• Home
  • »
  • News
  • »
  • uttar-pradesh
  • »
  • हापुड़ : जानिए किसने कहा कि हिंदी रोजगार की भाषा,सिखाती है सामाजिकता और संस्कार

हापुड़ : जानिए किसने कहा कि हिंदी रोजगार की भाषा,सिखाती है सामाजिकता और संस्कार

शिक्षाविद डॉ

शिक्षाविद डॉ तिलक सिंह हिंदी की महत्वा पर अपने विचार रखते हुए

हिंदी की लोकप्रियता का सबसे बड़ा उदाहरण पत्रकारिता है, ट्रांसलेशन के क्षेत्र में भी हिंदी का बड़ा महत्व है इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशे जा सकते हैं. देश के कई विश्वविद्यालयों के सिलेबस में भी हिंदी को वरीयता दी गई है, अनेक भाषाओं के शब्दों का समायोजन हिंदी को समृद्ध बनाता है केवल भारतीय ही नहीं विदेशी पटल पर भी हिंदी पढ़ी जाने वाली प्रिय भाषाओं में एक बनती जा रही है, प्रवासी हिंदी साहित्य पटल पर समृद्ध हो रहा है.

  • Share this:

    हिंदी रोजगार की भाषा,सिखाती है सामाजिकता और संस्कार

    उत्तरप्रदेश के जनपद हापुड में शिक्षाविद डॉ तिलक ने हिंदी में 100 से अधिक शोध कार्य और चार किताबे लिखकर हिंदी की गरिमा को बढ़ाया है. उनके द्वारा लिखित पुस्तके भारत के सभी विश्वविद्यालय के कोर्स में शामिल है. हिंदी की लोकप्रियता का सबसे बड़ा उदाहरण पत्रकारिता है, ट्रांसलेशन के क्षेत्र में भी हिंदी का बड़ा महत्व है इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशे जा सकते हैं. देश के कई विश्वविद्यालयों के सिलेबस में भी हिंदी को वरीयता दी गई है, अनेक भाषाओं के शब्दों का समायोजन हिंदी को समृद्ध बनाता है केवल भारतीय ही नहीं विदेशी पटल पर भी हिंदी पढ़ी जाने वाली प्रिय भाषाओं में एक बनती जा रही है, प्रवासी हिंदी साहित्य पटल पर समृद्ध हो रहा है.

    डॉ तिलक का का जन्म 20 जनवरी 1944 को आगरा के एक गांव में हुआ था, इनके पिता किसान थे इन्होंने हाई स्कूल तक की पढ़ाई गांव से कुछ दूरी एक स्कूल में की. 1960 में इन्होंने हाईस्कूल परीक्षा पास की जिसमें उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया था.उस समय सरकारी आदेश था कि जो विद्यार्थी हाई स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करेगा उसके लिए भारत सरकार द्वारा दूरसंचार विभाग में सीधे नियुक्ति मिलेगी. नौकरी के साथ साथ ही इन्होंने स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई के साथ आगरा विश्वविद्यालय से भाषा विज्ञान में पीएचडी कर 1978 में हापुड़ के एसएसबी डिग्री कॉलेज में हिंदी विभाग में नियुक्ति हुई, इस कॉलेज में इन्होंने शोध परिषद की स्थापना कराई.डॉक्टर तिलक के 500 आर्टिकल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित हो चुके है.भाषा विज्ञान पर 100 से अधिक विद्यार्थियों ने उनके सानिध्य में पीएचडी करने वालों में कई छात्र आज आईएएस, पीसीएस है.उल्लेखनीय कार्य के लिए भारत सरकार ने डॉक्टर तिलक को दो बार सम्मानित.
    डॉक्टर तिलक की पुस्तकें सभी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल है 1: नवीन शोध विज्ञान, 2: नवीन भाषा विज्ञान, 3 : हिंदी भाषा और साहित्य का इतिहास यह किताबें देश में आईएएस,पीसीएस, आईपीएस की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए अति महत्वपूर्ण बताई गई हैं.

    डॉ तिलक ने बताया कि उनके द्वारा लिखित पुस्तके विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल हैं हिंदी में सबसे अधिक रोजगार हैं. उनकी पुस्तक हिंदी भाषा और साहित्य का इतिहास आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, नेट की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं. कई बार हिंदी की बारीकियां सीख आईपीएस, आईएएस बन चुके हैं. डिग्री कॉलेज में प्रवक्ता बनने के लिए हिंदी में पीएचडी जरूरी है, इसके अलावा अनुवाद हिंदी अधिकारी, भाषा अधिकारी पद पर जाने की भी अच्छी संभावनाएं हैं.


    हापुड़ से न्यूज़18 लोकल के लिए सौरभ त्यागी की रिपोर्ट

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज