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गाड़ियों पर क्यों लिखते हैं लोग अपनी जातियां, क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक?

गाड़ियों के नंबर प्लेट या शीशे पर जाति सूचक शब्द लिखने पर पुलिस ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है.

गाड़ियों के नंबर प्लेट या शीशे पर जाति सूचक शब्द लिखने पर पुलिस ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है.

गाड़ियों पर जाति सूचक शब्द लोग सिर्फ झूठी शान के लिए लिखते हैं. कुछ जातियों के युवा वर्ग में नेता बनने की चाहत में यह ग ...अधिक पढ़ें

    अक्सर देखने को मिलता है कि लोग अपने गाड़ियों के नंबर प्लेट और शीशे पर जाट, गुर्जर, यादव जैसे जाति सूचक शब्द लिख देते हैं. पुलिस ने अब गाड़ियों के नंबर प्लेट या शीशे पर जाति सूचक शब्द लिखने पर कार्रवाई शुरू की है. यूपी पुलिस आने वाले दिनों में ऐसे गाड़ियों का चालान करेगी. साथ ही अगर जरूरत पड़ेगी तो उन गाड़ियों को जब्त भी करेगी.

    पिछले कुछ दिनों से गौतमबुद्ध जिले के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पुलिस द्वारा ऑपरेशन चलाया जा रहा है. इसके तहत पुलिस जगह-जगह गाड़ियों की बड़े पैमाने पर चेकिंग करती नजर आ रही है. बीते रविवार को कुछ घंटों की चेकिंग के दौरान कई गाड़ियों का चालान हुआ और कुछ को जब्त भी किया गया. रविवार को गाड़ियों के नंबर प्लेट पर जाति सूचक शब्द लिखने पर 1457 वाहनों को पकड़ा गया. इस अभियान के दौरान नगर क्षेत्र मे 62 वाहनों को सीज (जब्त) किया गया और 561 वाहनों का चालान काटा गया. वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 37 वाहन सीज और 295 वाहनों के चालान किए गए. इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस ने 601 वाहनों के चालान काटे.

    गाड़ियों के नंबर प्लेट्स या शीशों पर जाति सूचक शब्द लिखने पर कटने लगे चालान


    गलत नंबर प्लेट्स और बिना नंबर प्लेट्स के वाहनों से शहर में क्राइम बढ़ रहा 

    गौतमबुद्ध नगर जिले के एसएसपी वैभव कृष्ण ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'गलत नंबर प्लेट्स और बिना नंबर प्लेट्स के वाहनों से शहर में क्राइम बढ़ रहा है. इसलिए ऐसे वाहनों की पहचान कर उनपर कार्रवाई हो रही है. हमलोग अब इन जाति सूचक शब्दों को गाड़ियों से हटा भी रहे हैं और चालान भी काट रहे हैं. पहली बार सिर्फ चालान और गाड़ियों से जाति सूचक हटवा रहे हैं. अगर दोबारा उसी गाड़ी में जाति सूचक शब्द लिखा मिलेगा तो गाड़ियों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी.'

    हाल के वर्षों में विशेष कर शहरों में गाड़ियों पर जाति सूचक शब्द लिखने की परंपरा कुछ ज्यादा ही चल गई है. कोई 'गुर्जर सम्राट' लिखता है तो कोई 'भीम आर्मी' तो कोई 'यादव श्रेष्ठ'. दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉक्टर नवीन कुमार न्यूज़18 हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'देखिए यह सिर्फ और सिर्फ झूठी शान के लिए लोग करते हैं. कुछ जातियों के युवा वर्ग में नेता बनने की चाहत में यह गुण विशेष तौर पर देखा जाता है. कुछ लोग 'जाति का गौरव' की भावना जगा कर अपना हित साधते हैं. ये लोग झूठी शान के कसीदे खूब गढ़ेंगे. जाति-बिरादरी में कहते फिरते हैं कि हम अपने स्वभिमान के लिए कुछ भी कर सकते हैं. लेकिन, हकीकत में ऐसा होता नहीं है.'

    यूपी के गौतमबुद्ध नगर जिले में यूपी पुलिस नंबर प्लेट से जाति सूचक शब्द हटाते हुए


    जाति सूचक शब्द लिखने पर कभी-कभी इन लोगों को नुकसान भी उठाना पड़ता है

    नवीन कुमार आगे कहते हैं, 'देखिए गाड़ियों में इस तरह के शब्द लिखने पर कभी-कभी इन लोगों को नुकसान भी उठाना पड़ जाता है. लोकल आइडेंटिटी के चक्कर में इन लोगों की कई लोगों से दुश्मनी भी शुरू हो जाती है. कुछ लोग अगर किसी जाति विशेष पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं और वो अगर गाड़ियों में इस तरह के शब्द देखते हैं तो लड़ाई शुरू हो जाती है. इससे लेने के देने पड़ जाते हैं. इसलिए ऑनर्स फीलिंग की प्रदर्शनी नहीं होनी चाहिए. अगर आप किसी जाति विशेष या संप्रदाय से हैं तो जहां जरूरत नहीं है, वहां सार्वजनिक करने की क्या जरूरत है?'

    दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एसबीएस त्यागी भी गाड़ियों के नंबर प्लेट और शीशे पर लिखने के इस शौक को दिखावे और उद्दंडता की श्नेणी में गिनते हैं. न्यूज़18 हिंदी के साथ बातचीत में एसबीएस त्यागी कहते हैं, 'अभी हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी है. अब पुराने मोटर वाहन एक्ट की तुलना में नए मोटर वाहन एक्ट के तहत यातायात नियमों के उल्लंघन पर बड़ा जुर्माना देना पड़ सकता है. पहले की तुलना में जुर्माना अब 10 गुना ज्यादा कर दिया गया है. साथ ही कानून का उललंघन करने पर जेल भेजने का भी प्रावधान किया गया है. मोटर वाहन एक्ट के तहत गाड़ियों और उसके शीशों में कुछ लिखना दंडनीय अपराध की श्रेणी में रख गया है. इसके बावजूद लोग बाज नहीं आते.'

    एसबीएस त्यागी आगे कहते हैं, 'लोगों में कानून को लेकर भय खत्म हो गया है. लोग कानून का ठीक से पालन नहीं करते. अब जरूरत है इसको और दुरुस्त करने की. देखिए भारत जैसे देशों में इस तरह का पागलपन लोगों के अंदर घुस गया है. यह सिर्फ और सिर्फ दिखावे के लिए होता है कि हम जाट हैं, हम गुर्जर हैं, हम देवबंद से हैं. कभी-कभी रोड पर गाड़ी चलाने वाला शख्स उस लिखे को देखने से अपना नियंत्रण भी खो देता है, जिससे कभी-कभी दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं.'

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