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UP: रेप केस में 19 साल बाद नाबालिग को मिली 3 साल की सजा, 5 हजार जुर्माना

गौतमबुद्ध नगर में किशोर न्याय बोर्ड ने करीब 19 साल बाद बलात्कार की घटना में सजा सुनाई है.
गौतमबुद्ध नगर में किशोर न्याय बोर्ड ने करीब 19 साल बाद बलात्कार की घटना में सजा सुनाई है.

Greater NOIDA News: 2002 के रेप केस में गौतमबुद्ध नगर (Gautam Budha Nagar) में किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट वीरेश चंद्रा व सदस्य अनीत कुमार बघेल ने दोषी को 5 हजार का अर्थदण्ड से दंडित करते हुए 3 साल के लिए विशेष गृह, इटावा भेजने का आदेश सुनाया है.

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अमित सिंह

ग्रेटर नोएडा. उत्तर प्रदेश के जनपद गौतमबुद्धनगर (Gautam Budha Nagar) में किशोर न्याय बोर्ड ने करीब 19 साल बाद बलात्कार (Rape Case) की घटना को अंजाम देने वाले एक नाबालिग को 5 हजार का अर्थदण्ड के साथ 3 साल की सजा सुनाई है. किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट वीरेश चंद्रा व सदस्य अनीत कुमार बघेल ने किशोर को विशेष गृह इटावा उत्तर प्रदेश भेजने का आदेश दिया है. वहीं अर्थदण्ड न भरने पर आरोपी को एक महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है.

ग्रेटर नोएडा के थाना दादरी में बीते 28 जून 2002 को पीड़ित के परिवार ने बलात्कार की घटना का मुकदमा दर्ज करवाया था. पुलिस ने अपनी जांच के साथ कार्यवाही करते हुए आरोपी को गिरफ्तार जेल भेज दिया था. लेकिन उस दौरान संदिग्ध को हिरासत में लेने के तीन महीने बाद जमानत पर छोड़ दिया गया. उस समय आरोपी की उम्र करीब साढ़े 17 साल थी. कुछ महीनों बाद आरोपी ने दूसरी महिला से शादी कर ली. दादरी पुलिस ने जुलाई, 2002 में नाबालिग को हिरासत में लिया था. पीड़िता के परिवार को पीड़िता के 5 महीने गर्भावस्था के बारे में पता चला और अधिकारियों को इसकी सूचना दी. लड़की ने संदिग्ध का नाम बताया था और कहा था कि उसने उसके साथ बलात्कार किया था, जब वह घर पर अकेली थी.



समय बीतता गया, केस चलता रहा
इस मामले को उसी साल अगस्त में किशोर न्याय बोर्ड गौतमबुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले को जिला सत्र अदालत में स्थानांतरित कर दिया. यहां अदालत को यह तय करने में 5 साल लग गए कि आरोपी वास्तव में नाबालिग था और उसे मेरठ में किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) में स्थानांतरित कर दिया गया था. जब 2012 में गौतमबुद्ध नगर में एक किशोर न्याय बोर्ड का गठन किया गया था, तो क्षेत्राधिकार का यह भी मुद्दा उठा, और यह मामला यहां के लिए स्थानांतरित कर दिया गया. हालांकि इस केस में कार्यवाही होने में समय लगा और बीते मंगलवार को फैसला सुनाया गया.

दोषी को इटावा स्थित किशोर गृह के विशेष गृह में भेजा गया

किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट वीरेश चंद्र और सदस्य अनित बघेल ने आरोपी को दोषी ठहराया. अभियोजन अधिकारी अमित उप्पल ने बताया कि आरोपी को इटावा स्थित किशोर गृह के विशेष गृह में भेजा गया है क्योंकि वह पहले से ही 3 महीने के लिए कारावास में था. अमित उप्पल ने आरोपी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति की पुष्टि करने के साथ उसे बच्चे होने का भी जिक्र किया लेकिन बलात्कार के बाद पीड़िता गर्भावस्था के बारे में कुछ भी पुष्टि नहीं कर सका.

मुकदमे में देरी पर बोले किशोर न्याय बोर्ड सदस्य

मुकदमे में देरी के बारे में उप्पल ने कहा कि कई मामले ऐसे हैं, जो सालों से लंबित हैं. कभी-कभी गवाह उपलब्ध नहीं होते हैं. अन्य समय में अदालत काम नहीं करती है. पुलिस अधिकारी किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाते हैं और कुछ तारीखों पर न्यायाधीश अवकाश पर हो सकते हैं. बलात्कार के मामलों में, विशेष रूप से पीड़ितों और गवाहों का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है.

किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट वीरेश चंद्रा व सदस्य अनीत कुमार बघेल ने सभी तथ्य, गवाह और सबूतों के आधार पर बीते मंगलवार को सजा सुनाते हुए कहा कि बलात्कार की घटना के समय पीड़िता नाबालिग होने के साथ आरोपी करीब साढ़े 17 साल का था. करीब 19 साल बाद अदालत ने आरोपी को 5 हजार का अर्थदण्ड से दंडित करते हुए 3 साल के लिए विशेष गृह इटावा उत्तर प्रदेश में भेजने का आदेश सुनाया है. साथ ही ये भी आदेश किया कि अगर आरोपी अर्थदण्ड नही भरता है तो आरोपी को एक महीने की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी.
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