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चिल्ला बॉर्डर से किसान नेताओं की हुंकार- 6 जनवरी को लखनऊ कूंच करेंगे किसान

योगी सरकार नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए. ( फाइल फोटो)
योगी सरकार नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए. ( फाइल फोटो)

भारतीय किसान यूनियन (भानु) के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह (Yogesh Pratap Singh) ने ऐलान किया है छह जनवरी को उत्तर प्रदेश में प्रत्येक जिले के किसान ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ रैली निकालें और जिला मुख्यालय का घेराव करें.

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नोएडा. नोएडा (Noida) को दिल्ली से जोड़ने वाली सीमा चिल्ला बॉर्डर (Chilla Border) पर आंदोलनकारी किसानों ने ऐला किया है कि अब वे केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए नए कृषि कानूनों के खिलाफ लखनऊ (Lucknow) कूंच करेंगे. किसान नेताओं की माने तो यदि लखनऊ में प्रवेश करने से रोका गया तो किसान राजधानी के बॉर्डर पर जम जाएंगे, ताकि योगी सरकार नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए.

जाकारी के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन (भानु) के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने ऐलान किया है छह जनवरी को उत्तर प्रदेश में प्रत्येक जिले के किसान ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ रैली निकालें और जिला मुख्यालय का घेराव करें. साथ ही उन्होंने कहा है कि राजधानी के आसपास के जिलों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ लखनऊ पहुंचे. यदि उन्हें राजधानी में प्रवेश करने से रोका जाए तो वे बॉर्डर पर ही बैठ जाएं. दरअसल, आठ जनवरी को सभी किसान अपने-अपने जिलों से ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर दिल्ली कूंच करने को निकलेंगे.

इस विषय पर विचार के लिये समिति गठित करने का सुझाव दिया है
बता दें कि कल सरकार और किसान संगठनों के बीच सातवें दौर की बैठक खत्म हो गई. दोनों पक्षों के बीच तीन घंटे तक चली ये बैठक बेनतीजा रही. अब अगले दौर की बैठक 8 जनवरी को होगी. किसान संगठनों के प्रतिनिधि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर कायम हैं. हालांकि, सरकार की ओर से कहा गया है कि वह कानूनों को वापस नहीं लेगी पर वह संशोधन के लिए तैयार है. सूत्रों ने बताया कि करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद दोनों पक्षों ने भोजनावकाश लिया. उन्होंने बताया कि सरकार इन कानूनों को निरस्त नहीं करने के रूख पर कायम है और समझा जाता है कि उसने इस विषय पर विचार के लिये समिति गठित करने का सुझाव दिया है.
सरकार का हमें संशोधन की ओर ले जाने का इरादा है


बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हम चाहते हैं कि किसान संगठन तीनों कानूनों पर चर्चा करें. हम किसी समाधान तक नहीं पहुंच सकें क्योंकि किसान संगठन कानूनों को निरस्त करने पर अड़े हैं. भारतीय किसान यूनियन के युद्धवीर सिंह ने कहा कि मंत्री चाहते थे कि हम कानून पर बिंदुवार चर्चा करें. हमने इसे खारिज कर दिया और कहा कि चर्चा का कोई मतलब नहीं क्योंकि हम कानूनों को पूरी तरह से खारिज करने की मांग कर रहे हैं. सरकार का हमें संशोधन की ओर ले जाने का इरादा है लेकिन हम इसे नहीं स्वीकारेंगे.
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