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हापुड़ : जानिए गढ़ गंगा नगरी के मुक्तेश्वरा मंदिर की क्या है अनूठी मान्यता

हापुड़

हापुड़ : जानिए गढ़ गंगा नगरी के मुक्तेश्वरा मंदिर की क्या है अनूठी मान्यता

उत्तरप्रदेश के जनपद हापुड़ के गढ़ गंगा नगरी में मुक्तेश्वरा मंदिर की भी अनूठी मान्यता है. कार्तिक गंगा स्नान के लिए आने वाले अधिकांश श्रद्धालु मंदिर में एक दिन पहले से ही डेरा डाल लेते हैं.क्योकि ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु यहां रात में पड़ाव डाल कर मन्नत मांगता है उसकी मन्नत जरूर पूरी हो जाती है. मन्नत पूरी होने पर यहा प्रसाद चढ़ाया जाता है.हापुड की तीर्थ गंगा नगरी गढ़मुक्तेश्वर में वैसे तो बहुत से धार्मिक स्थल और मंदिर हैं, जिनकी अपनी अपनी मान्यताएं होने के कारण श्रद्धालु इन स्थानों के दर्शन करते हैं. ऐसे ही खादर गंगा मेला मार्ग पर स्थित मुक्तेश्वरा मंदिर है, जिसमें हर वर्ष कार्तिक गंगा मेले पर आने वाले अधिकांश श्रद्धालु रात को  पड़ाव डाल कर मन्नत मांगते हैं. 

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    उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ के गढ़ गंगा नगरी में मुक्तेश्वरा मंदिर की भी अनूठी मान्यता है. कार्तिक गंगा स्नान के लिए आने वाले अधिकांश श्रद्धालु मंदिर में एक दिन पहले से ही डेरा डाल लेते हैं.क्योकि ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु यहां रात में पड़ाव डाल कर मन्नत मांगता है उसकी मन्नत जरूर पूरी हो जाती है. मन्नत पूरी होने पर यहा प्रसाद चढ़ाया जाता है.हापुड की तीर्थ गंगा नगरी गढ़मुक्तेश्वर में वैसे तो बहुत से धार्मिक स्थल और मंदिर हैं, जिनकी अपनी-अपनी मान्यताएं होने के कारण श्रद्धालु इन स्थानों के दर्शन करते हैं. ऐसे ही खादर गंगा मेला मार्ग पर स्थित मुक्तेश्वरा मंदिर है, जिसमें हर वर्ष कार्तिक गंगा मेले पर आने वाले अधिकांश श्रद्धालु रात को पड़ाव डाल कर मन्नत मांगते हैं.

    मंदिर के पुजारी बाबा महेश गिरी ने बताया कि पूर्वज बताते हैं कि भगवान परशुराम ने कार्तिक गंगा स्नान के दौरान यहां पांच स्थानों पर शिवलिंग स्थापित किए थे. भगवान परशुराम द्वारा स्थापित शिवलिंग मुक्तेश्वरा महादेव के प्रांगण में तथा दूसरा नुहुश कूप के निकट जंगल में स्थित है, जो आज झारखण्डेश्वर महादेव के नाम से दर्शनीय है और तीसरा शिवलिंग गांव कल्याणपुर के निकट स्थापित महादेव के नाम से प्रसिद्ध है. चौथा शिवलिंग दतियाना में लाल मंदिर व पांचवा पुरा महादेव मेरठ में स्थापित है. राजा नुहुश जो किसी श्राप वश गिरगिट की योनि में आ गये थे, धर्मराज युधिष्ठर के कहने पर यहीं पर पाप मुक्त हुऐ थे. उन्होंने यहां यज्ञ कराया. यज्ञ शाला के निकट मुक्तेश्वरा महादेव मंदिर के प्रांगण में एक बाबड़ी बनावाई.

    स्वत:महाभारत काल से ही परम्परागत कार्तिक मास में लगने वाले इस विशाल मेले का प्रबंधन जिला परिषद करती है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु कलुश विनाशनी, पाप हारिणी, अमृतमयी गंगा जी में स्नान करके आपको पापों से मुक्त बनाते हैं. मेला आरम्भ होने से पूर्व श्रद्धालुओं की भैंसा बुग्गी, ट्रैक्टर-ट्राली तथा अन्य वाहनों से पहुंचना शुरू हो जाते हैं, जो एक रात को अवश्य रूप से मुक्तेश्वरा मंदिर में रुक कर जाते हैं.


    हापुड़ से न्यूज़18 लोकल के लिए सौरभ त्यागी की रिपोर्ट

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