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Noida: निशा राय के घरेलू नुस्खे से घरों से निकलने वाला कूड़ा अब पर्यावरण संरक्षण के साथ फैलाएगा हरियाली

कूड़ा

कूड़ा प्रबंधन पर घरेलू नुस्खों के बारे में जानकारी देती निशा राय

घरेलू नुस्खे से नोएडा को रहने वाली निशा राय अपने एनवायरमेंट को बचाने में सहायक बन रही है. ये ऐसे उपाय है जिस से घरों में निकलने वाले कूड़े आधे हो जाएंगे और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली दिखाई देगी.

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    नोएडा: घरों में हमारी दादी नानी नुस्खों से कई बीमारियां दूर कर देती थी, कान में दर्द हो तो या दांत में लेकिन नए समय में दादी नानी के नुस्खे अब पतली किताबों के शक्ल में रेलवे स्टेशन तक ही सीमित हो चुके हैं. लेकिन उस घरेलू नुस्खे से नोएडा को रहने वाली निशा राय अपने एनवायरमेंट को बचाने में सहायक बन रही है. ये ऐसे उपाय है जिस से घरों में निकलने वाले कूड़े आधे हो जाएंगे और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली दिखाई देगी.
    बायो कंपोस्ट से प्रतिमाह 50 किलो कचरे का निस्तारण.
    मूलतः बोकारो (Jharkhand) की रहने वाली निशा राय अपने परिवार के साथ नोएडा में पिछले लगभग एक दशक से रह रही है. वो बताती है कि एक घर से जिसमें 1 या 2 सदस्य हैं  उस घर में से एक दिन में एक से सवा किलो कचरा जरूर निकलता है. इस हिसाब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोएडा की प्रत्येक सोसायटी में हर दिन 2000 किलों तक कचरा निकल रहा है. लेकिन इसका निस्तारण कैसे हो यह किसी को नहीं पता.ऐसे में अगर हम अगर थोड़ी सी होशियारी करें तो वातावरण, देश, और शहर को बचाने में सहायक हो सकते है. वो बताती है सभी कचरा का बायो फर्टिलाइजर बनाया जा सकता है, जिससे आधा से भी ज्यादा कचरा प्रबंधन हो जाएगा. यानी एक किलो कचरे को अपनी हिस्सेदारी में से हमने 600-700 ग्राम कचरा कम उत्सर्जन किया. नोएडा शहर चालीस साल पुराना है इसको आगे भी तो चलाना है.
    प्रतिमाह सात से दस हजार रुपए तक बचाती हूं
    निशा राय बताती है कि मैंने अपने घर के बालकनी में 20 गमले लगाएं है.इसके खाद पानी के लिए हम माली पर निर्भर होते हैं जिसका हमें पैसा चुकाना पड़ता है. ऐसे में मैं अपने घर में खाद बना लेती हूं, इस से वो पैसा मेरा पूरा बच जाता है. वो बताती है कि मैं कभी भी लाइजोल और अन्य कोई लिक्विड नहीं खरीदती, जो भी फल हमारे यहां आता है इस से ही मैं अपने फर्श साफ करने के लिए लिक्विड बना लेती हूं. इस से प्रत्येक माह मेरे सात से दस हजार रुपए बचते हैं.
    लॉकडाउन में खुद भी सीखा दूसरे को भी सिखाया
    निशा राय पढ़ाई करने की शौकीन है और उन्हें अपने कल्चर से भी लगाव है. वो बताती है कि हमारे गांव में कल्चर ही था कि कचरे को घर के पीछे ही जमीन में गाड़ देना जिस से वो खाद बन जाता था. निशा कहती है कि लॉकडाउन में मैने वेबिनार के द्वारा दूसरों को भी ये चीजे सिखाई है. आज हम कम्युनिटी बना कर ऐसे कचरा को कम करने का प्रयास करते हैं. हम नोएडा में अलग अलग स्थानों पर वर्कशॉप देते हैं. जिस से लोग जागरूक हो और कचरे को कचरा न समझकर उसे यूटिलाइज करे और देश, राज्य, अपने शहर और पृथ्वी की रक्षा करें.

    (रिपोर्ट – आदित्य कुमार)

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