नोएडा: कोरोना काल में नहीं थम रहा आत्महत्याओं का सिलसिला, 24 घंटों में 10 ने मौत को गले लगाया

कोरोना काल में सुसाइड की प्रवृत्ति
कोरोना काल में सुसाइड की प्रवृत्ति

Noida News: कोरोना वायरस का संक्रमण फैलन के बाद जिले में तेजी से आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है. पिछले 6 महीनों के दौरान 300 से ज्यादा लोगों ने आत्महत्या की है.

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नोएडा. राजधानी दिल्ली से सटे जनपद गौतम बुद्ध नगर (Noida) में आत्महत्याओं (Suicidal Tendency) का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. बुधवार को एक दिन में सबसे ज्यादा आत्महत्या के मामले सामने आए. जिले में पिछले 24 घंटों के दौरान 10 लोगों ने मौत को गले लगाया है. इनमें से ज्यादातर लोगों ने आर्थिक तंगी, कारोबार डूबने और कर्ज में दबे होने के कारण जान दी है. कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के बाद जिले में तेजी से आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ी है.आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 6 महीनों के दौरान 300 से ज्यादा लोगों ने जिले में आत्महत्या की है.

पुलिस आंकड़ों के मुताबिक ग्रेटर नोएडा के बादलपुर थाना क्षेत्र के चरणी बिहार में रहने वाले देवेंद्र (30 वर्ष) नामक युवक ने बुधवार सुबह घर में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. नोएडा के एक्सप्रेस-वे थाना क्षेत्र के सेक्टर 134 में स्थित एक सोसाइटी में रहने वाली कनिका (27 वर्ष) ने मानसिक तनाव के चलते मंगलवार शाम को जहरीला पदार्थ खा लिया. गंभीर हालत में उनको एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

इन लोगों ने की आत्महत्या
ग्रेटर नोएडा के जारचा थाना क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में रहने वाले संजू (23 वर्ष) ने पत्नी से हुए कथित विवाद के चलते पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. ग्रेटर नोएडा के ही सूरजपुर थाना क्षेत्र के डेल्टा-1 में रहने वाले अनुभव कृष्णमूर्ति ने भी कथित तौर पर मानसिक तनाव के चलते खुदकुशी कर ली. उनका शव मंगलवार देर रात घर में मिला. मृतक का कथित तौर पर पत्नी से विवाद चल रहा था. ग्रेटर नोएडा में दादरी थाना क्षेत्र के एक सेक्टर में रहने वाले गंगा सिंह (53 वर्ष) ने मंगलवार देर रात घर में पंखे से फंदा लगाकर अलहत्या कर ली. नोएडा में सेक्टर-58 क्षेत्र में रहने वाले औरष ने भी बीती रात पंखे से फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली. नोएडा सेक्टर-24 क्षेत्र के गिझौड़ गांव में रहने वाली 48 वर्षीय महिला ने अपने मकान की तीसरी मंजिल से कूदकर मंगलवार को आत्महत्या कर ली. साथ ही ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख थाना क्षेत्र के महागुण माइवुड्स सोसाइटी में रहने वाले कुणाल मलिक (27) ने पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या की कोशिश की. परिजनों ने उन्हें नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया था जहां पर मंगलवार देर रात उनकी मौत हो गई. दादरी थाना क्षेत्र में काजल तुरी नामक व्यक्ति ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली.
रोजाना एक व्यक्ति कर रहा सुसाइड


नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रोजाना कोई ना कोई मौत को गले लगा रहा है. मतलब, गौतमबुद्ध नगर जिले में औसतन रोजाना एक व्यक्ति सुसाइड कर रहा है. बड़ी बात यह है कि कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू होने और इस महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के बाद आत्महत्या करने वालों की संख्या दोगुनी हो गई है. गौतमबुद्ध नगर पुलिस और मनोचिकित्सकों का कहना है कि नौकरी चले जाने, कारोबार डूबने, आर्थिक नुकसान और मौजूदा माहौल की नकारात्मकता लोगों को आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर कर रही है. विशेषज्ञ कह रहे हैं कि सकारात्मक सोच और अपने लोगों का सहयोग इस समस्या का एकमात्र समाधान हैं.

