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हापुड़: गढ़मुक्तेश्वर के नक्का कुआं से जुड़ा है गंगा का रहस्य

हापुड़ : गढ़मुक्तेश्वर के नक्का कुआं से जुड़ा है गंगा का रहस्य

हापुड़ : गढ़मुक्तेश्वर के नक्का कुआं से जुड़ा है गंगा का रहस्य

उत्तरप्रदेश में जनपद हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में आदिकाल में राजा इंद्र ने अपने दरबार में सम्मेलन बुलाया था. जिसमें तत्कालीन राजा-महाराजा भाग लेने पहुंचे थे. उस समय का बलशाली राजा नहुष भी सम्मेलन में भाग लेने पहुँच गया था. वह रानी इंद्राणी को देख उनकी सुंदरता पर उत्तेजित हो गया था. रानी ने नहुष की मन की बात को भांप लिया और उसके सामने एक प्रस्ताव रखा कि अगर वह घोड़ों के स्थान पर ऋषि मुनियों को जोड़कर पालकी में सवार होकर उसके दरबार में पहुंचेगा तो वह उसे पसंद करेंगी.

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    उत्तर प्रदेश में जनपद हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में आदिकाल में राजा इंद्र ने अपने दरबार में सम्मेलन बुलाया था. जिसमें तत्कालीन राजा-महाराजा भाग लेने पहुंचे थे. उस समय का बलशाली राजा नहुष भी सम्मेलन में भाग लेने पहुंच गया था. वह रानी इंद्राणी को देख उनकी सुंदरता को लेकर आकर्षित हो गया था. रानी ने नहुष की मन की बात को भांप लिया और उसके सामने एक प्रस्ताव रखा कि अगर वह घोड़ों के स्थान पर ऋषि मुनियों को जोड़कर पालकी में सवार होकर उसके दरबार में पहुंचेगा तो वह उसे पसंद करेंगी.

    रानी इंद्राणी के रूप पर मोहित हुआ नहुष घोड़ों के स्थान पर ऋषि मुनियों को जोड़कर इंद्र दरबार की तरफ चल दिया. शीघ्र पहुंचने की चाहत में उसने तेज चलो का आदेश देकर ऋषि मुनियों पर कोड़े बरसा दिए थे. जिससे क्रोधित होकर दुर्वासा ऋषि ने उसे सर्प योनि में आने का श्राप दे दिया था. सर्प योनि में आने के बाद देवी-देवताओं के कहने पर राजा नहुष गढ़मुक्तेश्वर के मुक्तेश्वरा मंदिर में पहुंचा और वर्षो तक घोर तपस्या करने के साथ ही मोक्ष दायिनी में डुबकी लगाई. जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे श्राप से मुक्त कर दिया . गंगा मंदिर के कुलपुरोहित पंडित संतोष कौशिक का कहना है कि श्राप से मुक्त होने पर राजा नहुष ने मंदिर परिसर में मीठे जल की कुएं का निर्माण कराया था. जिससे इस को वर्तमान में नक्का कुआं  के नाम से जाना जाने लगा.

    गंगा से मिलता है नक्का कुआं को जल
    प्राचीन काल में खांड का सामान ले जा रहे एक व्यापारी ने अपनी बैल गाड़ी को कुएं के पास रोक लिया था. जहां पानी पीने के लिए बैल गाड़ी समेत कुएं में गिर गए थे. जिनके शव एक सप्ताह बाद बैल गाड़ी समेत गंगा में तैरते हुए बरामद हुए थे. तभी इस बात का खुलासा हुआ कि इस कुएं में गंगा से ही जल आ रहा है. यहीं कारण है कि इस कुएं का जल स्तर भी गंगा के समान रहता है और उसी के अनुसार घटता बढ़ता रहता है.

    हापुड से न्यूज़18 लोकल के लिए सौरभ त्यागी की रिपोर्ट

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