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गौतमबुद्ध नगर:दादरी क्षेत्र में दलित परिवारों में शिक्षा की अलख जगा रही है समता पाठशाला

 दादरी

 दादरी में शिक्षा देने वाली युवाओं की टीम

दादरी को सिर्फ अखलाक हत्या के लिए जाना जाता है लकी यहां के गांव ऊंचा अमीरपुर में 11 छात्र- छात्राओं की टीम बच्चों को शिक्षित करने में बड़ी शिद्दत से जुटी हुई है.

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    नोएडा: देश को आजाद हुए सालों बीत जाने के बावजूद भी देश में जाति के नाम पर भेदभाव स्वस्थ समाज के लिए एक दाग की तरह आज भी मौजूद है.आए दिन जाति के नाम पर भेदभाव की सूचना मिलती रहती है. इसे जड़ से मिटाने के लिए सामाजिक स्तर से ही सबकों मिल जुल कर प्रयास करना चाहिए. इसी को ध्यान में रखते हुए जिला गौतमबुद्ध के दादरी क्षेत्र के गांव ऊंचा अमीरपुर में 11 छात्र- छात्राओं का एक समूह बच्चों का स्वावलंबी बनाने की कोशिश में शिक्षा दे रहा है.
    शिक्षा से ही दूर होगी भेदभाव की बीमारी 
    नोएडा की चौंका-चौंध से 40-50 किलोमीटर दूर एक गांव है, ऊंचा अमीरपुर यहां पर 11 छात्र छात्राएं समता पाठशाला नाम से एक स्कूल चलाते हैं, जिसमें गांव के दलित, गरीब और पिछड़े वर्ग के परिवार के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते है. समता पाठशाला की शुरुआत करने वाले सौरभ सिंह आजाद बताते हैं कि जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तो हमारे साथ ऐसे व्यवहार किया गया जो नहीं करना चाहिए था. हमे परेशान किया गया, जाति के नाम पर रंग रूप के नाम पर. इससे देश कमजोर होता है. जब हम बड़े हुए तो हमने अपने मित्रो के साथ मिलकर सोचा कि क्यों न ऐसी पाठशाला बनाई जाए जिसमें सब लोग बराबर के हो किसी तरह का भेदभाव भी ना हो. इसीलिए हमने समता पाठशाला की शुरुआत की. उनका मानना है कि छुआछूत, जाति और भेदभाव एक बीमारी है जिसका शिक्षा के अलावा कोई इलाज नहीं है.
    हमे स्कूल में जाति के नाम से बुलाया जाता था.
    समता पाठशाला में अंग्रेजी पढ़ाने वाली रानी अम्बेडकर खुद ग्रेजुएशन कर रही है लेकिन समता पाठशाला में भी समय देती है. वो बताती है कि जब हम स्कूल जाते थे तो हमे जाति के नाम से बुलाया जाता था. मुझे कोई रानी नहीं कहता था. ये सब मुझे बुरा लगता था. इस समता पाठशाला में किसी की जाति नहीं पूछी जाती है, जो भी बच्चा किताब लेकर पढ़ने आता, हम उसे पढ़ाते हैं. मैने इसी कारण अपना स्कूल तक बदल लिया था. लेकिन इस जातिवाद ने कही पीछा नहीं छोड़ा. लोग समझने लगे हैं धीरे धीरे जाति के नाम पर भेदभाव भी खत्म हो जाएगा.
    पढ़ने में बहुत अच्छा लगता है.
    समता पाठशाला में पढ़ने वाली छात्र पारुल कहती है कि स्कूल में पढ़ाई जरूरी है लेकिन बहुत से प्रश्न ऐसे होते हैं जिसका उत्तर मुश्किल होता है, ऐसे में हमे समता पाठशाला की मदद मिलती है. अभी मैंने दसवी कक्षा पास की है वो भी 75 प्रतिशत नंबर से जिसमें समता पाठशाला के ज्ञान का अहम योगदान रहा है.
    (रिपोर्ट – आदित्य कुमार)

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