कोरोना से ज्यादा सुसाइड से हुई मौत
कोरोना वायस के संक्रमण से गौतमबुद्ध नगर जिले में अब तक 58 लोगों की मौत हुई है. दूसरी ओर 1 अप्रैल 2020 से अब तक जिले में 182 लोगों ने आत्महत्या की है. जून के महीने में जब पूरी तरह तालाबंदी लागू थी, सबसे ज्यादा 34 लोगों ने आत्महत्या की थी. अप्रैल से लेकर सितंबर तक हर महीने 30 से ज्यादा लोगों ने सुसाइड किया है. अप्रैल महीने में 24 लोगों ने मौत को गले लगाया. मई में 31 लोगों ने आत्महत्या की थी. जून में सबसे ज्यादा 34 केस सामने आए. जुलाई में 30 लोगों ने सुसाइड किया. अगस्त में 31 और सितंबर में 32 आत्महत्या के केस दर्ज किए गए. इस तरह गौतमबुद्ध नगर में अप्रैल से 30 सितंबर 2020 तक 182 लोगों ने मौत को चुना. कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हुई मौतों के मुकाबले यह संख्या 3 गुने से भी ज्यादा हैं.

ये है वजह
बता दें कि कोरोना वायरस के कारण फैली विश्वव्यापी महामारी से पहले गौतमबुद्ध नगर में हर महीने औसतन 15 आत्महत्या का आंकड़ा था. गौतमबुद्ध नगर डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक जनवरी 2020 में 16 लोगों ने आत्महत्या की थी. फरवरी में 19 लोगों ने और मार्च में 15 लोगों ने सुसाइड किए थे. 23 मार्च को देशभर में लॉकडाउन लागू हुआ था. लिहाजा, एक अप्रैल के बाद हुई आत्महत्याओं की संख्या 31 मार्च तक के मामलों से दोगुने से भी ज्यादा हैं. आत्महत्याओं के मामलों की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जो लॉकडाउन के कारण बेरोजगार हो गए हैं. उनके कारोबार डूब गए हैं. ऐसे लोगों की संख्या भी ज्यादा है, जिनके ऊपर भारी कर्ज है और चुकाने का दबाव है. दूसरी और आमदनी खत्म हो जाने के कारण संकट में घिर गए हैं इन सारे दबावों में आत्मघाती कदम लोग उठा रहे हैं. बड़ी बात यह है कि आत्महत्या करने वालों में पुरुषों की संख्या महिलाओं के मुकाबले करीब तीन गुनी है. लॉकडाउन के दौरान 160 लोगों की सुसाइड की कोशिश की.

160 लोगों ने किया आत्महत्या का प्रयास
जांच में ये भी सामने आया कि 24 मार्च 2020 को गौतमबुद्ध नगर में लॉकडाउन लागू किया गया था. यह लॉकडाउन 30 जून तक जारी रहा. इस दौरान गौतमबुद्ध नगर पुलिस कंट्रोल रूम को 160 लोगों ने आत्महत्या करने के प्रयास के बारे में जानकारी दी. पुलिस ने इन लोगों को धैर्य बंधाया. समस्या का समाधान करवाने का आश्वासन दिया. इन लोगों को काउंसलर से मिलवाया. जिससे इनकी जान बची है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सामान्य दिनों के मुकाबले यह संख्या बहुत ज्यादा थी. ग्रेटर नोएडा में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के मनोचिकित्सा विभाग में एचओडी डॉ आवंद प्रताप सिंह का कहना है कि इस पूरे दौर में अपने ही अपनों की जान बचा सकते हैं. लगभग ज्यादातर मामलों में परिवार के सदस्यों को परेशानियों की पूरी जानकारी होती है. ऐसे में उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वह दबाव से गुजर रहे अपने परिवार के सदस्य की देखभाल करें. उसका मनोबल बढ़ाएं. समस्या का समाधान करने में उसकी भरपूर मदद करें. अगर किसी व्यक्ति में सुसाइडल टेंडेंसी विकसित हो रही है तो उसे तत्काल मनोचिकित्सक से मिलवाना चाहिए. ऐसा बहुत कम होता है कि पहले ही प्रयास में कोई व्यक्ति आत्महत्या कर ले. आत्महत्या से पहले प्रभावित व्यक्ति ऐसा करने का प्रयास करता है. जिसके बारे में पता चलते ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

(रिपोर्ट: अमित सिंह)
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