अयोध्या में ध्यानमग्न CM योगी को सुनाई दी थीं आवाजें, क्या है उन आवाजों का रहस्य? खुद CM ने किया खुलासा...

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में नाथ संप्रदाय पर आधारित तीन दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन किया. (File)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में नाथ संप्रदाय पर आधारित तीन दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन किया. (File)

गोरखपुर में पंडित दीन दयाल विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार “नाथ पंथ के वैश्विक प्रदेय” का उद्धाटन CM योगी आदित्यनाथ ने किया. उन्होंने कहा कि नाथ पंथ का सर्वोच्च केन्द्र होने के नाते गोरखपुर विवि भारत के इस धार्मिक और अध्यात्मिक प्रस्तुत करने में अपना योगदान दे सके.

  • Last Updated: March 20, 2021, 11:16 PM IST
  • Share this:
गोरखपुर. पंडित दीनदयाल विश्वविद्यालय गोरखपुर में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार 'नाथ पंथ के वैश्विक प्रदेय' पर बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नाथ पंथ का सर्वोच्च केन्द्र होने के नाते गोरखपुर विवि भारत के इस धार्मिक और अध्यात्मिक प्रस्तुत करने में अपना योगदान दे सके. सीएम ने कहा कि कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने परम्परा को भूल कर लक्ष्य नहीं प्राप्त कर सकता है.

CM योगी आदित्यनाथ ने अपने साथ एक घटित हुई एक घटना सुनाई, उन्होंने बताया कि 'दीपोत्सव के दौरान मैं अयोध्या में था ब्रह्म मुहूर्त में मैं बैठा हुआ था. मैं ध्यान में लीन बैठा था, तभी ऐसा लगा जैसे मुझे कोई पुकार रहा है. अचानक मेरे कानों में कुछ आवाज गूंज रही थी. आवाज में कहा गया कि आदित्यनाथ जी थोड़ा हमारा भी ध्यान रख लीजिए. बाद में मैने अनुभव किया तो मेरे सामने कुछ दृश्य हिमालय के आ रहे थे. तब मैने सोचा हिमालय में कोई बात जरूर हो रही है. दीपावली पर मैं गोरखपुर आ गया और फिर यहीं से मैने उत्तराखंड के सीएम से बात की और पूछा कि बदरीनाथ और केदारनाथ के कपाट कब बंद हो रहे हैं. तब उन्होने बताया तो उसके बाद मैंने अपना कार्यक्रम बनाया और मैं केदारनाथ पहुंच गया.'

आदिनाथ भगवान शिव से प्रारंभ होती है ये परम्परा 

CM योगी ने आगे बताया कि 'वहां पर भारी बर्फबारी हो रही थी. 24 घंटे बाद हम लोग बदरीनाथ गये. दर्शन के बाद जब मैं मंदिर के पीछे गया तो मुझे वो दृष्य याद आने लगा जो मैंने दो दिन पहले अयोध्या में देखा था. तभी मंदिर के ठीक पीछे मुझे एक चित्र दिखाई दिया. जो मुझे दिखाई दिया था. जब मैंने मंदिर से जुड़े लोगों से पूछा कि ये चित्र किसकी है तो मुझे बताया गया कि ये योगी सुन्दरनाथ जी के चित्र हैं. मैंने कहा कि सुन्दरनाथ जी ने ही हमे बुला रहे थे. जब मैंने पूछा तो पता चला वहां पर सुन्दरनाथ जी का गुफा मौजूद. तब मुझे लगा कि सुन्दरनाथ जी ही हमें बुला रहे थे. एक सिद्ध सम्प्रदाय है. नाथ पंथ की ये परम्परा आदिनाथ भगवान शिव से प्रारंभ होती है और 9 नाथ 84 सिद्धों को लेकर परम्परा आगे बढ़ती है, तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में नाथ संप्रदाय से जुड़े हुए मठ मंदिर धुना गुफा देखने को मिलेंगे. ये परम्परा बहुत ही समृद्ध परमपरा है. नाथ पंथ ने प्रत्यक्ष अनुभूति को जीवन का आधार बनाया.
नाथ सम्प्रदाय के सिद्ध योगी हैं सुंदरनाथ जी

नाथ सम्प्रदाय के बहुत सिद्ध योगी हैं तो मैंने कहा ये सुन्दरनाथ जी ही मुझे यहां बुला रहे थे कि हम लोगो के बारे में भी कुछ सोचिए. फिर मैंने वहां के जिलाधिकारी से बात की, जो गोरखपुर की ही लड़की है. मैंने कहा कि तब तो यहां सुन्दरनाथ जी की गुफा भी होगी. उसने कहा कि है जरूर, लेकिन बर्फ गिर चुकी है. सब कुछ बर्फ से ढंक चुका है. फिर भी मैं 2,3 दिन में उस जगह को ढूंढकर ,उस स्थान के बारे में आपको जानकारी देती हूं. खैर दो दिन बाद वहां की जिलाधिकारी ने मुझे वहां के कुछ फोटोग्राफ वगैरह भेजे. फिर मेरे सामने वो सारे तथ्य सामने आए की वास्तव में योगी सुन्दरनाथ जी ही मेरा आह्वाहन कर रहे थे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज