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...जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पड़ी थी उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ की डांट

Ram Gopal Dwivedi | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 10, 2020, 5:57 PM IST
...जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पड़ी थी उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ की डांट
अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ को याद कर भावुक हुए सीएम योगी आदित्यनाथ

सीएम योगी ने कहा कि जब महंत अवैद्यनाथ 17 साल के रहे होंगे तब उन्होंने पैतृक गांव जाकर वहां की अपनी संपत्ति अपने पाटीदारों के नाम कर दी.

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गोरखपुर. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ के बारे में बताते हुए भावुक हो गए. उन्होंने बताया कि किस तरह से बड़े महाराज (अवैद्यनाथ) ने उन्हें एक बार डांटा था. सीएम योगी ने महंत अवैद्यनाथ के बारे में बताते हुए कहा, "1995 में एक बार कुछ श्रद्धालुओं ने शिकायत की कि मंदिर से जूते-चप्पल चोरी हो रहे हैं. जिस पर मैंने जूता-चप्पल रखने की निशुल्क व्यवस्था के साथ कुछ गार्ड लगा दिए. एक दिन मैं निकल रहा था तब देखा कि गार्ड ने तीन बच्चों को पकड़ रखा था. मैं वहां पहुंचा तो पता चला यही बच्चे यहां से चोरी करते हैं. मैंने उन बच्चों को वहां से खदेड़ दिया. वो बच्चे बाहर गए और फिर दूसरे गेट से आकर मंदिर के भंडारे के पंगत में बैठ गए, इसी दौरान निरीक्षण करते हुए मैं वहां भी पहुंच गया तो उन्हें देखकर मैंने भगा दिया."

पंगत से बच्चों को भगाने पर पड़ी थी डांट
सीएम योगी ने कहा, "बच्चों को वहां से भगाते हुए गुरु जी ने ऊपर छत से मुझे देख लिया. फिर मुझे बुलाकर पूछा कि बच्चों को  क्यों बाहर कर दिया. तब मैंने कहा कि यही वो बच्चे हैं, जो जूते-चप्पल चुराते हैं. तब उन्होंने कहा कि जूते-चप्पल की चोरी न हो इसके लिए व्यवस्था करना तुम्हारी और मेरी जिम्मेदारी है. पर खाने की पंगत से किसी को उठाना नहीं चाहिए. तुम जाओ और उन बच्चों को खाना खिलाओ."

सीएम योगी ने कहा, "तब मैंने बात को टालने के मकसद से कहा कि वो मुस्लिम बच्चे हैं, चोरी करते हैं, तब गुरुजी ने मुझे डांटते हुए कहा यह गोरक्षनाथ जी का प्रसाद है. यह उनके आशीर्वाद से प्राप्त होता है. इसे कोई भी ले सकता है, उसके बाद मैं गया और कुछ लोगों को भेजकर उन बच्चों को बुलाकर खाना खिलाया."


सीएम योगी ने कहा कि उनके द्वारा मत मजहब के भेद को भी समाप्त किया गया. गोरखनाथ मंदिर के भंडारे में कोई भी आकर पंगत में बैठकर भोजन प्राप्त कर सकता है.

महंत अवैद्यनाथ को लेकर कई स्मरण सुनाए
दिग्विजयनाथ एलटी प्रशिक्षण महाविद्यालय में "भारतीय संस्कृत के सांस्कृतिक मूल्य: महंत अवैद्यनाथ" विषय पर आयोजित संगोष्ठी में सीएम योगी ने कहा कि भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्य ही उसके सांस्कृतिक मूल्य हैं. सत्य एक है, उसे प्राप्त करने के रास्ते भले अलग-अलग हो सकते हैं. इसी विशेषता के कारण अनेक झंझावतों को झेलते हुए भारतीय संस्कृति आज भी दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए सीना ताने खड़ी है. भारतीय संस्कृति की विशेषता अनेकता में एकता के पीछे का उद्देश्य भी यही है. महंत अवैद्यनाथ ने सनातन हिंदू धर्म के ऋण के लिए कुछ अलग करने की ठानी थी. सम्पत्ति के विवाद में खूनी संघर्ष होते हैं, लेकिन महंत अवैद्यनाथ जी ने शुरू से ही लोक कल्याण के लिए अपनी पैतृक संपत्ति छोड़ दी.राम आंदोलन का भी नेतृत्व किया
सीएम योगी ने कहा कि जब महंत अवैद्यनाथ 17 साल के रहे होंगे तब उन्होंने अपने पैतृक गांव में जाकर वहां की अपनी संपत्ति अपने पाटीदारों के नाम कर दी, इस पर तहसीलदार ने उनसे पूछा कि इतनी कम उम्र में ऐसा न करें तो उन्होंने कहा कि मुझे धन का लालच न रहे, इसलिए मैं ये कर रहा हूं. भारत में कहा जाता है कि पंथ, मत मजहब के विवाद होते हैं लेकिन उनके मन में इसको लेकर अलग धारणा थी. राम जन्मभूमि आंदोलन उनके नेतृत्व में आगे बढ़ा, जबकि नाथ सम्प्रदाय, शैव परंपरा को मानने वाला है और राम मंदिर आंदोलन वैष्णव परंपरा के रमानंदी से जुड़ा था. फिर भी जब मंदिर आंदोलन के नेतृत्व की बात आयी तब देशभर के साधु संतों ने एक मत में महंथ अवैद्यनाथ के नेतृत्व में आंदोलन चलाने की बात कही.

सीएम योगी ने कहा कि एक बार एक शंकराचार्य ने महिलाओं और दलितों को वेदों के पढ़ने पर पांबदी लगाने की मांग की तब सबसे पहले महंथ अवैद्यनाथ ने उनका विरोध करते हुए कहा कि भारत में वेदों की सर्वाधिक ऋचाएं उन ऋषियों ने रची हैं, जो समाज के अंतिम पायदान के थे. ऐसे में उनसे भेदभाव क्यों. महिलाओं और दलितों को भी वेद पढ़ने के लिए उन्होंने प्रोत्साहित किया.

सीएम योगी ने अपने गुरु के बारे में बताते हुए कहा, "प्रदेश और देश में जब जगह-जगह विस्फोट होने लगे तो मैंने महंत अवैद्यनाथ की सुरक्षा का प्रबंध किया, सुरक्षा व्यवस्था सख्त की तब भी वो नाराज होते थे. जब वो बीमार हुए तब भी मैं उनको लोगों से मिलने से रोकता था. तब भी वो नाराज होते थे." सीएम ने कहा कि गुरु जी जब बीमार थे तब मैं इंफेक्सन के डर से उनसे लोगों से कम मिलने देता था. साथ ही बहुत से ऐसे लोग उनसे मिलने आते थे जो आते ही उनकी बीमारी के बारे में बात करते और उन्हें कोई दवा रूपी पोटली दे जाते थे. एक बार मैंने उनसे पूछा कि जब आपकी दवा डॉक्टर कर रहे हैं तब फिर आप ये सब क्यों लेते हैं तो उन्होंने कहा कि लोगों की भावना होती है वो लाकर दे जाते हैं, मैं किसी की भावना को आहत नहीं कर सकता हूं.

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First published: February 10, 2020, 4:15 PM IST
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