Noida News: ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का फरमान- 40% तक स्‍थानीय लोगों को रोजगार दे उद्योग जगत

Noida News Today: ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के आदेश से हलचल मची हुई है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Noida News Today: ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के आदेश से हलचल मची हुई है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Noida News: ग्रेटर नोएडा डेवलपमेंट अथॉरिटी ने उद्योग जगत के लिए नया आदेश जारी किया है. इसके तहत 40 फीसद तक स्‍थानीय लोगों को नौकरी देने की बात कही गई है. उद्योग जगत ने इसका विरोध किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 6:49 AM IST
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नोएडा. निजी क्षेत्र में स्‍थानीय लोगों को नौकरी का अवसर देने के लिए आरक्षण देने का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है. हरियाणा के बाद अब उत्‍तर प्रदेश में भी इस तरह का फैसला लिया गया है. ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (Greater Noida Development Authority) ने इस बाबत घोषणा की है. इससे उद्योग जगत में हलचल मच गई है. अथॉरिटी की ओर से जारी आदेश के अनुसार, क्षेत्र में स्‍थापित औद्योगिक इकाइयों को 40 फीसद तक स्‍थानीय लोगों को रोजगार देना होगा. बता दें कि अथॉरिटी का यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब किसान नेता राकेश टिकैत ने नोएडा क्षेत्र के जाट और गुर्जर जाति से आने वाले लोगों को निजी कंपनियों में नौकरी न देने का आरोप लगाते हुए दिल्‍ली-नोएडा बॉर्डर को जाम करने की चेतावनी दी है.

स्‍थानीय जनप्रतिनिधियों ने अथॉरिटी के इस फैसले पर खुशी जताई है. वहीं, निजी क्षेत्र ने इस आदेश का विरोध किया है. प्राइवेट सेक्‍टर के प्रतिनिधियों ने ग्रेटर नोएडा डेवलपमेंट अथॉरिटी के इस फैसले को कॉर्पोरेट सेक्‍टर की मुश्किलों को बढ़ाने वाला बताया है. इनका कहना है कि अधिकारियों को स्‍थानीय लोगों के बारे में भी बताना चाहिए कि आखिर लोकल हैं कौन? वैसे लोग जो यहां कई वर्षों से रह रहे हैं या जिसका यहां घर है या फिर जिसका इस क्षेत्र में गांव आता है.

बता दें कि इससे पहले भाजपा शासित हरियाणा में भी निजी क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं को तरजीह देने को लेकर आदेश जारी किया जा चुका है. खट्टर सरकार के फरमान के अनुसार, निजी क्षेत्र को 75 फीसद तक हरियाणा के युवाओं को रोजगार का अवसर देना होगा. विधानसभा के मानसून सत्र में पारित इस विधेयक को राज्‍यपाल ने मंजूरी भी दे दी है. हरियाणा सरकार के इस फैसले के बाद औद्योगिक जगत के बड़े संगठन CII सवाल उठा चुकी है. CII का कहना है कि इससे असंतुलन की स्थिति पैदा होगी. मालूम हो कि किसी भी कंपनी या औद्योगिक इकाई द्वारा भर्तियों की जानकारी छुपाने की स्थिति में उन पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है.
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