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क्यों आए दिन घरों से गिरता रहता है प्लास्टर, क्‍या किसी बड़ी घटना का हो रहा इंतजार?

क्यों आए दिन घरों से गिरते रहते है प्लास्टर, किसी बड़ी घटना का हो रहा इंतजार?

महागुण सोसाइटी में रहने वाले राहुल सहाय पेशे से वकील है वह बताते है कि अपनी समस्या को लेकर हम नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय में जाते है, वहां हमारी कोई सुनता ही नहीं, प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ऋतु माहेश्वरी कहती है कि हम कुछ नहीं कर सकते

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    नोएडा: रोटी कपड़ा और मकान किसी भी व्यक्ति के जीवन में मूलभूत आवश्यकता होती है. घर बनाना तो लोगों की सबसे बड़ी चाहत होती है ताकि उस घर के छत के नीचे व्यक्ति परिवार के साथ बैठकर सुरक्षित महसूस कर सके. लेकिन क्या हो कि जिस घर में आप बैठे हो उसकी छत से प्लास्टर आए दिन गिरते हो, जहां सपनो की गाड़ी खड़ी की हो वहां आए दिन आपकी गाड़ी पर प्लास्टर के बड़े टुकड़े गिरते हो और आपकी गाड़ी को नुकसान होता हो?

    यही स्थिति है सेक्टर 78 स्थित हाइड पार्क की और अन्य हाईराइज इमारतों की, जहां पर हजारों लोगों के सपनो के आशियाने है. आए दिन इन इमारतों की छत के प्लास्टर नीचे गिरते रहते है, जिससे वहां रहने वाले लोग असुरक्षित महसूस करते हैं.निवासियों का कहना है कि बिल्डरों ने इमारत बनाते समय खराब सामान का प्रयोग किया जिस कारण यह स्थिति बनी हुई है.

    किसी दिन जान से जाएगी तब सुनेंगे हमारी बात
    क्टर 78 के हाइड पार्क में रहने वाले अजय पांडेय बताते है कि चार साल पहले मैंने लगभग एक करोड़ रुपए लगाकर यहां घर खरीदा था, ताकि अपना एक घर हो जहां किसी तरह की कोई परेशानी न हो सुरक्षित महसूस कर सकू, लेकिन जब से घर खरीदा है तबसे आए दिन छत से प्लास्टर गिरते रहते है, कई बार हमारी गाड़ियों पर गिरे है जिससे गाड़ी का भी नुकसान होता रहा है. कई बार घर में बैठकर आराम कर रहे होते है, बच्चे पढ़ रहे होते है तभी छत से प्लास्टर का टुकड़ा गिर जाता है. एक बार पार्क में टहल रहा था, उसी दौरान छज्जा से प्लास्टर गिरा मैं तो बाल-बाल बच गया. कहीं वह मेरे सिर पर गिरता तो मेरा क्या होता?

    इंद्राणी मुखर्जी बताती है कि घर प्लास्टर गिरना कोई नई बात नहीं है, एक बार मैं अपने घर में परिवार के साथ बैठी थी तभी एक टेबल के आकार का प्लास्टर का टुकड़ा नीचे फर्श पर गिरा, संयोग से कोई उसके नीचे नहीं आया नहीं तो भगवान जाने क्या होता?

    हर बात के लिए कोर्ट जाना जरूरी नहीं, कामकाज छोड़कर कैसे घूमते रहे?
    महागुण सोसाइटी में रहने वाले राहुल सहाय पेशे से वकील है वह बताते है कि अपनी समस्या को लेकर हम नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय में जाते है, वहां हमारी कोई सुनता ही नहीं, प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ऋतु माहेश्वरी कहती है कि हम कुछ नहीं कर सकते, जिला अधिकारी सुहास एलवाई से मिलते है तो वो कहते है कि यह मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है. ऐसे में हम कहां जाए? हर बात के लिए कोर्ट जाना जरूरी तो नहीं? यहां से पांच सौ किलोमीटर दूर हाई कोर्ट पड़ता है ऐसे में सब काम छोड़कर कौन जाए अपनी शिकायत लेकर, एक दिन नोएडा प्राधिकरण के ऑफिस में मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी से मिलने पहुंच जाओ तो पूरा दिन बरबाद हो जाता है, वह मिलती नहीं हम कामकाज वाले लोग है कहां से इतनी भागदौड़ कर पायेंगे?

    टैक्स और मेंटेनेंस के पैसे प्राधिकरण को चाहिए शिकायत कहां लेकर जाऊं?

    राहुल सहाय कहते है कि बिजली,पानी, कूड़ा सबकुछ के लिए पैसे नोएडा प्राधिकरण लेता है, मेंटेनेंस के नाम पर रुपए नोएडा प्राधिकरण लेता है, लेकिन जब हम पानी परेशानी लेकर वहां जाते है तो हमे दोयम दर्जे के नागरिक की तरह पेश आते है.सहाय कहते है कि सेक्टर 71 से 78 तक जितनी भी हाईराइज इमारतों में लोग रहते है सबकी जान खतरे में है कब कोई बिल्डिंग गिर जाए कोई ठिकाना नहीं है. शाहबेरी लोग भूले नहीं हैं.

    वहीं निम्बस ग्रुप के डायरेक्टर राजीव अशोपा ने बताया कि हमें शिकायत मिली थी छत से प्लास्टर गिरने की, उसके बाद हमने अपने लोगों को वहां भेजा था ताकि स्थिति का जायजा लिया जा सके. जांच के बाद जो हमें पता चला वो ये था कि जो हिस्सा गिरा है, वो आर्किटेक्ट सजावट के लिए जो हिस्सा इमारत से आगे बढ़ा देते हैं वो गिरा है. उसे ठीक करने को कहा गया है साथ ही ऐसे निर्माण आगे से न हो इसका ध्यान रखा जाएगा.वहीं नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से इस बाबत बात करने के लिए संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया.

    शाहबेरी घटना क्या है?

    वर्ष 2018 में ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में  6 मंजिला दो इमारत भरभरा कर गिर गई थी, इस घटना में एक दर्जन लगभग लोगों की जान मलबे में दबने के कारण चली गई थी, वहीं 50 से अधिक लोग इमारत के मलबे में दब गए थे. जिसे काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया, उसके बाद जब भी बारिश होती है शाहबेरी के लोग घबरा जाते है.

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