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गजब! बाघ के खौफ से खुले में शौच से मुक्त हो गए आधा दर्जन गांव

UMA SHANKER | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 30, 2019, 4:57 PM IST
गजब! बाघ के खौफ से खुले में शौच से मुक्त हो गए आधा दर्जन गांव
एक टाइगर के खौफ से खुले में शौच से मुक्त हुए बुंदेलखंड के आधा दर्जन गांव

हमीरपुर (Hamirpur) और महोबा (Mahoba) के बॉर्डर से सटे गावों गयोढ़ी और कुनेह्टा में जैसे ही बाघ (Tiger) की दहाड़ सुनाई दी, लोग दहशत में आ गए. आलम यह हुआ कि लोगों ने अपनी आदत बदल ली और खुले में शौच (ODF) जाना ही छोड़ दिया.

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हमीरपुर. आम आदमी हो या जानवर, भला बाघ (Tiger) के सामने जाने का जोखिम कौन लेगा. जी हां, बात सच है और इसकी बानगी यूपी (UP) के बुंदेलखंड (Bundelkhand) में देखने को भी मिली. जब हमीरपुर (Hamirpur) और महोबा (Mahoba) जिले के दो गांव में दिखे बाघ के खौफ से आधा दर्जन गांव खुले में शौच से मुक्त (ODF) हो गए. प्रदेश और केंद्र सरकार ने खूब कोशिश की कि जिले के गांव ओडीएफ हो जाए, लेकिन ऐसा हो न सका. अचानक से इस कहानी में एक नया मोड़ तब आता है, जब एक बाघ की एंट्री होती है. हमीरपुर और महोबा के बॉर्डर से सटे गावों गयोढ़ी और कुनेह्टा में जैसे ही बाघ की दहाड़ सुनाई दी, लोग दहशत में आ गए. आलम यह हुआ कि लोगों ने अपनी आदत बदल ली और खुले में शौच जाना ही छोड़ दिया. लिहाजा जो काम जिला प्रशासन नहीं करवा सका वह एक बाघ ने कर दिया. अब गांव ओडीएफ हो चुका है यानी खुले में शौच से मुक्ति.

पांच दिन तक रहा बाघ का खौफ

दरअसल, बाघ ने इन गांवों के समीप के जंगल में अपना डेरा जमा लिया. वो भी एक दो दिन नहीं, पूरे पांच दिन तक. अब गांव वाले भी परेशान थे कि शौच के लिए जंगल कैसे जाएं? तो गांव वालों ने घर में बने शौचालय में जाना ही मुनासिब समझा. बाघ की दहशत की वजह से दोनों जिलों के आधा दर्जन गांव खुद ही ओडीएफ हो गए. हालांकि वन विभाग को बाघ तो नहीं मिला, लेकिन उसके पदचिन्ह आज भी लोगों में दहशत बनाये हुए है. यहां के लोगो की दिनचर्या खेत से शुरू होकर खेत में ही खत्म होती थी, लेकिन एक बाघ के खौफ के चलते अब खुले में शौच जाना तो दूर लोगों ने अपने खेतों में जाना छोड़ दिया है. शाम होते ही लोग अपने-अपने घरों में 'बंद' हो जाते हैं औऱ जब निकलते है तो झुंड में. वो भी लाठी-डंडों और हथियारों के साथ.

पुलिस व वन विभाग की टीम ने चलाया सर्च ऑपरेशन

मामला हमीरपुर और महोबा जिले के गयोढ़ी और कुनेह्टा इलाके का है, जहां बीते दिनों पहले एक खेत मे बाघ देखे जाने के बाद दहशत का माहौल बन गया. आनन-फानन में इसकी सूचना वन विभाग और पुलिस को दी गई. टाइगर की सूचना मिलने पर गयोढ़ी के जंगलों में पहुंची महोबा-हमीरपुर की पुलिस और वन विभाग की टीमों ने सतर्कतापूर्वक टाइगर को पकड़ने के लिए उसके पैरों के निशान पर सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन कोई सफलता नही मिली. लेकिन ग्रमीणों को उसके दहाड़ने की आवाजें जरूर सुनाई दीं. कुछ जानवरों के कंकाल भी मिले. जिसके चलते लोगों के जेहन में बाघ का खौफ बैठ गया. लोगों ने अपने घर में ही बने शौचालय का उपयोग करने में भलाई समझी. जिसके बाद आधा दर्जन गांव अपने आप ही ओडीएफ हो गए.

police and forest department searching for tiger
बाघ की तलाश में जुटी हैं टीमें


पन्ना टाइगर रिज़र्व से भटक कर आने की आशंका
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डीएफओ राम जी बताते हैं कि हमीरपुर और महोबा जिले के बार्डर के गांवों के जंगलों की सीमाएं पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगलों से मिलती हैं. जिसके चलते यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह बाघ लगभग 150 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यहां आ पहुंचा. फिलहाल इस टाइगर ने अभी तक किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है.

सरकारी पैसों से टॉयलेट तो बने लेकिन लोग खुले में ही जाते थे शौच

village declared odf due to tiger
टॉयलेट बने होने के बावजूद लोग खुले में शौच के लिए जाते थे


गांव में शौचालय के लिए पैसा भी खूब आया. प्रदेश और केंद्र सरकार ने खूब कोशिश भी की लोग अपने घर में बने शौचालय का ही प्रयोग करें. अधिकारी खुद इन्हें समझाते रहे. लेकिन जनता है साहब, सुनती सबकी है और करती अपने मन की है. बस इस बार सब उल्टा हो गया. मध्य प्रदेश के पन्ना के जंगलों से भटककर आया बंगाल टाइगर ने अपनी दहाड़ सुनाई और गांव वालों ने बाघ की सुनी भी और शौचालय का उपयोग करना भी शुरू कर दिया.

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First published: November 30, 2019, 3:16 PM IST
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