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प्रतिभा के दम पर बनी एक दिन के लिए ब्रिटिश हाई कमिश्नर, परिवार और प्रदेश का किया नाम रौशन

News18India
Updated: October 11, 2019, 10:40 AM IST
प्रतिभा के दम पर बनी एक दिन के लिए ब्रिटिश हाई कमिश्नर, परिवार और प्रदेश का किया नाम रौशन
आयशा खान. (फोटो ब्रटिश हाई कमिश्नर)

आयशा खान (Ayesha Khan) को राजनयिक की जिम्मेदारी संभालने का मौका तब मिला जब उसने 'एक दिन का उच्चायुक्त' प्रतियोगिता जीती. इस प्रतियोगिता (Contest) का आयोजन 11 अक्टूबर को 'अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस' के मौके पर किया गया. जिसमें 18-23 साल की भारतीय महिलाएं (Indian women) हिस्सा ले सकती थीं.

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नई दिल्ली. ब्रिटिश उच्चायुक्त (British High Commissioner) के पद पर काम करना अपने आप में गौरव की बात होती है. राजयनिक स्तर पर इसे बड़ी जिम्मेदारी का काम माना जाता है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur) की रहने वाली 22 वर्षीय आयशा खान को उसकी काबिलियत की वजह से ब्रिटिश दूतावास (British Embassy) में एक दिन के लिए उच्चायुक्त (High Commissioner) बनने का मौका मिला है.

प्रतियोगिता में अव्वल रहने पर मिला मौका

एक दिन के लिए उच्चायुक्त बनने के लिए आयोजित प्रतियोगिता में आयशा ज्यादा अंकों के साथ आगे रही. इस प्रतियोगिता (Contest) का आयोजन 11 अक्टूबर को 'अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस' के मौके पर किया गया. जिसमें 18-23 साल की भारतीय महिलाएं (Indian Women) हिस्सा ले सकती थीं. ब्रिटिश उच्चायोग ने अपने बयान में कहा कि आयशा ने हाई कमिश्नर के रूप में चार अक्टूबर को पूरा दिन ब्रिटेन के सबसे बड़े विदेशी नेटवर्क का कामकाज देखा, अलग-अलग सत्रों की अध्यक्षता की, गणमान्य लोगों के साथ बैठक की. साथ ही परियोजनाओं के लाभार्थियों के साथ भी बातचीत की.

आयशा ऐसे बनीं एक दिन की उच्चायुक्त

बता दें कि 'एक दिन का उच्चायुक्त' प्रतियोगिता का यह तीसरा साल था. इसमें हिस्सा लेने वाले को एक मिनट का वीडियो रिकॉर्ड करना होता है कि लैंगिक समानता क्यों जरूरी है और लैंगिक समानता के लिए अपने सबसे बड़े प्रेरणास्रोत के तौर पर वो किसे देखती हैं?

आयशा खान ने कही थी ये बात
प्रतियोगी के रूप में आयशा खान ने कहा था, 'मेरा मानना है कि शिक्षा एक शक्तिशाली माध्यम है जो लैंगिक समानता हासिल करने में मदद कर सकती है.' ब्रिटिश हाई कमिश्नर के रूप में एक दिन जिम्मेदारी संभालने पर आयशा ने कहा कि मेरा एक दिन का कार्यकाल काफी व्यस्तताओं से भरा रहा. मुझे काफी कुछ सीखने को मिला. इस जिम्मेदारी को निभाने के दौरान आयशा ने दिल्ली के पीतमपुरा स्थित एपीजे स्कूल का दौरा किया. साथ ही वो दिल्ली में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं से भी मिलीं.
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First published: October 11, 2019, 10:01 AM IST
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