Noida News : दिनोंदिन बढ़ रही ऑक्सीजन की मांग, सप्लाई अब भी ज़रूरत से 20 टन कम

ऑक्सीजन सिलेंडरों की देखभाल करता कर्मचारी.

ऑक्सीजन सिलेंडरों की देखभाल करता कर्मचारी.

Noida News : जब ज़रूरत करीब 60 टन ऑक्सीजन रोज़ाना की थी, तब इससे आधी ही सप्लाई हो पा रही थी, लेकिन अब सप्लाई मांग के हिसाब से 80 फीसदी तक हो पा रही है. जानिए नोएडा में ऑक्सीजन की मांग और सप्लाई (Demand & Supply of Oxygen) का गणित.

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नोएडा. अप्रैल के तीसरे हफ्ते में नोएडा में ऑक्सीजन की डिमांड 58 टन की थी और तब सप्लाई 30 की थी. अब मांग करीब दोगुनी होकर 100 टन रोज़ाना तक पहुंच चुकी है. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के प्रकोप के बीच अगर पिछले सात दिनों के आंकड़े देखें जाएं तो ज़िला प्रशासन रोज़ 80 टन ऑक्सीजन मुहैया करवा रहा है, लेकिन यह पर्याप्त साबित नहीं हो रही है. प्रशासन का कहना है कि 20 टन की अतिरिक्त आपूर्ति करवाने की पूरी कोशिश की जा रही है.

Covid-19 की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की डिमांड में तेज़ी देखी गई. शुरू में जहां आपूर्ति रोज़ाना 30 टन की थी, तो अब 80 टन पर पहुंच चुकी है, लेकिन अभी भी डिमांड से करीब 20 टन कम है. इस कमी को भी पूरा करने की हर संभव कोशिश की जा रही है.

सुहास एलवाई, डीएम

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क्या हैं डिमांड बढ़ने के कारण?

वास्तव में ऑक्सीजन की मांग बढ़ने के एक से ज़्यादा कारण सामने आ रहे हैं. एनबीटी की एक रिपोर्ट की मानें तो सबसे बड़ा कारण मरीज़ों की लगातार बढ़ी संख्या है. 23 अप्रैल को 4793 मरीज़ थे, तब 30 टन की सप्लाई थी. अब ज़िले में कोविड मरीज़ों की संख्या 8300 से ज़्यादा है, जिसमें कुछ जगहों के मरीज़ों का आंकड़ा शामिल भी नहीं है. इन हालात में सप्लाई 80 टन है.



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ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए क्रिएटिव इमेज

अप्रैल के तीसरे हफ्ते के बाद से ही हर दिन 800 से 1200 तक नए मरीज़ रोज़ाना आते रहे जबकि रोज़ अस्पतालों से छुट्टी पाने वालों की संख्या कम रही. इस वजह से ऑक्सीजन की डिमांड लगातार बढ़ती चली गई. दूसरा अहम कारण है होम आइसोलेशन वाले मरीज़ों की संख्या बढ़ जाना. प्रशासन इन मरीज़ों के लिए करीब 500 सिलेंडर मुहैया करवा रहा है.

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कंसन्ट्रेटरों की अहमियत बढ़ गई

ऑक्सीजन के टोटे के बीच प्रशासन ने अपना फोकस कंसंट्रेटरों पर कर दिया तो कई कंपनियों ने मदद के तौर पर कोविड अस्पतालों के साथ ही बच्चों के मेडिकल संस्थानों में भी कंसंट्रेटर लगवाए. दूसरी तरफ, छोटे अस्पतालों से लेकर घरों में आइसोलेट मरीज़ों तक भी सोसायटियों के ज़रिये कंसंट्रेटर पहुंचे. बताया गया है कि ये काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं.

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