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गोरखपुर: प्राइमरी स्कूल में शवयात्रा के बीच पढ़ने को मजबूर छात्र, भय से कई ने छोड़ा विद्यालय आना

Anil kumar singh | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 30, 2019, 3:30 PM IST
गोरखपुर: प्राइमरी स्कूल में शवयात्रा के बीच पढ़ने को मजबूर छात्र, भय से कई ने छोड़ा विद्यालय आना
छात्रों के सामने ही जनाजे रखकर लोग पढ़ते हैं नमाज

दरअसल, गांव में किसी की भी मौत होने के बाद जबरन लोग शव लेकर स्कूल कैंपस में घुस जाते हैं. इस दौरान बच्चों को उनके कमरों में ही बंद कर दिया जाता है.

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गोरखपुर. सरकारी स्कूलों (Government Schools) में किसी भी तरह के कार्यक्रमों के आयोजन पर पूरी तरह से रोक है, लेकिन हम आपको गोरखपुर (Gorakhpur) के एक ऐसे प्राथमिक विद्यालय (Primary School) से रूबरू कराने जा रहे हैं, जहां क्लास के सामने शव रखकर जनाजे की नमाज पढ़ी जाती है. इतना ही नहीं हिंदू भी अंतिम संस्कार के बाद कर्म-कांड और पूजा-पाठ के लिए स्कूल परिसर में लगे पीपल के पेड़ पर पहुंचते हैं. दरअसल, गांव में किसी की भी मौत होने के बाद लोग जबरन उसका शव लेकर स्कूल कैंपस में घुस जाते हैं. इस दौरान बच्चों को स्कूल के कमरों में बंद कर दिया जाता है. वहीं डेड बॉडी को देखकर छात्र भयभीत रहते हैं और वो स्कूल आने से भी कतराते हैं.

जबरन स्कूल में जनाजा लेकर पहुंचते हैं लोग

गोरखपुर के बड़गो प्राथमिक विद्यालय में आने वाले बच्चे अक्सर डरे और सहमे नजर आते हैं. कहने को इस विद्यालय में सभी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद छात्रों का मन पूरी तरह से पढ़ाई में नहीं लगता. इसके पीछे की वजह जानकर आप हैरान रह जाएंगे. दरअसल इस गांव में जब कभी किसी मुस्लिम व्यक्ति की मौत होती है तो गांव के सैकड़ों की संख्या में लोग डेड बॉडी को लेकर जबरन इस स्कूल में घुस आते हैं और बच्चों के सामने ही शव रखकर नमाज पढ़ते हैं. सीसीटीवी में कैद यह तस्वीरें दर्शाती हैं कि किस तरह से लोग क्लासरूम के बाहर शव रखकर नमाज पढ़ते हैं.

बच्चों को क्लास में कर दिया जाता है बंद

सामने पड़े शव को देखकर विद्यालय आने वाले छोटे-छोटे बच्चे दहशत से भर जाते हैं. जब तक शव को रखकर लोग नमाज पढ़ते हैं, तब तक छात्रों को उनके कमरे में ही बंद कर दिया जाता है और नमाज के बाद जब लोग चले जाते हैं तो ही उन्हें क्लासरूम से बाहर निकाला जाता है. आए दिन इस तरह की घटनाओं की वजह से धीरे-धीरे बच्चे स्कूल आना बंद कर रहे हैं. स्कूल में पढ़ने वाले चंद्रशेखर ने बताया कि बुधवार को भी एक डेड बॉडी आई थी. जिसके बाद हम लोग डर के मारे क्लास में बंद हो गए. ऐसा अक्सर होता है. जब भी किसी की मौत होती है तो वो उसके शव को लेकर यहीं आते हैं. छात्र ने बताया कि इस दौरान कोई भी छात्र बाहर नहीं निकलता. उसने बताया कि ऐसा करने से उन्हें कोई रोकता भी नहीं.

school dead body
विद्यालय परिसर में शव लाए जाने के दौरान बच्चे भय के मारे क्लासरूम में बंद रहते हैं


हिंदू-मुस्लिम दोनों ही परिसर का करते हैं इस्तेमाल
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मामले में स्कूल के प्रधानाध्यापक (प्रिंसिपल) राजेश दुबे ने कहा कि गांव में चाहे किसी हिंदू या मुस्लिम की मौत हो, हर कोई उनके शव को लेकर यहां आता है. जब किसी हिंदू समुदाय के व्यक्ति मृत्यु होती है तो कर्मकांड के लिए विद्यालय परिसर के पीपल के पेड़ का इस्तेमाल किया जाता है. इतना ही नहीं मुस्लिम की मौत होने पर उसके जनाजे को लेकर यहीं आया जाता है और फिर लोग नमाज अदा करते हैं. राजेश दुबे कहते हैं वो यहां अगस्त 2018 में आए थे. जब उन्होंने देखा तो इसका विरोध करना चाहा. वो कहते हैं इसकी शिकायत ग्राम प्रधान से की गई. जिस पर ग्राम प्रधान ने कहा कि यह सदियों से हो रहा है. लिहाजा इसे रोकने पर विवाद होगा. अब जब भी कोई जनाजा आता है तो बच्चों को क्लासरूम में बंद कर दिया जाता है. लेकिन जनाजे के आने से बच्चों में डर पैदा होता है और दूसरे दिन 40-50 फीसदी बच्चों की उपस्थिति कम हो जाती है.

gorakhpur school dead body
हिंदू भी स्कूल परिसर में ही करते हैं कर्मकांड


इसके अलावा कैंपस में स्थित पीपल के पेड़ पर हिंदू अंतिम संस्कार के बाद कर्मकांड के लिए लोग आते रहते हैं. ऐसा नहीं है कि यहां के अध्यापक इसको रोकने का प्रयास नहीं करते, लेकिन इनको डर इस बात का है कि विरोध करने पर लोग लड़ने को तैयार हो जाते हैं. ऐसे में ये लोग चुप रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं. हैरानी की बात यह है कि इस मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी को भी यहां के अध्यापकों ने कई बार पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया.



सदियों से चली आ रही है परंपरा

स्थानीय लोगों का मानना है कि पहले जब स्कूल की बाउंड्री नहीं थी तो यह पूरा इलाका खाली मैदान हुआ करता था और लोग यहां आकर जनाजे का नमाज पढ़ते थे. लेकिन स्कूल का बाउंड्री बन जाने के बाद भी इस प्रथा पर रोक नहीं लग पाई है. वहीं इस बारे में बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह का कहना है कि विद्यालय परिसर का किसी भी तरह का प्रयोग गलत है. वो जल्द ही इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेंगे और इस परंपरा को बंद कराएंगे.

निश्चित तौर पर सरकारी स्कूलों के किसी भी तरह के इस्तेमाल पर रोक के बाद भी यहां लोग जबरन घुसते हैं और इसकी वजह से यहां पढ़ने वाले बच्चे डरे-सहमे रहते हैं. हालांकि अधिकारियों ने भले ही इसे बंद कराने का आश्वासन दिया हो लेकिन पिछले कई वर्षों से चली आ रही यह परंपरा इतनी आसानी से बंद हो जाएगी ऐसा लगता नहीं है.

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First published: November 30, 2019, 12:48 PM IST
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