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सीएम योगी ने बदली इस गांव की तस्वीर, वनटांगिया महिलाओं ने किया रैंप वॉक

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 12, 2019, 1:41 PM IST
सीएम योगी ने बदली इस गांव की तस्वीर, वनटांगिया महिलाओं ने किया रैंप वॉक
वनटांगिया महिलाओं ने किया रैंप वॉक

इंस्टीट्यूट की चेयर पर्सन सोनिका सिंह ने बताया कि वनटांगियां महिलाओं को रैंप पर कैटवाक कराने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी. रैंप पर उतरने के दौरान महिलाएं असहज महसूस न करें, इसके लिए उनकी हेयर स्टाइल, मेकअप और कपड़ों में परंपरा का पूरा ध्यान रखा गया.

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गोरखपुर. देश को आजादी भले ही 1947 में मिली थी, लेकिन जंगलों के बीच निवास करने वाले वनटांगियां लोगों को असली आजादी योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही मिली. इसी क्रम में सोमवार शाम जंगलों में जीवन गुजराने को मजबूर वनटांगियां महिलाओं ने फैशन-शो के रैंप पर कैटवाक किया. गांव के विकास के साथ यहां के महिलाओं के आत्मविश्वास का विकास किया जा रहा है, उन्हें यह अवसर दिया था पूर्वी महोत्सव के मंच पर यामिनी कल्चरल इंस्टीट्यूट इंटरटेनमेंट ने. पहले थोड़ी झिझक, लेकिन बाद में आत्मविश्वास दिखाकर वनटांगियां महिलाओं ने मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया.

कैटवाक के लिए 15 महिलाओं दी गई थी ट्रेनिंग
समाज की मुख्यधारा में शामिल हो चुके वनटांगिए अब आधुनिकता की दौड़ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार हैं. इसकी बानगी इंटरनेशनल देलही पब्लिक स्कूल, कुसम्ही के प्रांगण में आयोजित पूर्वी महोत्सव में देखने को मिली. इसके लिए उन्हें बकायदा ट्रेनिंग दी गई.

इंस्टीट्यूट की चेयर पर्सन सोनिका सिंह ने बताया कि वनटांगियां महिलाओं को रैंप पर कैटवाक कराने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी. रैंप पर उतरने के दौरान महिलाएं असहज महसूस न करें, इसके लिए उनकी हेयर स्टाइल, मेकअप और कपड़ों में परंपरा का पूरा ध्यान रखा गया. कैटवाक के लिए 15 महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई थी.

सीएम योगी ने बदली इस गांव की तस्वीर
सीएम योगी ने बदली इस गांव की तस्वीर


क्या कुछ बदला वनटांगिया गांवों में

अंग्रेजों ने जंगल लगाने के लिए कुछ लोगों को जंगल के बीच में ही बसा दिया था. इन लोगों का काम था जंगल में पेड़ लगाना और उसे बड़ा करना और वहीं पर किसी तरह से जीवनयापन करना. देश जब आजाद हुआ तब भी इन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पायीं, क्योंकि ये जिस स्थान पर निवास करते थे वो वन विभाग के कानून के अंदर आता था. यानि वो वहां पर किसी तरह का कोई निर्माण नहीं करा सकते थे. रहने के लिए इनके पास चार बाई चार की झोपड़ी रहती थी. जंगलों के बीच से कच्चा रास्ता, बिजली पहुंची नहीं, बच्चों के पढ़ने की कोई सुविधा नहीं थी.
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First published: November 12, 2019, 1:40 PM IST
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