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जरूरत होने पर भी Greater Noida में अपना फ्लैट नहीं बेच सकते हजारों लोग, बिल्‍डर्स के आगे मजबूर

नेफोमा का एक डेलीगेशन अपनी मांगों को लेकर सांसद महेश शर्मा से मिला.

Noida News: नोएडा एस्टेट फ्लैट ओनर्स मेन एसोसिएशन (NEFOMA) ने नोएडा (Noida) सांसद को भी खरीदारों की इस परेशानी से अवगत कराया है.

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    ग्रेटर नोएडा. कोरोना (Corona) की दूसरी लहर के दौरान किसी के पति की मौत हो गई तो किसी के पिता इस दुनिया नहीं रहे. ऐसे में प्रभावित परिवारों के आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं. इनलोगों ने सोचा कि फ्लैट (Flat) बेचकर घर का गुजारा चला लें, तो मालूम पड़ा कि अपना होते हुए भी फ्लैट बिक नहीं सकता है. दरअसल, पूरा पैसा लेने के बाद भी बिल्डर्स (Builders) ने फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं की है. इसलिए कोई भी खरीदार बिना रजिस्ट्री के फ्लैट लेने को तैयार नहीं है. ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन (Greater Noida Extension) में यह कहानी किसी एक नहीं हजारों घरों की है. हर किसी की अपनी परेशानी है, लेकिन बिल्डर्स के हाथों मजबूर हैं कि कुछ कर नहीं सकते. नोएडा एस्टेट फ्लैट ऑनर्स मेन एसोसिएशन (NEFOMA) ने नोएडा (Noida) सांसद को भी खरीदारों की इस परेशानी से अवगत कराया है.

    नेफोमा के अध्यक्ष अन्नू खान ने बताया कि नेफोमा का एक डेलीगेशन नोएडा सांसद डॉ. महेश शर्मा से उनके ऑफिस में मिला था. पीएम नरेन्द्र मोदी के नाम उन्हें ज्ञापन सौंपा गया. उन्हें अवगत कराया कि किस तरह से बिल्डर्स ने खीरदारों से पूरे पैसे ले लिए, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं कर रहे हैं. इसके चलते फ्लैट के खरीदार को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मुश्किल वक्त में भी अपने ही फ्लैट को बेचकर अपनी जिंदगी नहीं बचा पा रहे हैं. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हजारों लोग परेशान हैं. मेंटीनेंस चार्ज को लेकर भी फ्लैट ऑनर को परेशान किया जाता है.

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    अथॉरिटी भी नहीं करती बिल्डर्स के खिलाफ कार्रवाई
    अन्नू खान का कहना है कि जब कोई भी बिल्डर अपना प्रोजेक्ट तैयार करता है तो काम पूरा होने के बाद और अथॉरिटी का सभी तरह का बकाया चुकाने के बाद उसे अथॉरिटी की ओर से कम्पलीशन सर्टिफिकेट मिलता है.

    इस सर्टिफिकेट के बाद ही बिल्डर फ्लैट बुक कराने वाले खरीदार को फ्लैट पर कब्जा दे सकता है. लेकिन, बहुत सारे बिल्डर ने बिना कम्पलीशन सर्टिफिकेट के ही खरीदार को कब्जा दे दिया है. ऐसे मामलों पर अथॉरिटी भी खामोश है. रेरा चेयरमैन से भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन कहीं से भी कोई राहत नहीं मिल रही है. सांसद से मुलाकात करने वालों में उमेश सिंह, अभय जैन, मनिंदर, विनय, राकेश टंडन, डीके सिन्हा, रोहित, अमनप्रीत, उदय, नरेश आदि मौजूद थे.

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