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DMRC की मदद से नोएडा मेट्रो का होगा विस्तार, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2 तक बनेंगे 5 एलिवेटेड स्टेशन

इस दौरान डीएमआरसी व एनएमआरसी के आला अधिकारी मौजूद रहे. (सांकेतिक फोटो)
इस दौरान डीएमआरसी व एनएमआरसी के आला अधिकारी मौजूद रहे. (सांकेतिक फोटो)

अनुबंध के तहत, डीएमआरसी (DMRC) सलाहकार के रूप में नई परियोजना में हर कदम पर जिसमें सिग्नलिंग, टेलिकॉम, ट्रैक के अलावा नई लाइन के लिए सभी प्रकार के सिस्टम में सलाह व मदद करेगा.

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नोएडा. नोएडा मेट्रो रेल निगम (Noida Metro Rail Corporation) ने नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2 तक विस्तार के लिए शुक्रवार को दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) के साथ अनुबंध (Contract) पर हस्ताक्षर किया है. इसके तहत एनएमआरसी ने डीएमआरसी को परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में चुना है. एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक एवं प्राधिकरण के एसीईओ प्रवीण मिश्रा और डीएमआरसी के निदेशक (बिजनेस डेवलपमेंट) पीके गर्ग ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए. यह अनुबंध पांच साल के लिए किया गया है. इस दौरान डीएमआरसी व एनएमआरसी के आला अधिकारी मौजूद रहे.

अनुबंध के तहत, डीएमआरसी सलाहकार के रूप में नई परियोजना में हर कदम पर जिसमे सिग्नलिंग, टेलिकॉम, ट्रैक के अलावा नई लाइन के लिए सभी प्रकार के सिस्टम में सलाह व मदद करेगा. इसके अलावा, डीएमआरसी लागत को कम करने, निर्माण डिजाइन के अलावा विद्युत यांत्रिकी से संबंधित कार्यों में भी सलाह देगा. संचालन के लिए एनएमआरसी के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का कार्य भी डीएमआरसी करेगा. बता दें कि फेस-टू चरण में एनएमआरसी सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2 तक मेट्रो का विस्तार करने जा रही है. इसकी दूरी 9.605 किमी है. पूरे रूट पर पांच एलिवेटेड स्टेशन सेक्टर-122, सेक्टर-123, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-4, इकोटेक-12 और ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2 शामिल हैं.

1 करोड़ का बजट बनाकर लखनऊ भेजा था
बता दें कि बीते महीने खबर सामने आई थी कि दो बड़े प्रॉजेक्ट-टॉय ट्रेन और नोएडा से इंदिरापुरम को जोड़ने वाली मेट्रो योजना बजट के कारण अधूरी पड़ी है. जीडीए ने दोनों ही प्रॉजेक्ट का अनुमानित बजट शासन को भेजा था, लेकिन उधर से जवाब नहीं आया. इस संबंध में जीडीए के अधिकारी फिर बैठक कर प्रॉजेक्ट को शुरू करने की कोशिश करेंगे. जीडीए अधिकरियों ने बताया कि इस संबंध में दोबारा वार्ता कर शासन को रिमाइंडर लेटर भेजा जाएगा. जीडीए का उद्यान विभाग टॉय ट्रेन को लेकर दो साल से कागजी प्रक्रिया पूरी कर रहा है. लखनऊ से अधिकारियों की टीम टॉय ट्रेन को लेकर यहां निरीक्षण भी कर चुकी है. टॉय ट्रेन रेलवे की ओर से दी जानी थी, जबकि सिटी फॉरेस्ट में टॉय ट्रेन के लिए पटरी बिछाने और स्टेशन बनाने का पूरा खर्चा जीडीए को उठाना था. जीडीए ने लगभग 1 करोड़ का बजट बनाकर लखनऊ भेजा था, फिर भी प्रॉजेक्ट रुका हुआ है.
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