मोबाइल के कबाड़ में लगी आग से ग्रेटर नोएडा धुआं-धुआं, सांस लेने में हुई परेशानी

मोबाइल स्क्रैप में लगी आग बुझाने में जुटी फायर ब्रिगेड की टीम.
मोबाइल स्क्रैप में लगी आग बुझाने में जुटी फायर ब्रिगेड की टीम.

दादरी बाईपास पर मोबाइल का स्क्रैप है, जिसमें आज देर शाम करीब 8 बजे आग लग गई. आग लगने की सूचना मिलने पर फायर विभाग की तकरीबन छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने में जुट गईं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 17, 2020, 10:16 PM IST
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ग्रेटर नोएडा. दिल्ली (Delhi) और इसके आसपास के इलाकों में जाड़े के मौसम के शुरू होने के साथ ही हवा में प्रदूषण (Pollution) की मात्रा बढ़ जाती है. सांस लेना दूभर हो जाता है. दरअसल, इसकी बड़ी वजह है पराली का जलना (Stubble burning). गुरुवार को भी ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) के कुछ हिस्सों में सांस लेने में तकलीफ की शिकायत सामने आई. पर इस बार मामला पराली जलाने का नहीं था. दरअसल, ग्रेटर नोएडा के थाना दादरी (Dadri) क्षेत्र के बाईपास पर पड़े स्क्रैप (मोबाइल के खराब पार्ट्स) में आग लगने से पूरे इलाके में धुआं फैल गया था. इसी वजह से इस पूरे इलाके में लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. आग लगने की सूचना पाकर मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड (fire brigade) की तकरीबन छह गाड़ियों ने लगभग आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया है. आग पूरी तरह बुझाई जा चुकी है. आग लगने का कारण अभी साफ नहीं हो पाया है.

देखते-देखते आग हुई विकराल

धूं-धूं कर जलता ये कबाड़ दअरसल दादरी बाईपास पर पड़े मोबाइल का स्क्रैप है, जिसमें आज देर शाम करीब 8 बजे आग लग गई. इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया. आग लगने की सूचना मिलने पर फायर विभाग की तकरीबन छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने में जुट गईं. वहीं, आग लगने का कारण अभी साफ नहीं ही पाया है. आग इतनी जोरदार थी कि आसपास के पूरे इलाके में धुआं पसर गया. लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था. हालांकि लगभग आधा घंटे से ज्यादा की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया है.



पराली जलाने पर नियंत्रण की तैयारी
वैसे, इस बार दिल्ली एनसीआर के लोगों को पराली जलाने की वजह से किसी तरह की परेशानी न हो इसके इंतजाम में आसपास के राज्य अभी से जुट गए हैं. हरियाणा सरकार ने राज्य में पराली प्रबंधन के लिए 1,304.95 करोड़ रुपये की एक बड़ी योजना को स्वीकृति प्रदान की है. इसका मकसद राज्य में फसल अवशेषों को जलाने से रोकना है. हरियाणा और पंजाब सबसे ज्यादा पराली जलाने वाले सूबों में शामिल हैं. क्योंकि यहां धान की बड़े पैमाने पर खेती होती है और उसकी मशीनों से कटाई होती है. चूंकि प्रदूषण की वजह से पराली एक सियासी मुद्दा भी बन चुका है, इसलिए सीएम मनोहर लाल ने धान कटाई से काफी पहले ही इसके प्रबंधन के लिए काम शुरू कर दिया है. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि राज्य सरकार ने ‘फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन’ योजना के तहत केंद्र सरकार को 639.10 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना प्रस्तुत की है. कौशल ने बताया कि राज्य सरकार फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपकरण वितरित करने, कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) बनाने एवं कंट्रोल रूम बनाने सहित पुआल के प्रबंधन के लिए हरसंभव उपाय कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गैर-बासमती उत्पादकों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सात दिनों के भीतर 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है. इसके लिए 1,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से छोटे और सीमांत किसानों की मदद भी की है. इन दोनों उद्देश्यों के लिए सरकार ने बजट में पहले ही 453 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
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