हरदोई: फर्जी अंक पत्र लगाकर नौकरी कर रहे 3 शिक्षक बर्खास्त, वेतन वसूली के भी निर्देश

बीएसए हरदोई हेमंत राव ने आरोपों की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की.

बीएसए हरदोई हेमंत राव ने आरोपों की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की.

Hardoi News: बीएसए ने बताया कि तीनों की नियुक्ति 20 जुलाई 2013 को हुई थी. फर्जी अंक पत्र के आधार पर नौकरी की शिकायत होने पर जांच कराई गई तो खेल की पोल खुली

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हरदोई. परिषदीय विद्यालयों (Primary Schools) में शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े के नए-नए मामले सामने आ रहे हैं. नौकरी के लगभग 8 साल बाद तीन शिक्षक फर्जी टीईटी के अंकों के आधार पर नौकरी करते पकड़े गए. जिसके बाद ने तीनों को बर्खास्त कर दिया और उनसे वेतन वसूली के भी निर्देश दिए. तीनों फिरोजाबाद जनपद के रहने वाले हैं और भरखनी विकास खंड में नौकरी कर रहे थे.

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने बताया कि भरखनी विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय हथौड़ा के सहायक अध्यापक वीरेश कुमार का जाति प्रमाण पत्र भी फर्जी निकला. टीईटी में उन्हें 50 अंक मिले थे और वह फेल थे, लेकिन 88 अंक का फर्जी अंक पत्र लगाकर नौकरी हासिल की थी. इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय धानीनगला के सहायक अध्यापक योगेंद्र सिंह ने भी टीईटी का फर्जी अंक पत्र लगाया था. परीक्षा में उन्हें 71 अंक हासिल हुए थे, लेकिन उन्होंने 91 अंक का अंक पत्र लगाकर नौकरी पाई. उच्च प्राथमिक विद्यालय धानीनगला के ही जितेंद्र कुमार ने टीईटी में मात्र 35 अंक पाए थे पर उन्होंने 87 अंक दर्शाते हुए फर्जी अंक पत्र लगाया.

जांच में खुली पोल 

बीएसए ने बताया कि तीनों की नियुक्ति 20 जुलाई 2013 को हुई थी. फर्जी अंक पत्र के आधार पर नौकरी की शिकायत होने पर जांच कराई गई तो खेल की पोल खुली. तीनों को कई बार कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया और आरोपों की पुष्टि होने पर तीनों को बर्खास्त कर दिया गया है. बीएसए ने बताया कि तीनों ही फिरोजाबाद जिले के रहने वाले हैं, जिसमें वीरेश कुमार और जितेंद्र कुमार छिच्छामऊ पोस्ट शिकोहाबाद, योगेंद्र कुमार स्वामी नगर रेलवे स्टेशन शिकोहाबाद का रहने वाला है. तीनों को बर्खास्त कर उनके पते पर पत्र भेजा जा रहा है.
आठ साल तक करते रहे नौकरी 

विभाग में जांच पर जांच होती रहीं लेकिन तीनों अध्यापक शान से नौकरी करते रहे. 20 जुलाई 2013 को नियुक्ति के बाद तीनों ने पदोन्नति भी हासिल की और इतना ही नहीं योगेंद्र और जितेंद्र ने जुगाड़ से एक ही विद्यालय में तैनाती भी पा ली. जिसके बाद से विभाग की आंखों में धूल झोंकते रहे और जिम्मेदार आंख बंद किए बैठे रहे है.
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