है.
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