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आपने पेंसिल पर हाथों से बनी ऐसी कलाकृति नहीं देखी होगी, रह जाएंगे दंग.

Shailendra

Shailendra makes art on pencil.

शैलेंद्र और युवराज पेंसिल कार्विंग (Pencil Carving) करते हैं, वो पेंसिल के ग्रेफाइट वाले हिस्से पर कलाकृति बनाते हैं, जैसे कोई मूर्तिकार मूर्तियां?

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    नोएडा: ब्रिटिश लेखक जॉन रुस्किन (john ruskin) कला के बारे में लिखते हैं कि फाइन आर्ट वो है जिसमे लोगों के हाथ, दिल और दिमाग तीनों एक साथ चलता है. कला को समझने वाला कोई भी व्यक्ति रुस्कीन की इस बात की गहराई को समझ सकते है. नोएडा सेक्टर 22 में रहने वाले शैलेंद्र चौहान और युवराज की कलाकृति जॉन रुस्किन की बातों का उदाहरण है. शैलेंद्र और युवराज पेंसिल कार्विंग (Pencil Carving) करते हैं, वो पेंसिल के ग्रेफाइट वाले हिस्से पर कलाकृति बनाते हैं, जैसे कोई मूर्तिकार मूर्ति बनाता है. वैसे ही पेंसिल कार्विंग करने वाला कलाकार पेंसिल जैसी पतली और छोटी चीज पर अपनी मन में चल रहे भाव को हाथ से उकेरता है.
    लॉकडाउन में सीखा पेंसिल कार्विंग
    25 वर्षीय शैलेंद्र पेंसिल पर छोटे ब्लेड से कलाकृति बनाते हैं. वो बताते हैं कि पिछले साल corona के दौरान जब लॉकडाउन लगा था तो घर पर बैठकर बोर हो रहा था. जिसके बाद मैंने इंटरनेट पर इस तरह की कलाकृति को देखा, मुझे वो बहुत आकर्षक लगा जिसके बाद मैंने और मेरे एक दोस्त युवराज ने उसे सीखना शुरू किया, एक साल में हमने कलाकृति बनाना सीखा है. शैलेंद्र चौहान बताते हैं कि जब लॉकडाउन लगा था तो बहुत से लोग बस घर बैठे अपना समय जाया किया लेकिन मुझे लगा इस इस खाली समय को हमने अपने अंदर एक हुनर को जगाने में लगाया है.
    पेंसिल के ग्रेफाइट पर एक सेंटीमीटर लंबी और जीरो दशमलव चार सेंटीमीटर चौड़ी स्कल्पचर बनाया है
    सोनीपत के रहने वाले युवराज सिंह बताते हैं कि मैंने और  शैलेंद्र ने एक स्कल्पचर बनाया है जो शिक्षा पर आधारित था, पेंसिल पर एक बच्चा स्टूल पर बैठा है और हाथ में किताब लेकर पढ़ रहा है. यह आर्ट शिक्षा की अहमियत को समझते हुए हम दोनो ने बनाया था. शैलेंद्र हाथ में उस कलाकृति को उठाते हुए कहते है कि इस तरह की बारीक स्कल्पचर को बनाने के लिए आपके ध्यान और दिल को केंद्रित, हाथ को शांत रखना पड़ता है तभी आप 8 से 12 घंटे इसको बनाने के लिए दे सकते हैं. अगर आपका ध्यान भटका और दिल नहीं लगा तो आप कभी भी इस मूर्ति को नहीं बना सकते.
    आम पेंसिल और ब्लेड से उकेरते है कलाकृति
    शैलेंद्र अपने हाथ में पेंसिल और ब्लेड से काम करते हुए कहते हैं कि वैसे मैं पढ़ाई कर रहा हूं, थोड़ा काम भी करता हूं लेकिन पेंसिल कार्विंग मैने अपने शौक के लिए सीखा है. वो कहते हैं कि पेंसिल कार्विंग में एक खास बात है कि इसको बनाने के लिए आपको ज्यादा साजों सामान की जरूरत नहीं होती है. ये बस एक आप पेंसिल जिससे बच्चे लिखते हैं उस पर नॉर्मल ब्लेड से बना सकते हैं. लेकिन आप क्या कलाकृति उकेरना चाहते हैं इसके अनुसार पेंसिल की मोटाई आप चुन सकते हैं, जैसे एचबी पेंसिल, 2बी, 3 बी या 8 बी पेंसिल ले सकते हैं.
    (रिपोर्ट – आदित्य कुमार)

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